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बनारसः नरउर में ग्रामीणों को उम्मीद, पीएम इतना दे जाएंगे कि झोली में न समाएगा
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Mon, 17 Sep 2018 10:11 AM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- फोटो : file photo
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को बनारस के नरउर के प्राथमिक विद्यालय में बच्चों के साथ जन्मदिन मनाने आ रहे हैं। गांव की टूटी कच्ची सड़क रातोंरात पक्की हो रही है। स्कूल के फर्श पर सेरामिक टाइल बिछ गई हैं। टूटी खिड़कियां संवर रही हैं। रंगाई-पुताई हो रही है। करीब हजार कर्मचारी गांव के एक हिस्से के कायाकल्प में जुटे हैं।
सरकारी काम भी इतनी तेजी से होता है, ग्रामीण यह देखकर रोमांचित हैं। हर हृदय आनंदित है। उनकी भाषा भी मुहावरेदार हो गई है। उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री बिना मांगे ही गांव को इतना दे जाएंगे कि झोली में नहीं समाएगा। विद्यालय में पांचवी का विद्यार्थी राहुल इस बात से खुश है कि स्कूल में केक कटेगा। वह छूटते ही कहता है- मोदी आएंगे और जन्मदिन मनाएंगे।
विद्यालय से ही लगते बाबा बाणासुर मंदिर के प्रांगण में बैठे कुछ बुजुर्ग हर काम को निहार रहे हैं। प्रधानमंत्री से आपकी क्या उम्मीदे हैं? इस सवाल के जवाब में छेदी सिंह कहते हैं- हमारे बड़े भाग्य हैं कि मोदी आ रहे हैं। गांव में बहुत काम हो रहे हैं। इतना देकर जाएंगे कि संभलेगा नहीं।
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विद्यालय के कमरों और पुस्तकालयों में बच्चों के बनाए पोस्टर लगे हैं। ये बच्चों के सामाजिक बोध और राजनीतिक चेतना का प्रतीक हैं। एक पोस्टर पर लिखा है ‘से नो टू चाइनीज प्रोडक्ट’। कक्षा पांच के समर ने चतुर चूहा और बुद्धू बंदर बनाया है तो आर्यन ने छुई मुई की कथा उकेरी है। चौथी क्लास के शुभम कुमार ने अकेली मछली का हाल बताया है।
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सरकारी काम भी इतनी तेजी से होता है, ग्रामीण यह देखकर रोमांचित हैं। हर हृदय आनंदित है। उनकी भाषा भी मुहावरेदार हो गई है। उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री बिना मांगे ही गांव को इतना दे जाएंगे कि झोली में नहीं समाएगा। विद्यालय में पांचवी का विद्यार्थी राहुल इस बात से खुश है कि स्कूल में केक कटेगा। वह छूटते ही कहता है- मोदी आएंगे और जन्मदिन मनाएंगे।
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विद्यालय से ही लगते बाबा बाणासुर मंदिर के प्रांगण में बैठे कुछ बुजुर्ग हर काम को निहार रहे हैं। प्रधानमंत्री से आपकी क्या उम्मीदे हैं? इस सवाल के जवाब में छेदी सिंह कहते हैं- हमारे बड़े भाग्य हैं कि मोदी आ रहे हैं। गांव में बहुत काम हो रहे हैं। इतना देकर जाएंगे कि संभलेगा नहीं।
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विद्यालय के कमरों और पुस्तकालयों में बच्चों के बनाए पोस्टर लगे हैं। ये बच्चों के सामाजिक बोध और राजनीतिक चेतना का प्रतीक हैं। एक पोस्टर पर लिखा है ‘से नो टू चाइनीज प्रोडक्ट’। कक्षा पांच के समर ने चतुर चूहा और बुद्धू बंदर बनाया है तो आर्यन ने छुई मुई की कथा उकेरी है। चौथी क्लास के शुभम कुमार ने अकेली मछली का हाल बताया है।
सबसे बड़ी चिंता
स्वागत की हो रही तैयारी
- फोटो : amar ujala
करीब एक बजे डीएम तैयारियां का निरीक्षण करने पहुंचे। स्कूल के पुस्तकालय में अन्य अधिकारियों के बीच बड़ा सवाल यही था कि शौचालय तैयार हो गए हैं। जवाब मिला- काम चल रहा है। हर हाल में कल तक तैयार हो जाएंगे।
मच्छरों के लिए दवा छिड़कवाने और फोगिंग कराने के भी निर्देश दिए गए। स्कूल के पीछे ही कुंड है, जिसमें काई लगा पानी जमा है। आस पास धान के खेत भी हैं। जीटी रोड से गांव के स्कूल तक आने वाले मार्ग को रोड़ी बजरी डाल कर बनाया जा रहा है। सड़क के किनारे घरों की ईंट की दीवारों की पुताई कर स्लोगन लिखे जा रहे हैं। रास्ते में आने वाले निजी शौचालयों को भी पीले रंग से पोता जा रहा है।
पुताई के काम में लगे राकेश राजभर को एक अधिकारी टोकता है- सुनो यह पीला पीला ही पोत रहे हो, कुछ गुलाबी रंग करो। चित्र भी बनाओ। पिछली बार तुमने ही काशी में पेंटिंग बनाई थी। न में जवाब मिलने पर चिंतित होते हैं मगर पेंटर आश्वस्त करता है कि ठीक वैसा ही चित्र बना दूंगा।
मच्छरों के लिए दवा छिड़कवाने और फोगिंग कराने के भी निर्देश दिए गए। स्कूल के पीछे ही कुंड है, जिसमें काई लगा पानी जमा है। आस पास धान के खेत भी हैं। जीटी रोड से गांव के स्कूल तक आने वाले मार्ग को रोड़ी बजरी डाल कर बनाया जा रहा है। सड़क के किनारे घरों की ईंट की दीवारों की पुताई कर स्लोगन लिखे जा रहे हैं। रास्ते में आने वाले निजी शौचालयों को भी पीले रंग से पोता जा रहा है।
पुताई के काम में लगे राकेश राजभर को एक अधिकारी टोकता है- सुनो यह पीला पीला ही पोत रहे हो, कुछ गुलाबी रंग करो। चित्र भी बनाओ। पिछली बार तुमने ही काशी में पेंटिंग बनाई थी। न में जवाब मिलने पर चिंतित होते हैं मगर पेंटर आश्वस्त करता है कि ठीक वैसा ही चित्र बना दूंगा।