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अब मोबाइल पर बाबा का लाइव दर्शन
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
Updated Tue, 10 Feb 2015 01:52 AM IST
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श्रद्धालु जब चाहेंगे तब काशी विश्वनाथ का लाइव दर्शन कर सकेंगे। मंदिर में पहली बार हाई डेफिनेशन कैमरे लगाए जाएंगे, जिनको इंटरनेट प्रोटोकाल प्लेटफार्म से जोड़ा जाएगा।
इस सुविधा की शुरुआत के बाद एंड्रायड मोबाइल या इंटरनेट के जरिये दुनिया के किसी कोने में बैठे भक्त बाबा का दर्शन कर सकेंगे। इसका ट्रायल शुरू करने का निर्णय सोमवार को न्यास परिषद की बैठक में लिया गया। मंडलायुक्त सभागार में हुई बैठक में वित्तीय मामलों पर नकेल कसने पर अधिक जोर दिया गया।
बैठक में अधिग्रहण के 32 साल बाद बनी सेवा नियमावली विरोध के चलते पारित नहीं हो सकी और तय किया गया कि न्यास के सदस्यों को नियमावली भेजकर पहले सुझाव लिया जाएगा। मंदिर के नाम पर फर्जी बैंक खाते खोलकर भक्तों से रकम ऐंठने का मामला भी सामने आया।
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ऐसे खातों की जांच कर उनका संचालन तुरंत बंद कराने का निर्देश मुख्य कार्यपालक अधिकारी एके अवस्थी को दिया गया। मंडलायुक्त आरएम श्रीवास्तव ने चढ़ावे की रकम की गिनती और कैशबुक का रिकार्ड नियमित दर्ज न होने को गंभीरता से लिया।
इस पर उन्होंने संबंधित बैंक से पूरी जानकारी लेने और मंदिर के लेखा संबंधी कार्य को नियमानुसार संचालित कराने के लिए लेखाधिकारी की नियुक्ति करने को प्रमुख सचिव वित्त को पत्र लिखने की हिदायत दी। बैठक में विस्तारीकरण योजना को मूर्त रूप देने के लिए तैयार नक्शे को उपयुक्त नहीं माना गया।
तय हुआ कि चार अन्य वास्तुविदों से नक्शा तैयार कराया जाए। मंदिर के गर्भगृह में पुलिस कर्मियों की जगह भूतपूर्व सैनिकों की तैनाती के ट्रायल पर भी सहमति बनी। मंदिर परिसर में बेतरतीब एवं उखड़ी बिजली वायरिंग को अंडरग्राउंड कराने और मंदिर की आय बढ़ाने के लिए तिरुपति बालाजी की तरह दो जगहों पर ‘कुबेर पात्र’ लगाने का भी निर्देश दिया गया।
विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में लगा साढ़े आठ टन क्षमता का एसी हटाने का भी निर्णय हुआ। बैठक में एसी लगने से शिखर में बने नक्षत्र यंत्र के ढंकने पर चिंता जताई गई। न्यास अध्यक्ष ने प्रसाद बिक्री के लिए मंदिर परिसर में खोली गई दुकान का काउंटर हटाने का भी निर्देश दिया।
इस मौके पर प्रमुख सचिव (धर्मार्थ कार्य) नवनीत सहगल, प्रमुख सचिव न्याय अनिरुद्ध सिंह, मुख्य कार्यपालक अधिकारी अजय कुमार अवस्थी उपस्थित थे। बैठक की अध्यक्षता न्यास परिषदअध्यक्ष के आचार्य पंडित अशोक द्विवेदी ने की।
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इस सुविधा की शुरुआत के बाद एंड्रायड मोबाइल या इंटरनेट के जरिये दुनिया के किसी कोने में बैठे भक्त बाबा का दर्शन कर सकेंगे। इसका ट्रायल शुरू करने का निर्णय सोमवार को न्यास परिषद की बैठक में लिया गया। मंडलायुक्त सभागार में हुई बैठक में वित्तीय मामलों पर नकेल कसने पर अधिक जोर दिया गया।
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बैठक में अधिग्रहण के 32 साल बाद बनी सेवा नियमावली विरोध के चलते पारित नहीं हो सकी और तय किया गया कि न्यास के सदस्यों को नियमावली भेजकर पहले सुझाव लिया जाएगा। मंदिर के नाम पर फर्जी बैंक खाते खोलकर भक्तों से रकम ऐंठने का मामला भी सामने आया।
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ऐसे खातों की जांच कर उनका संचालन तुरंत बंद कराने का निर्देश मुख्य कार्यपालक अधिकारी एके अवस्थी को दिया गया। मंडलायुक्त आरएम श्रीवास्तव ने चढ़ावे की रकम की गिनती और कैशबुक का रिकार्ड नियमित दर्ज न होने को गंभीरता से लिया।
इस पर उन्होंने संबंधित बैंक से पूरी जानकारी लेने और मंदिर के लेखा संबंधी कार्य को नियमानुसार संचालित कराने के लिए लेखाधिकारी की नियुक्ति करने को प्रमुख सचिव वित्त को पत्र लिखने की हिदायत दी। बैठक में विस्तारीकरण योजना को मूर्त रूप देने के लिए तैयार नक्शे को उपयुक्त नहीं माना गया।
तय हुआ कि चार अन्य वास्तुविदों से नक्शा तैयार कराया जाए। मंदिर के गर्भगृह में पुलिस कर्मियों की जगह भूतपूर्व सैनिकों की तैनाती के ट्रायल पर भी सहमति बनी। मंदिर परिसर में बेतरतीब एवं उखड़ी बिजली वायरिंग को अंडरग्राउंड कराने और मंदिर की आय बढ़ाने के लिए तिरुपति बालाजी की तरह दो जगहों पर ‘कुबेर पात्र’ लगाने का भी निर्देश दिया गया।
विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में लगा साढ़े आठ टन क्षमता का एसी हटाने का भी निर्णय हुआ। बैठक में एसी लगने से शिखर में बने नक्षत्र यंत्र के ढंकने पर चिंता जताई गई। न्यास अध्यक्ष ने प्रसाद बिक्री के लिए मंदिर परिसर में खोली गई दुकान का काउंटर हटाने का भी निर्देश दिया।
इस मौके पर प्रमुख सचिव (धर्मार्थ कार्य) नवनीत सहगल, प्रमुख सचिव न्याय अनिरुद्ध सिंह, मुख्य कार्यपालक अधिकारी अजय कुमार अवस्थी उपस्थित थे। बैठक की अध्यक्षता न्यास परिषदअध्यक्ष के आचार्य पंडित अशोक द्विवेदी ने की।