Navratri 2023: काशी का कण-कण शक्ति की आराधना में लीन , नवरात्र के पहले दिन पांच पंडालों में पधारीं मां दुर्गा
रविवार को ब्रह्म मुहूर्त के साथ ही वाराणसी में शारदीय नवरात्र के अनुष्ठान आरंभ हो गए। पहले दिन पांच पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं विराजमान हुईं और पूजन के बाद प्रतिमाओं के पट भी खुल गए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
शारदीय नवरात्र की प्रतिपदा के साथ ही काशी का कण-कण शक्ति की आराधना में लीन हो गया। घरों से लेकर पंडालों तक नवरात्र की रंगत बिखरी तो सप्तशती के ओजस मंत्रों से माता का आह्वान किया गया। पहले दिन पांच पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं विराजमान हुईं और पूजन के बाद प्रतिमाओं के पट भी खुल गए।
रविवार को ब्रह्म मुहूर्त के साथ ही शारदीय नवरात्र के अनुष्ठान आरंभ हो गए। घरों में गृहस्थों ने जहां कलश स्थापना के साथ ही देवी दुर्गा का आह्वान किया और पुजारियों ने सप्तशती के ओजस मंत्रों से माता की आराधना आरंभ की। शश, बुधादित्य के साथ ही पांच योगों में शारदीय नवरात्र की शुरूआत हुई। नवापुरा, दारानगर, सुड़िया, गायघाट और टाउनहॉल के पंडाल में पहले ही दिन प्रतिमाएं स्थापित हो गईं। कलश स्थापना के साथ ही नौ दिवसीय अनुष्ठान भी आरंभ हो गया। शाम को सांस्कृतिक आयोजन भी संपन्न हुए।
टाउनहॉल में 8 साल बाद विराजमान हुईं मां की प्रतिमा
टाउनहॉल की दुर्गा पूजा में आठ साल के बाद माता की प्रतिमा स्थापित हुई है। अन्याय प्रतिकार यात्रा के बाद से टाउनहॉल में चांदी की प्रतिमा स्थापित की जा रही थी।
केंद्रीय पूजा समिति के अध्यक्ष तिलक राज मिश्र ने बताया कि अन्याय प्रतिकार यात्रा से जुड़े मुकदमे वापस होने के बाद पूजा समिति ने प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया और 48 घंटे में प्रतिमा को स्थापित करने की तैयारियां भी हो गईं। टाउनहॉल की दुर्गा पूजा इमरजेंसी के दौर की गवाह भी रही है। इमरजेंसी के दौरान संघ के लोगों के लिए मिलने का यह सुरक्षित केंद्र हुआ करती थी और यहीं पर रणनीति तय होती थी।