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संकट मोचन संगीत समारोहः जब गूंजीं खुसरो की बंदिशें, लोगों पर चढ़ा सूफियाना रंग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 07 Apr 2018 09:00 PM IST
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कव्वाली पेश करते निजामी ब्रदर्स
- फोटो : अमर उजाला
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संकट मोचन संगीत समारोह की तीसरी निशा में महाबली का दरबार अमीर खुसरो की बंदिशों से गूंज उठा। संकटमोचन के संगीत महाकुंभ में सूफियाना गीतों ने अपना रंग सभी पर चढ़ा दिया।
छाप तिलक से हनुमानजी की आराधना शुरू हुई और फिर कव्वाली की कई भावांजलियों ने श्रोताओं में उत्साह भर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत में राम वंदना करते हुए कलाकार निजामी ब्रदर्स ने कहा कि राम सिर्फ आपके नहीं हमारे भी हैं और राम हमारे हैं इसका प्रमाण है कि आज हम हनुमान के दरबार में आपके सामने हैं।
समूचा परिसर हर हर महादेव के घोष से गूंज उठा। अगली कड़ी में निजामी ब्रदर्स ने पंडित ओंकारनाथ ठाकुर के प्रिय भजन मन लागा मोरा यार फकीरी में पेश किया तो हर कोई झूम उठा।
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उनकी कव्वालियों का सिलसिला सूफियाना अंदाज में जारी रहा। अपनी मंडली के साथ बैठे दोनों भाइयों ने गायन का समापन ढाई सौ वर्ष पुरानी बंदिश तेरे बिना मुझे चैन नहीं ब्रज के नंदलाल... से किया।
श्रोताओं के उत्साह को देखकर निजामी बंधुओं ने कहा कि हमें पता होता कि यहां इतने अच्छे श्रोता हैं तो हम लोग दस साल पहले ही यहां आ गए होते। इसका हम लोगों को हमेशा अफसोस रहेगा।
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छाप तिलक से हनुमानजी की आराधना शुरू हुई और फिर कव्वाली की कई भावांजलियों ने श्रोताओं में उत्साह भर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत में राम वंदना करते हुए कलाकार निजामी ब्रदर्स ने कहा कि राम सिर्फ आपके नहीं हमारे भी हैं और राम हमारे हैं इसका प्रमाण है कि आज हम हनुमान के दरबार में आपके सामने हैं।
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समूचा परिसर हर हर महादेव के घोष से गूंज उठा। अगली कड़ी में निजामी ब्रदर्स ने पंडित ओंकारनाथ ठाकुर के प्रिय भजन मन लागा मोरा यार फकीरी में पेश किया तो हर कोई झूम उठा।
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उनकी कव्वालियों का सिलसिला सूफियाना अंदाज में जारी रहा। अपनी मंडली के साथ बैठे दोनों भाइयों ने गायन का समापन ढाई सौ वर्ष पुरानी बंदिश तेरे बिना मुझे चैन नहीं ब्रज के नंदलाल... से किया।
श्रोताओं के उत्साह को देखकर निजामी बंधुओं ने कहा कि हमें पता होता कि यहां इतने अच्छे श्रोता हैं तो हम लोग दस साल पहले ही यहां आ गए होते। इसका हम लोगों को हमेशा अफसोस रहेगा।
विशिष्ट अंदाज से दर्शक हुए रूबरू
संकट मोचन संगीत समारोह
- फोटो : अमर उजाला
समारोह की तीसरी निशा में अगली प्रस्तुति लेकर नवनीता चौधरी मंचासीन हुईं। उन्होंने राग अभोगी कांन्हड़ा में दो बंदिशें प्रस्तुत कीं। गायकी के दौरान उन्होंने अपने घराने के विशिष्ट अंदाज से दर्शकों को रूबरू कराया। उनके साथ तबले पर रजनीश तिवारी, हारमोनियम पर जमुना बल्लभ गुजराती ने संगत की।
इसी क्रम में छठवीं प्रस्तुति जयपुर घराने के प्रख्यात सारंगी वादक उस्ताद मोइनुद्दीन खान ने की। उन्होंने राग बागेश्वरी में वादन का आरंभ किया। प्रस्तुतियों के इस क्रम को शुभ्रा गुहा ने अपने गायन से और आगे बढ़ाया। उन्होंने राग भटियारी में आरंभ किया।
उनके साथ हारमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्र और तबले पर पंडित समर शाह ने संगत की। तीसरी निशा की अंतिम प्रस्तुति प्रख्यात सरोद वादक पंडित नरेंद्र धर कासरोद वादन रही।
पंडित राधिका मोहन मोइत्रा एवं अमजद अली खान साहब के शिष्य नरेंद्र धर ने प्रात: कालीन रागों से संकट मोचन की अर्चना की। उनके साथ तबले पर कोलकाता के अनिन्दो चक्रवर्ती ने संगत की।
इसी क्रम में छठवीं प्रस्तुति जयपुर घराने के प्रख्यात सारंगी वादक उस्ताद मोइनुद्दीन खान ने की। उन्होंने राग बागेश्वरी में वादन का आरंभ किया। प्रस्तुतियों के इस क्रम को शुभ्रा गुहा ने अपने गायन से और आगे बढ़ाया। उन्होंने राग भटियारी में आरंभ किया।
उनके साथ हारमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्र और तबले पर पंडित समर शाह ने संगत की। तीसरी निशा की अंतिम प्रस्तुति प्रख्यात सरोद वादक पंडित नरेंद्र धर कासरोद वादन रही।
पंडित राधिका मोहन मोइत्रा एवं अमजद अली खान साहब के शिष्य नरेंद्र धर ने प्रात: कालीन रागों से संकट मोचन की अर्चना की। उनके साथ तबले पर कोलकाता के अनिन्दो चक्रवर्ती ने संगत की।