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लैंगिकता और यौन स्वतंत्रता पर नजरिया बदलना जरूरी

Mon, 20 Jan 2020 04:31 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Mon, 20 Jan 2020 04:31 PM IST
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Need to change attitudes on sexuality and sexual freedom
कार्यक्रम के दौरान बातचीत करते वक्ता - फोटो : amar ujala

घुमंतू फिल्म फेस्टिवल में भाषाई सीमाओं को लांघते हुए फिल्मों ने यह बताया कि दर्द की कोई भाषा नहीं होती। काशी विद्यापीठ के समाज कार्य विभाग और मावा की ओर से आयोजित दो दिवसीय फिल्म महोत्सव कई सवाल छोड़ गया।

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समाज में यौन विविधता, लैंगिकता, पितृ सत्तात्मक समाज और घरेलू हिंसा से जुड़ी फिल्मों से छात्र-छात्राओं ने खुद को जोड़ा। रविवार को गांधी अध्ययन पीठ के सभागार में छात्र उत्सुकता और सवालों के जवाब के साथ रवाना हुआ।
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मावा के सह संस्थापक हरीश सदानी ने कहा कि लैंगिकता और यौन स्वतंत्रा पर अभी समाज का नजरिया बदलना जरूरी है। फिल्म मेकर मीनाक्षी सहारन ने कहा कि सेक्स मात्र बच्चे को जन्म देने तक सीमित नहीं है। डॉ. निमिषा गुप्ता ने कहा कि घर से बाहर निकलने वाली महिला के चरित्र पर आज भी सवाल उठते हैं।
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Need to change attitudes on sexuality and sexual freedom
ध्यान से सुनते छात्र-छात्राएं - फोटो : amar ujala

समारोह की शुरुआत श्रेचेता दास की बंगाली डॉक्यूमेंट्री पोषणिनी- द वुमेन सेल्समैन से हुई। फिल्म में नायिका गौरी को ट्रेन में सामान बेचने के दौरान समस्याओं और कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। पितृसत्तात्मक समाज में स्त्री का आगे बढ़ना कितनी चुनौतियां पेश करता है। बावजूद इसके गौरी अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती है।

असमिया फिल्म बुलबुल कैन सिंग ने किशोरावस्था के यौन बदलावों को पेश किया। रिमा दास द्वारा निर्देशित फिल्म यौन जीवन के प्रति समाज के नजरिए को उजागर करती है। रोहन परशुराम कानवडे द्वारा निर्मित 22 मिनट की मराठी फिल्म यू उशाचा ने गे, लेस्बियन, बाईसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर के प्रति जागरूक किया।
 

बांग्लादेशी छात्रा रूमाना मंजूर के जीवन संघर्ष पर आधारित जेना शर्मा द्वारा निर्देशित अनटाइंग द नॉट का प्रदर्शन पहली बार काशी में किया गया। फिल्म में वैवाहिक जीवन, घरेलू हिंसा और औरत के संघर्ष को प्रस्तुत किया गया। विमर्श के दौरान सोनी, सुरभि, श्रेया, सपना, हिमांशु, रंगोली, प्रकाश ने प्रश्न किए। प्रो संजय, हरीश सदानी, रश्मि लाम्बा, अल्तमश खान, मीनाक्षी सहारन, डॉ. शैला परवीन ने उनके जवाब दिए। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अनिल कुमार चौधरी तथा संचालन डॉ. निमिषा गुप्ता ने किया।

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