Nikay Chunav Result: वाराणसी में सपा-कांग्रेस मिलकर भी नहीं पा सके BJP जितने वोट, विपक्ष की योजना पर फिरा पानी
UP Nikay Chunav Result: राज्य निर्वाचन आयोग ने जो चुनाव परिणाम घोषित किए हैं, उसके मुताबिक, वाराणसी नगर निगम चुनाव में भाजपा की आंधी चली है। भाजपा के गढ़ में विपक्ष का सूपड़ा साफ हो गया। कांग्रेस, बसपा और आम आदमी पार्टी के मेयर पद के प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई।
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वाराणसी में मेयर के चुनाव में जितने मत भाजपा को मिले हैं, उतने सपा और कांग्रेस प्रत्याशी मिलकर भी नहीं प्राप्त कर सके। कांग्रेस के वोट बैंक में भी गिरावट आई है। निगम के पिछले चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी ने जहां एक लाख से ज्यादा मत प्राप्त किए थे, वहीं इस बार एक लाख के करीब भी नहीं पहुंच सके। सपा के पक्ष में मतदान जरूर बढ़ा है, लेकिन यह जीत दिलाने में नाकाम साबित रहा।
पिछली बार की अपेक्षा इस बार भाजपा प्रत्याशी अशोक तिवारी के जीत का अंतर बढ़ा है। रिकॉर्ड मतों के अंतर से जीत मिली है। मेयर पद के प्रत्याशी अशोक तिवारी ने 1,33,137 वोटों के रिकॉर्ड अंतर से सपा के ओपी सिंह को चुनाव में हराया। इससे पहले मेयर पद के किसी प्रत्याशी ने इतने बड़े अंतर से चुनाव नहीं जीता है।
नगर निगम के इतिहास में पहली बार शहर में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी है। पार्षद पद के 63 प्रत्याशी चुनाव जीतकर मिनी सदन पहुंचे हैं। इस बार विपक्ष ने भाजपा किला ध्वस्त करने की व्यूह रचना बनाई थी, लेकिन कामयाबी नहीं मिल सकी।
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पीएम मोदी को घेरने की योजना धरी रह गई
विपक्षी नेताओं का कहना था कि काशी में जीत के जरिये पीएम मोदी को घेरा जा सकेगा। आगामी लोकसभा चुनाव से पहले उनके विकास मॉडल पर सवाल उठाए जा सकेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। विपक्ष की सारी योजना फेल हो गई। जनता ने काशी के विकास मॉडल को पसंद किया और भाजपा प्रत्याशी को रिकॉर्ड मतों के अंतर से चुनाव जीता दिया।
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एक तीर से दो निशाने की योजना भी फेल
पीएम के संसदीय क्षेत्र में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का खूब आना होता है। पिछले छह वर्षों के दौरान मुख्यमंत्री 100 से ज्यादा बार वाराणसी आ चुके हैं। वह भी वाराणसी के विकास मॉडल को अपनाने की वकालत करते थे। विपक्ष की मंशा थी कि एक तीर से दो निशाने किए जाएं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मुख्यमंत्री ने चुनावी सभाएं भी की थीं और शहर की जनता से आशीर्वाद मांगा था। कहा था कि केंद्र व राज्य में भाजपा की सरकार है। अब जरूरत ट्रिपल इंजन की सरकार बनाने पर है। यह अपील जनता को पसंद आया और मेयर की सीट भाजपा की झोली में डाल दी।
बसपा को नहीं मिले काडर वोट
वाराणसी नगर निगम में 16 लाख से ज्यादा मतदाता हैं। इनमें से साढ़े छह लाख से ज्यादा मतदाताओं ने वोट डाले हैं। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मतदाताओं की भी संख्या अच्छी है, फिर भी बसपा प्रत्याशी सुभाष चंद्र माझी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। ऐसा लगा कि पार्टी प्रत्याशी को काडर वोट नहीं मिल पाए हैं। मुस्लिमों ने भी बसपा प्रत्याशी को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। ज्यादातर राजनीतिक दलों ने सवर्ण प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे थे, इसलिए बसपा ने ओबीसी का दांव चला था। हालांकि, यह दांव नहीं चल सका। पार्टी प्रत्याशी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। पार्षद पद का एक भी प्रत्याशी चुनाव नहीं जीता है।
आम आदमी पार्टी की प्रत्याशी की जमानत जब्त
आम आदमी पार्टी की प्रत्याशी शारदा टंडन को करारी शिकस्त मिली है। पार्टी ने प्रत्याशी बनाया और मुद्दों को गिनाकर जनता से समर्थन मांगा, लेकिन जनता ने नकार दिया। पार्टी प्रत्याशी की जमानत तक जब्त हो गई। अंतिम राउंड की मतगणना तक शारदा टंडन को 8077 मत ही मिल पाए थे। एक भी पार्षद पद का प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सका है।
वाराणसी में अब तक हुए भाजपा के मेयर
- 1995- सरोज सिंह
- 2000- अमरनाथ यादव
- 2006-कौशलेंद्र सिंह पटेल
- 2012- रामगोपाल मोहले
- 2017- मृदुला जायसवाल