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अंतिम संस्कार: अब आसानी से मिल जाएंगी अस्थियां, मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर हुई विशेष व्यवस्था
Thu, 18 Apr 2024 03:10 PM IST
अमन विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Thu, 18 Apr 2024 03:10 PM IST
सार
Varanasi News: इस काम को कराने वाले अधिकारियों ने बताया कि इसके निर्माण होने से काशी में आने वाले शव यात्रियों की सहूलियतें बढ़ जाएंगी। अभी श्मशान घाटों पर कोई भी व्यवस्था नहीं है। इसके निर्माण होने से घाटों की सुंदरता और बढ़ जाएगी।
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मणिकर्णिका घाट।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मोक्ष की नगरी काशी में लावारिश शवों को भी जलाने की विशेष व्यवस्था मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर की जाएगी। एक साल के भीतर तैयार होने वाली योजना के मूर्त रूप लेने के बाद यहां अत्याधुनिक तरीके से सम्मान के साथ शवों को जलाने की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। अंतिम संस्कार के बाद प्लेटफॉर्म से अस्थियां आसानी से मिल जाएंगी।
मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर एक सप्ताह के भीतर निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। अभी मलबा हटाने का काम जारी है। जल्द ही पाइलिंग की जाएगी। अत्याधुनिक मशीनें नावों की मदद से लाई जा रही हैं। मणिकर्णिका घाट के विकास कार्य में 18 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
भूतल का कुल क्षेत्रफल 29.350 वर्ग फीट है। दाह संस्कार का क्षेत्रफल 12,250 वर्गफीट तय है। प्रथम तल 20,200 वर्गफीट रखा गया है। दाह संस्कार का क्षेत्रफल 9100 वर्गफीट होगा।
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इसी प्रकार हरिश्चंद्र घाट के विकास पर 16.86 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह क्षेत्र 13,250 वर्ग फीट में होगा। इसमें दाह संस्कार का क्षेत्र 6200 वर्गफीट निर्धारित किया गया है। इस घाट पर पंजीकरण के अलावा सामुदायिक वेटिंग क्षेत्र, सामुदायिक शौचालय, रैंप आदि का निर्माण होगा।
हाई फ्लड लेवल को ध्यान में रखकर यहां कार्य कराया जा रहा है। चारों तरफ से कवर दाह संस्कार क्षेत्र में पांच बर्थ, सर्विस एरिया, अपशिष्ट संग्रह की व्यवस्था होगी। भूतल पर पंजीकरण कक्ष, नीचे के खुले में दाह संस्कार के 19 बर्थ, लकड़ी भंडारण क्षेत्र, सामुदायिक प्रतीक्षा कक्ष, दो सामुदायिक शौचालय, अपशिष्ट ट्रालियां का स्थापन, मुंडन क्षेत्र होंगे।
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मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर एक सप्ताह के भीतर निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। अभी मलबा हटाने का काम जारी है। जल्द ही पाइलिंग की जाएगी। अत्याधुनिक मशीनें नावों की मदद से लाई जा रही हैं। मणिकर्णिका घाट के विकास कार्य में 18 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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भूतल का कुल क्षेत्रफल 29.350 वर्ग फीट है। दाह संस्कार का क्षेत्रफल 12,250 वर्गफीट तय है। प्रथम तल 20,200 वर्गफीट रखा गया है। दाह संस्कार का क्षेत्रफल 9100 वर्गफीट होगा।
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इसी प्रकार हरिश्चंद्र घाट के विकास पर 16.86 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह क्षेत्र 13,250 वर्ग फीट में होगा। इसमें दाह संस्कार का क्षेत्र 6200 वर्गफीट निर्धारित किया गया है। इस घाट पर पंजीकरण के अलावा सामुदायिक वेटिंग क्षेत्र, सामुदायिक शौचालय, रैंप आदि का निर्माण होगा।
हाई फ्लड लेवल को ध्यान में रखकर यहां कार्य कराया जा रहा है। चारों तरफ से कवर दाह संस्कार क्षेत्र में पांच बर्थ, सर्विस एरिया, अपशिष्ट संग्रह की व्यवस्था होगी। भूतल पर पंजीकरण कक्ष, नीचे के खुले में दाह संस्कार के 19 बर्थ, लकड़ी भंडारण क्षेत्र, सामुदायिक प्रतीक्षा कक्ष, दो सामुदायिक शौचालय, अपशिष्ट ट्रालियां का स्थापन, मुंडन क्षेत्र होंगे।