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Varanasi News: अब संस्कृत में होगी पर्यावरण की भी पढ़ाई

Mon, 09 Oct 2023 01:16 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 09 Oct 2023 01:16 AM IST
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Now environment will also be taught in Sanskrit
ॐ अग्निमीले पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम होतारं रत्नधातमम अर्थात हम अग्निदेव की स्तुति करते हैं। अग्निदेव यज्ञ के पुरोहित, देवता ऋत्विज, होता और याचकों को रत्नों से विभूषित करने वाले हैं। ऋग्वेद का पहला मंत्र जल्द ही पर्यावरण पाठ्यक्रम का अंग होगा। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय जल्द ही वैदिक परंपरा पर आधारित पर्यावरण पाठ्यक्रम तैयार करने जा रहा है।
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में शास्त्री की कक्षाओं में छात्र-छात्राएं नए सत्र से पर्यावरण का नया पाठ्यक्रम पढ़ेंगे। वेद, उपनिषद और पुराणों को आधार बनाकर पर्यावरण का नया पाठ्यक्रम जल्द ही तैयार होगा। इसके लिए सात सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया। वैदिक परंपरा के आधार पर पर्यावरण का पाठ्यक्रम तैयार करने वाला यह पहला विश्वविद्यालय होगा। पाठ्यक्रम में पर्यावरण के स्वरूप, तत्व, भेद, रक्षा के उपाय, प्रभाव, विभिन्न श्रेणियां, पर्यावरण से संरक्षण के फायदे, लक्ष्य, तनाव प्रबंधन, सामान्य प्रबंध के साथ ही पर्यावरण के जरिए विश्व बंधुत्व के भाव को भी समाहित किया जाएगा।
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छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो. हरिशंकर पांडेय के नेतृत्व में पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए समिति ने अपना कार्य शुरू कर दिया है। वेद, संहिता, उपनिषद और भारतीय संस्कृति के अध्ययन के आधार पर पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा। प्रो. पांडेय ने बताया कि कुलपति प्राे. बिहारी लाल शर्मा के निर्देशन में इस पाठ्यक्रम को तैयार किया जा रहा है। नए सत्र से इसे लागू भी कर दिया गया है। कहा कि पहले वेद ऋग्वेद के पहले मंत्र की शुरूआत ही प्रकृति की आराधना से होती है। इसमें अग्नि की आराधना की गई है। पुराणों में वर्णन है कि दशकूप समा वापी, दशवापी समोहद्रः। दशहृद समः पुत्रो, दशपुत्रो समो द्रुमः। इसका तात्पर्य है कि दस पुत्रों की तुलना एक वृक्ष से की गई है। इसको आधार बनाकर ही पर्यावरण का नया पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है। भगवान शिव के अष्टमूर्ति स्वरूप को केंद्र में रखकर इस पाठ्यक्रम को तैयार किया जा रहा है। प्रो. पांडेय ने बताया कि संविवि देश का पहला विश्वविद्यालय होगा जिसमें वैदिक परंपरा के आधार पर पर्यावरण का पाठ्यक्रम तैयार किया गया है।
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पाठ्यक्रम में होंगे
-पर्यावरण के आधुनिक घटक- पर्यावरण क्या है
- पर्यावरण के तत्व हैं
-पर्यावरण की सुरक्षा कैसे की जाए
- पर्यावरण का समाज पर प्रभाव
- पर्यावरण का व्यक्ति पर प्रभाव
- जल की संरक्षा कैसे हो-आक्सीजन का उत्पादन कैसे होगा
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