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भगवान विष्णु को प्रसन्न करने वाला है वैशाख मास, प्यासे मनुष्यों को जलदान से प्रसन्न होते हैं त्रिदेव
Wed, 28 Apr 2021 04:56 PM IST
गीतार्जुन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Wed, 28 Apr 2021 04:56 PM IST
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भगवान विष्णु (प्रतीकात्मक तस्वीर)
न माधवसमो मासो न कृतेन युगं समं, न च वेदसमं शास्त्रं न तीर्थं गंगया समं। अर्थात वैशाख के समान कोई मास नहीं है। सतयुग के समान कोई युग नहीं है, वेद के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगा जी के समान कोई तीर्थ नहीं है। 28 अप्रैल से वैशाख मास आरंभ हो गया है जो 26 मई तक रहेगा। पुराणों के अनुसार वैशाख मास को ब्रह्मा ने सभी महीनों से उत्तम सिद्ध किया है। यह मास माता के समान सभी जीवों को सदा अभीष्ट प्रदान करने वाला है। संपूर्ण देवताओं द्वारा पूजित है। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने वाला उसके समान दूसरा कोई मास नहींं है।
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वाराणसी के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र का कहना है कि जो वैशाख मेंं सूर्योदय से पहले स्नान करता है, उससे भगवान विष्णु निरंतर प्रीति करते हैं। व्यक्ति यदि प्रात:काल जल से स्नान करता है तो उसके पाप नष्ट हो जाते हैं। मनुष्य वैशाख मास में केवल जल दान करके अभीष्ट पुण्य की प्राप्ति कर सकता है। जो जल दान करने में असमर्थ है वह दूसरों को इसका महत्व समझाए। जो मनुष्य वैशाख मास में मार्ग पर यात्रियों के लिए प्याऊ लगाता है, वह विष्णु लोक में प्रतिष्ठित होता है। जिसने प्याऊ लगवाकर थके मनुष्यों को संतुष्ट करता है उससे त्रिदेव संतुष्ट होते हैं।
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भगवान विष्णु (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Social media
वैशाख मास मेंं यह करना चाहिए
वैशाख मास में प्याऊ की स्थापना, भगवान शिव के ऊपर जलधारा की स्थापना, जूता-चप्पल, छाता दान, चिकना वस्त्र दान, चंदन दान, शीतल जल का पूर्ण पात्र दान करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति होती है।
वैशाख मास में प्याऊ की स्थापना, भगवान शिव के ऊपर जलधारा की स्थापना, जूता-चप्पल, छाता दान, चिकना वस्त्र दान, चंदन दान, शीतल जल का पूर्ण पात्र दान करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति होती है।