राष्ट्रीय बालिका दिवसः काशी में रंग लाने लगी बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ मुहिम, लिंगानुपात में लगातार सुधार
स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध संस्थागत प्रसव के आंकड़ों के अनुसार वाराणसी जिले मं वर्ष 2015-16 में एक हजार बेटों के मुकाबले 936 बेटियों का जन्म हुआ। तो वहीं वर्ष 2020 में 1000 बेटों पर 951 बेटियों ने जन्म लिया।
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बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की मुहिम अब काशी में रंग लाने लगी है। जागरूकता के चलते महिला-पुरुष लिंगानुपात में लगातार सुधार हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध संस्थागत प्रसव के आंकड़े इस सुधार को प्रमाणिक करने के लिए काफी हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध संस्थागत प्रसव के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015-16 में एक हजार पुरुष बच्चों के सापेक्ष 936 बच्चियों का जन्म हुआ। तो वहीं वर्ष 2020 में 1000 बेटों पर 951 बेटियों ने जन्म लिया।
बेटियों के लिए जरूरी इन योजनाओं के बारे में भी जानें
- सुकन्या समृद्धि योजना:
बाल संरक्षण अधिकारी निरुपमा सिंह बताती हैं कि इस योजना में बेटी के नाम पर 15 साल की उम्र तक अधिकतम 1.50 लाख रुपये सालाना निवेश कर सकते हैं। बेटी के 18 या 21 के होने पर आप पैसा निकाल सकेंगे। इस रकम को आप उसकी पढ़ाई या शादी पर खर्च कर सकते हैं।
इस योजना के तहत किसी भी पोस्ट ऑफिस या बैंक की अधिकृत शाखाओं में खाता खुलवाया जा सकता है। आमतौर पर जो बैंक पीपीएफ खाता खोलने की सुविधा भी देते हैं, वहां सुकन्या समृद्धि योजना का खाता भी खोला जाता है।
कन्या सुमंगला योजना
कन्या सुमंगला योजना की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की थी। इसमें हर जिले के करीब 500 बालिकाओं को इसका लाभ मिलेगा। इसके साथ ही हर परिवार से अधिकतम दो बेटियों को इस योजना का लाभ मिल सकता है। बेटी के जन्म लेने से उसके स्नातक करने तक छह चरणों में कुल 15 हजार रुपये की रकम दी जाएगी।
ये सुविधाएं भी देती है सरकार
- महिलाओं की सुरक्षा और उन्हें किसी भी विषम परिस्थिति में मदद के लिए 181 महिला हेल्पलाइन व रेस्क्यू वैन की सेवा भी दी जा रही है।
- महिला की मदद के लिए ही वन स्टाप सेंटर काम करते हैं।
राष्ट्रीय बालिका दिवस का इतिहास
राष्ट्रीय बालिका दिवस बेटियों के विकास के लिए मनाया जाता है। देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 24 जनवरी को कार्यभार संभाला था। इसके बाद इस दिन को राष्ट्रीय बालिका दिवस घोषित किया गया था।