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युवा सीख: बेटे की पढ़ाई के लिए मां ने आखिरी गहना भी बेच दिया था, अब बच्चों को दे रहे मुफ्त शिक्षा

Sun, 12 Jan 2020 12:46 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 12 Jan 2020 12:46 PM IST
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National youth day 2020 bhu student raja pathak teach free Preparation of NET and JRF
राजा पाठक। - फोटो : अमर उजाला।

जिस तरह प्यार और खुशियां बांटने से बढ़ती हैं, उसी प्रकार शिक्षा एक ऐसा अनमोल रत्न है, जिसे जितना बांटोगे उतना बढ़ेगा। इसी सोच के साथ लोग अब आगे आने लगे हैं और देश में अमीर-गरीब की खाई पाटने में लगे हैं। समाज में खुशियां बांटने के लिए शिद्दत से काम कर रहे हैं। हम बात कर रहे हैं बीएचयू संस्कृति विद्या धर्म विज्ञान संस्थान के शोध छात्र राजा पाठक की। 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। इसीलिए हम आपको एक ऐसे युवा के बारे में बताएंगे, जिन्होंने 800 छात्रों का नेट और जेआरएफ क्वालीफाई कराया है।

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बिहार के कैमूर के रहने वाले राजा ने गरीबी के दिन देखे, ठोकरें खाईं, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। नतीजा, आज वो युवाओं के लिए मिसाल बन चुके हैं। वो छह साल से एक पीढ़ी तैयार करने में जुटे हैं, जो आने वाले समय में देश को योग्य शिक्षक दे सकेगी।
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महज ढाई साल की उम्र में सर से पिता का साया उठ जाने बाद मां कलावती देवी ने चारो बच्चों की पढ़ाई और अन्य जिम्मेदारियां उठाईं। 2003 में केवल 12 साल की उम्र में राजा को दुर्गाकुंड के संस्कृत विद्यालय भेज दिया गया, क्योंकि वहां खाना मुफ्त मिलता था। घर से साल में एक हजार रुपये आते थे। राजा बताते हैं कि कक्षा पांच से 12वीं तक जब भी घर से पैसे आते, वो समझ जाते कि घर का कोई सामान बिक गया।
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इंटर के बाद बीएचयू संस्कृत विद्या धर्म संस्थान में दाखिला हुआ। लेकिन साल 2013 में कॉलेज की फीस देने के लिए राजा के पास पैसे नहीं थे, पैसे की व्यवस्था न होने पर आखिरी में उन्होंने मां को फोन किया। बेटे की फीस देने के लिए मां ने पति की दी हुई आखिरी निशानी भी बेच दी। 2014-15 में बीएचयू में टॉप करने के पहले 2013 में उन्होंने जेआरएफ भी क्वालीफाई कर लिया था।

संघर्षों से लड़कर राजा अब न सिर्फ अपना कॅरियर बना रहे हैं, बल्कि दूसरों का भविष्य भी संवार रहे हैं। राजा कहते हैं कि नेट जेआरएफ की तैयारी में उन्हें कोई मदद नहीं मिली। इसलिए अपने जैसे छात्रों की मदद को खुद आगे आए। बीएचयू परिसर स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर के पास पेड़ के नीचे 2014 में 12 बच्चों के साथ नेट और जेआरएफ की मुफ्त कोचिंग देना शुरू किया।

छह सालों में अब तक वह 800 छात्रों को नेट जेआरएफ क्वालीफाई करने में मदद कर चुके हैं। उनकी नि:शुल्क कोचिंग के लिए 18 राज्यों से 4000 छात्र आवेदन करते हैं। वर्तमान में राजा ग्रह गणना के लिए प्रोग्राम और सॉफ्टवेयर के विकास विषय पर शोध कर रहे हैं। इसी क्रम में डैड फैलोशिप के तहत जर्मनी में शोध के लिए बुलाया गया था।

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