मनमानी...: काशी में नाविकों ने 200 की जगह वसूले 1000 रुपये, ई-रिक्शा वालों ने भी सवारियों को खूब ठगा
काशी में साल के अंतिम दिन पर्यटकों को ई-रिक्शा, नाविक और ठेले वालों ने जमकर चूना लगाया। नाविकों ने 200 की जगह 1000 रुपये वसूले तो ई-रिक्शा वालों ने गोदौलिया चौराहे से कालभैरव मंदिर तक प्रति सवारी 100 रुपये लिए।
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काशी में साल के अंतिम दिन में बाबा काशी विश्वनाथ के दर्शन के लिए श्रद्वालुओं की संख्या बढ़ी तो यहां के नाव, ई-रिक्शा, ठेला वालों ने ठगी का अवसर खोज लिया। श्रद्वालुओं से आम दिनों की अपेक्षा कई गुना वसूली की। नाविकों ने 200 की जगह 1000 रुपये वसूले। खास बात यह है कि इसकी कोई निगरानी नहीं हो रही थी।
बैठकों में सिर्फ दावे होते रहे कि नाव वाले रेट बोर्ड लगाएंगे, हर चीज का रेट तय होगा। ई-रिक्शा वाले किराए की सूची चस्पा करेंगे ताकि ठगी न हो लेकिन ऐसा कहीं नहीं हुआ। यह हाल जब नववर्ष पर है तो आगे महाकुंभ के पलट प्रवाह पर क्या हाल होगा।
इसका अंदाजा लगाना ही मुश्किल है। यहां तक कि कालभैरव मंदिर में बाबा के दर्शन कराने के नाम पर भी भक्तों के साथ ठगी की गई। वहीं आम दिनों में बाबा विश्वनाथ मंदिर के बाहर फूल की जो डलिया 100-150 में बिकती हैं, वह मंगलवार को 250-300 रुपये तक रही।
गिरजाघर से गोदौलिया, कालभैरव
गोदौलिया चौराहे से कालभैरव मंदिर तक आम दिनों ई-रिक्शा एक सवारी का 30 से 40 रुपये प्रति सवारी लेते हैं। मंगलवार को प्रति सवारी 100 रुपये तक ले रहे थे। कई ई-रिक्शा सिंगल सवारी बिठा ही नहीं रहे थे, पूरा बुक करने को ही कह रहे थे। मुंबई से दर्शन करने आए राघवेंद्र ने बताया कि वह पहली बार आए, उन्हें रास्तों का अंदाजा नहीं था। ई-रिक्शा वाले ने बताया कि गोदौलिया से कालभैरव मंदिर चार किमी है। जाम है तो घूम कर जाना होगा और उनके परिवार के पांच सदस्यों से 500 रुपये लिए। इसी तरह बेनिया पार्क की तरफ होटलों में जो श्रद्वालु ठहरे थे। उनसे भी वसूली की गई। गिरजाघर से बेनिया पार्क तक आम दिनों में ई-रिक्शा 10 रुपये प्रति सवारी लेते हैं, लेकिन सोमवार को 50 रुपये तक वसूले गए। बाबा विश्वनाथ मंदिर के सामने ही प्रसाद की दुकानों पर एक पूजा की डलिया आम दिनों में आराम से 150 रुपये तक में मिल जाती है। इसमें बेलपत्र, जल, फूल और प्रसाद रहता है। यही डलिया सोमवार को 250 से 300 में बेची गई।