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नया कानून: महिलाओं-बच्चों से संबंधित अपराधों में सजा और सख्त, महिला पुलिस अफसरों की बढ़ी जिम्मेदारी

Sun, 30 Jun 2024 01:55 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Sun, 30 Jun 2024 01:55 PM IST
सार

पहली जुलाई से तीन नए आपराधिक कानून लागू होने जा रहे हैं। इसके तहत अब महिलाओं-बच्चों से संबंधित अपराधों में सजा और सख्त हुई है। वहीं नए कानून को देखते हुए महिला पुलिस अफसरों की जिम्मेदारी भी बढ़ी है। 

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New law Punishment for crimes against women and children become stringent
पहली जुलाई से लागू होंगे नए कानून। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एक जुलाई से लागू हो रहे नए आपराधिक कानून के तहत महिलाओं और किशोर-किशोरियों से संबंधित अपराधों में सजा में सख्ती की गई है। अब दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों की जांच की जिम्मेदारी महिला इंस्पेक्टर या सब इंस्पेक्टर को सौंपी जाएगी। पॉक्सो एक्ट के तहत नाबालिग बालक-बालिकाओं से संबंधित अपराध की जांच की जिम्मेदारी भी महिला पुलिस अफसर को ही सौंपी जाएगी।

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सिविल कोर्ट के अधिवक्ता वरुण प्रताप सिंह प्रिंस ने बताया कि महिलाओं और बच्चों से संबंधित अपराध अब भारतीय न्याय संहिता में धारा 63 से 97 तक हैं। दुष्कर्म में अधिकतम उम्रकैद और न्यूनतम 10 वर्ष की कैद का प्रावधान है। दुष्कर्म पीड़िता की उम्र यदि 16 वर्ष से कम होगी तो कम से कम 20 वर्ष की कठोर कैद या उम्रकैद और जुर्माना से दोषी को दंडित किया जाएगा।
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दुष्कर्म पीड़िता की उम्र यदि 12 वर्ष से कम होगी तो न्यूनतम 20 वर्ष की कैद, आजीवन कारावास या मृत्युदंड और जुर्माना से दोषी दंडित किया जाएगा। इसी तरह से सामूहिक दुष्कर्म की पीड़िता यदि वयस्क होगी तो दोषी की सजा की अवधि 20 वर्ष से कम नहीं होगी। साथ ही, उम्रकैद का भी प्रावधान है। पीड़िता की उम्र यदि 18 वर्ष से कम होगी तो दोषी को उम्रकैद या मृत्युदंड और जुर्माने से दंडित किया जाएगा।

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शादी का झांसा देकर दुष्कर्म अब संज्ञेय अपराध

अधिवक्ता वरुण प्रताप सिंह प्रिंस ने कहा कि नए कानून में शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का अपराध अब संज्ञेय अपराध की श्रेणी में कर दिया गया है। इसलिए पुलिस अब बगैर वारंट के ही आरोपी को गिरफ्तार कर सकेगी। हालांकि सजा का प्रावधान पहले की ही भांति 10 वर्ष तक और जुर्माने का है।

60 वर्ष से ज्यादा उम्र तो गिरफ्तारी के लिए डीप्टी एसपी से अनुमति जरूरी

अधिवक्ता वरुण ने बताया कि नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद किसी अपराध में बालक को शामिल कराने वाले को तीन से 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। छोटी आपराधिक घटनाएं जिनमें तीन वर्ष से कम की कैद का प्रावधान है, उनका आरोपी यदि 60 वर्ष से अधिक उम्र का है या गंभीर रूप से बीमार है तो उसकी गिरफ्तारी के लिए डिप्टी एसपी या उससे सीनियर अफसर की अनुमति लेनी होगी। एक से अधिक बार चोरी करने वाले को पांच वर्ष तक की कैद का प्रावधान किया गया है।

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