BHU: विकसित भारत 2047...आज के तकनीकी दक्ष युवा ही दिखाएंगे हुनर, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में हुई चर्चा
IIT BHU: आईआईटी बीएचयू जैसे संस्थान युवाओं को गहन प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य नवाचार और सतत ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में आगे लेकर जा रहे हैं, जो विकसित भारत की मजबूत नींव हैं।
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Varanasi News: बीएचयू में शुक्रवार को विकसित भारत @2047 : शिक्षा, संस्कृति और नवाचार की थीम पर हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में आए मेहमानों ने कहा कि तकनीकी दक्ष युवा ही 2047 तक भारत को विकसित बनाएंगे। लेकिन, आज की तरक्की से कई देशों को ईर्ष्या हो रही है।
पत्रकारिता विभाग की ओर से वैदिक विज्ञान केंद्र में आयोजित इस कार्यक्रम में शुक्रवार को मुख्य वक्ता राज्य आयुष मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र ने कहा कि आज भारत का सम्मान दुनिया की नजरों में बढ़ा है। भारत आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है, चाहे रक्षा हो या शिक्षा का क्षेत्र, भारत हर दिशा में आगे बढ़ रहा है। लेकिन विकसित होते भारत को देख कई देशों को ईर्ष्या हो रही है।
आईआईटी-बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि 2047 का भारत वही होगा जिसे आज के युवा अपने विचारों, तकनीकी दक्षता और अनुसंधान-प्रधान सोच से गढ़ेंगे। भारत के शिक्षण संस्थानों को प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना होगा।
2047 के लिए मीडिया साक्षरता भी उतनी ही जरूरी
आईआईएमसी दिल्ली में पत्रकारिता विभाग के हेड प्रो. राकेश उपाध्याय ने कहा कि कोई समाज तब तक नहीं बढ़ सकता जब तक उनको सूचनाएं प्रभावी रूप से न मिले। भारत 2047 के लिए मीडिया साक्षरता उतनी ही आवश्यक है जितनी तकनीकी साक्षरता।
बीएचयू के रेक्टर प्रो. संजय कुमार ने कहा कि महामना ने शिक्षित मनुष्य बनाने की कल्पना की थी। हम विकसित भारत का सपना देख रहे उसके लिए हमें अभी से काम करना होगा ताकि वो 2047 तक पूरा हो जाए। तेजपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शंभूनाथ सिंह ने पूर्वोत्तर भारत के दृष्टिकोण से विकसित भारत 2047 की बात की।
महिला आधारित पुस्तक का हुआ लोकार्पण
इस दौरान एक निजी स्कूल की छात्रा अनन्या चौबे ने अपनी मां प्रोमिता चौबे की पुस्तक लिंग, भविष्य, स्त्री शक्ति, परिवर्तन एवं 21वीं सदी की संभावनाएं का लोकार्पण अतिथियों की उपस्थिति में कराया। कार्यक्रम में 100 से ज्यादा शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी और शोधार्थी आदि मौजूद रहे।
संयोजक डॉ. ज्ञानप्रकाश मिश्रा ने कहा कि यह सम्मेलन विकसित भारत की तैयारियों को शिक्षा, संस्कृति और नवाचार की समानांतर धाराओं से जोड़ने का एक ऐतिहासिक प्रयास है। इस दौरान पत्रकारिता विभाग से डॉ. बाला लखेंद्र, डॉ. नेहा पांडेय, राजनीति विज्ञान विभाग से डॉ. मालवीय आदि मौजूद रहे।
स्थानीय जरूरतों और वैश्विक अवसरों को जोड़ना होगा
कला संकाय की डीन प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने कहा कि शिक्षा केवल जीविका का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को संस्कारित, संवेदनशील और उत्तरदायी बनाने की प्रक्रिया है। हिमाचल प्रदेश सरकार के शिक्षा सलाहकार प्रो. शशिकांत शर्मा ने अपने प्रदेश में शिक्षा सुधारों के उदाहरण देकर बताया कि स्थानीय जरूरतों और वैश्विक अवसरों को जोड़कर शिक्षा प्रणाली को और सशक्त किया जा सकता है। पत्रकारिता विभाग की अध्यक्ष प्रो. शोभना नार्लिकर ने कहा कि पत्रकारिता केवल समाचार-संकलन का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र के विचारों, संवेदनाओं और दिशा का निर्माण करने वाला आधार-स्तंभ है।