NGT ने NMCG को फटकारा: पूछा- क्या आप डाकघर की तरह काम करते हैं, नदियों की धारा और अतिक्रमण का मामला
Varanasi News: 23 नवंबर 2021 को एनजीटी ने असि-वरुणा नदी को पूर्णतया अतिक्रमण मुक्त करने एवं दोनों नदियों के पुनरुद्धार का आदेश दिया था। उक्त आदेश का अनुपालन न होने पर सौरभ तिवारी ने वर्ष 2024 में निष्पादन याचिका दायर की थी।
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विस्तार
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान एनएमसीजी (राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन) को फटकार लगाई। एनजीटी ने पूछा कि नदियों की धारा और बाढ़ क्षेत्र के मैदानी क्षेत्रों पर अतिक्रमण पर एनएमसीजी मूकदर्शक क्यों बनी हुई है। एनजीटी ने मौखिक रूप से तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या एनएमसीजी डाकघर की तरह काम करती है?
गुरुवार को सुनवाई के दौरान चेयरपर्सन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव एवं विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल ने एनएमसीजी के रवैये पर नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि हर मामले में आपके द्वारा न्यायालय में यह तर्क दिया जाता है कि राज्य ने जवाब नहीं दिया है और राज्य को पत्र लिखा गया है।
एनजीटी ने पूछा कि आपके पास गंगा (पुनरुद्धार, संरक्षण एवं प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016 जैसा कानून है, आपने जवाब नहीं देने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की? एनजीटी ने यह भी पूछा कि आपके जिलों के जिलाधिकारी क्या करते हैं जब नदियों के तल में अतिक्रमण किया जाता है।
पूछे सवाल
अतिक्रमण की पहली नींव रखने के समय आपके जिलाधिकारी कार्रवाई क्यों नहीं करते अथवा आपको सूचित क्यों नहीं करते? एनजीटी ने एनएमसीजी के उपस्थित वरीय पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आप जो नदी नालों को टैप कर देते हैं, क्या यह स्थायी समाधान है?
इस पर उपस्थित एनएमसीजी के पदाधिकारियों ने कहा कि हम स्थायी समाधान करेंगे। एनजीटी ने समय निर्धारित करने के लिए कहा। मामले में अगली सुनवाई के लिए 5 फरवरी की तिथि निर्धारित की गई है। सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा अभियान के कार्यकारी निदेशक (तकनीकी) एवं अन्य वरीय पदाधिकारी भौतिक रूप से कोर्ट में मौजूद थे।
जताई गई नाराजगी
एनजीटी ने 11 नवंबर को सुनवाई के दौरान एनएमसीजी के नदियों में सीवेज प्रबंधन के तरीकों को लेकर नाराजगी प्रकट की थी। एनएमसीजी के निदेशक (तकनीकी) को वर्चुअल माध्यम से उपस्थित होने का आदेश दिया गया था। गुरुवार को सुनवाई के दौरान एनएमसीजी के वरीय पदाधिकारी कोर्ट के समक्ष भौतिक रूप से उपस्थित हुए। याचिकाकर्ता सौरभ तिवारी वर्चुअल रूप से सुनवाई में उपस्थित रहे।
बाढ़ के मैदानी क्षेत्र के निर्धारण के लिए हो चुका है समझौता
जिलाधिकारी ने 12 अगस्त को अपने शपथपत्र में स्पष्ट किया कि जैसे ही असि एवं वरुणा नदी के बाढ़ के मैदानी क्षेत्र का निर्धारण होगा, उसके बाद एनजीटी के आदेशानुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी। गंगा की सहायक असि और वरुणा नदी के अतिक्रमण व बाढ़ के मैदानी क्षेत्र के निर्धारण का जिम्मा भारतीय सर्वेक्षण विभाग एवं राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की के बीच समझौता हो चुका है और अप्रैल 2026 तक कार्य पूर्ण किया जाना है।