फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Nine minors found cowering general coach pointing three young men people who taking away for work

यूपी: जनरल कोच में सहमे मिले नौ नाबालिग, तीन युवकों की ओर इशारा कर बताया; यही लोग हमें काम कराने ले जा रहे थे

Fri, 02 Oct 2026 05:56 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Fri, 02 Oct 2026 05:56 AM IST
सार

कामाख्या-गांधीधाम एक्सप्रेस के जनरल कोच में सहमे मिले नौ नाबालिगों को पुलिस ने बरामद किया। पूछताछ में बच्चों ने बताया कि असम और बिहार से उन्हें 1500 से 3000 रुपये देकर मजदूरी कराने गुजरात ले जाया जा रहा था। बच्चों के इशारे पर पुलिस ने तीन युवकों को गिरफ्तार किया। मामले में बाल श्रम और तस्करी की जांच जारी है।

विज्ञापन
Nine minors found cowering general coach pointing three young men people who taking away for work
तीनों तस्कर गिरफ्तार। - फोटो : संवाद

विस्तार

रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में बच्चों की तस्करी रोकने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन आहट के तहत रेलवे सुरक्षा बल को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता मिली। आरपीएफ वाराणसी, अयोध्या कैंट, सीआईबी वाराणसी और एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन की टीम ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर कामाख्या से गांधीधाम जा रही 15668 कामाख्या-गांधीधाम एक्सप्रेस की जांच शुरू की। 

विज्ञापन


टीम गार्ड साइड के जनरल कोच में पहुंची तो वहां नौ बच्चे डरे-सहमे बैठे मिले। आरपीएफ ने पूछताछ शुरू हुई तो सामने आया कि वे असम और बिहार के अलग-अलग इलाकों से ट्रेन में सवार हुए थे और उन्हें बाल श्रम के लिए गुजरात और लखनऊ ले जाया जा रहा था। बच्चों ने साथ मौजूद तीन युवकों की पहचान उन लोगों के रूप में की जो उन्हें काम कराने के लिए लेकर जा रहे थे। इसके बाद आरपीएफ, सीआईबी और सहयोगी संस्था की टीम ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया।

विज्ञापन

जीआरपी कर रही पड़ताल

आरपीएफ कैंट इंस्पेक्टर संदीप यादव ने बताया कि बच्चों से बातचीत की। उसी दौरान पता चला कि तीन बच्चे कोकराझार से गांधीधाम, तीन गोलपाड़ा से गांधीधाम और तीन कटिहार से लखनऊ ले जाए जा रहे थे। बच्चों ने बताया कि उन्हें काम के लिए ले जाया जा रहा था। इंस्पेक्टर ने बताया कि पकड़े गए तस्करों की पहचान आमीन पुत्र मोहम्मद इस्माइल, निवासी अररिया, बिहार, मोहम्मद मुक्तादूर अली पुत्र हकीमुद्दीन, निवासी कोकराझार, असम और फोरिजुल शेख पुत्र कबास अली, निवासी बोंगाईगांव, असम के रूप में हुई। 

तीनों की उम्र करीब 20 वर्ष बताई गई है। बच्चों की पहचान 13 से 16 वर्ष के बीच के नाबालिगों के रूप में हुई। बताया कि टीम इस गिरोह के पीछे कई दिनों से लगी थी। बृहस्पतिवार को मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से टीम ने अलग-अलग बोगी तलाशना शुरू की तो यह सभी एक जनरल बोगी में बैठे मिले।

एएचटीयू थाना वाराणसी की उप निरीक्षक निकिता सिंह टीम के साथ आरपीएफ पोस्ट पहुंचीं। मामले में तीनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या 3/26, धारा 143(5) बीएनएस के तहत कार्रवाई की गई है। बच्चों को आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित बाल संरक्षण प्रक्रिया के तहत रखा गया है।

विज्ञापन

असम और बिहार के रहने वाले हैं बच्चे
रेस्क्यू किए गए बच्चों में असम के उदालगुड़ी का एक 13 वर्षीय, 15 वर्षीय और 16 वर्षीय शामिल हैं। बिहार के अररिया जिले का 13 वर्षीय, 15 वर्षीय और 15 वर्षीय भी इनमें शामिल हैं। इसके अलावा असम के बोंगाईगांव जिले का एक 15 वर्षीय, 15 वर्षीय और 16 वर्षीय शामिल है।

विज्ञापन

परिजनों को एडवांस, बच्चों से मजदूरी कराने की तैयारी
बच्चों ने यह भी बताया कि उनमे से कुछ बच्चों के परिवार वालों को परिवारों को पहले ही 1500 से 3000 रुपये तक दिए गए थे। इसके बाद उन्हें दूसरे राज्यों में ले जाया जा रहा था। रेलवे टीम ने बच्चों की जानकारी और परिस्थितियों को बाल श्रम और मानव तस्करी से जोड़कर आगे की विधिक कार्रवाई शुरू की।

तीन राज्यों से होकर गुजरती है ट्रेन
15668 कामाख्या-गांधीधाम एक्सप्रेस लंबी दूरी की ट्रेन है। इसका मार्ग असम से शुरू होकर उत्तर भारत के रास्ते गुजरात तक जाता है। ट्रेन गोलपाड़ा, बोंगाईगांव, कोकराझार और कटिहार जैसे स्टेशनों से होकर गुजरती है।

तीनों तस्करों से पूछताछ, खंगाला जा रहा बाल तस्करी का पूरा नेटवर्क

कामाख्या-गांधीधाम एक्सप्रेस से नौ नाबालिगों को बाल श्रम के लिए ले जाने के मामले में पकड़े गए तीनों आरोपियों से पुलिस ने पूछताछ शुरू कर दी है। कार्रवाई के बाद अब जांच का फोकस इस बात पर है कि बच्चों को दूसरे राज्यों तक पहुंचाने वाला नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें तीनों की भूमिका कितने समय से थी।

पुलिस तीनों से यह जानने की कोशिश कर रही है कि वे कब से बच्चों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम कर रहे थे। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि बच्चों के परिवारों से संपर्क कौन करता था, परिवारों को अग्रिम रकम देने की व्यवस्था किसकी थी और बच्चों को काम पर भेजने के लिए उन्हें कौन तैयार करता था। 

पूछताछ का एक अहम हिस्सा अब तक दूसरे बच्चों को भेजे जाने से जुड़ा है। पुलिस यह जानकारी जुटा रही है कि आरोपियों ने इससे पहले कितने नाबालिगों को दूसरे राज्यों में भेजा है। उन्हें किन शहरों या इलाकों में पहुंचाया गया और वहां बच्चों से किस तरह का काम कराया जाता था, इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है। मामले में पकड़े गए युवकों को बच्चों ने मुंशी के रूप में पहचानने की बात कही है। ऐसे में पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन तीनों के ऊपर कौन लोग हैं और बच्चों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने के बाद उनकी जिम्मेदारी किसकी होती थी।

परिवारों से संपर्क और रकम के लेनदेन की भी जांच
पूछताछ में बच्चों ने परिवारों को 1500 से 3000 रुपये तक अग्रिम दिए जाने की जानकारी दी है। अब पुलिस इस रकम के लेनदेन और परिवारों से संपर्क की कड़ियों को भी खंगाल रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि रकम किसने दी और बच्चों को काम के लिए भेजने की पूरी व्यवस्था कौन संभाल रहा था। परिजनों से भी संपर्क किया गया है। इसकी भी जांच की जा रही है कि क्या क्षेत्र में संबंधित थानों में इनकी गुमशुदुगी दर्ज है कि नहीं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed