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राम की नगरिया नीक लागे ले डगरिया
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 15 Sep 2016 02:27 AM IST
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चलत दशानन डोलति धरनी....। राम नगर की विख्यात रामलीला की शुरुआत 15 सितंबर को लंकाधिपति दशानन के जन्म से होगी। रावण के जन्म लेने के साथ ही पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ जाएगा। रावण चलेगा तो धरती कांप जाएगी। रामनगर किला से लेकर लीला के मैदान तक की छटा कुछ घंटों बाद ही बदल जाएगी। लीला प्रेमी साफा, बाना सजा-संवार चुके हैं।ज्यादातर ऐसे लीला प्रेमी इस लीला हर दिन के लिहाज से साफा और धोती पहनेंगे।
संग गो तनुधारी भूमि विचारी परम विकल भय शोका...। रावण के अत्याचार से देवी-देवताओं की चिंता बढ़ जाएगी।
गो माता के वेश में पृथ्वी देवी-देवताओं के साथ गुरुवार की लीला में भगवान विष्णु के पास गुहार लगाने पहुंचेंगी। रामबाग पोखरे में क्षीर सागर की झांकी सजेगी। वहां भगवान विष्णु शेष शैय्या पर आराम करते नजर आएंगे। विष्णु के दरबार में पृथ्वी की गुहार के बाद भगवान रघुकुल में राम के रूप में अवतार लेने का भरोसा दिलाएंगे। ताकि रावण और उसके कुल के राक्षसों के भार से पृथ्वी को मुक्त कराया जा सके।
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रामनगर की रामलीला में पुतलों की कारीगरी तहजीब की अनूठी मिसाल बन गई है। दशानन, कुंभकरण, मेघनाद के भीमकाय पुतले हों या फिर जनक की फुलवारी से लेकर अशोक वाटिका तक की शोभा बढ़ाने वाले स्वर्ण मृग, हंस, चूहे और गिद्धराज जटायु। इस पुतलों को बड़ी तल्लीनता से रचते हैं मछरहट्टा मुसलिम परिवार के कारीगर। मुसलमानों से इस लीला के जुड़ाव की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। दरअसल जब यह लीला शुरू हुई थी, तब उस दौर के कारीगर रहे इब्राहिम खां ने इसकी शुरुआत की थी। अब उनकी पांचवीं पीढ़ी लीला के पुतलों के निर्माण में समर्पित है। फिलहाल पुतलों को बनाने का काम राजू खां के निर्देशन में हो रहा है। वह कहते हैं कि पूरा परिवार सिर्फ लीला के प्रति समर्पित रहता है। मछरहट्टा मुहल्ले के इब्राहिम खां ने कभी राम लीला के लिए पुतलों को बनाने की शुरुआत की थी। अब इस परिवार की पांचवीं पीढ़ी पुतलों के निर्माण में रमी हुई है। राजू खां के नेतृत्व में 25 से अधिक कारीगर हंस, मोर, गाय, चूहा के अलावा शेषनाग और पहाड़ का निर्माण कागज और बांस के पोरों से कर रहे हैं। गुड्डू, सरफराज, जमील, लालू, कलीम, बाबा, गोलू, बच्चा, बाबू पुतलों को बनाने में जुटे हैं।
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