{"_id":"5a5665644f1c1b17198b45ff","slug":"muslin-girl-learn-yoga-in-varanasi","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"विदेशी मुस्लिम बालाएं सीख रहीं कुंडलिनी शक्ति जागृत करने की कला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विदेशी मुस्लिम बालाएं सीख रहीं कुंडलिनी शक्ति जागृत करने की कला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 11 Jan 2018 12:41 AM IST
विज्ञापन
कुंडलिनी शक्ति को जागृत करने का प्रशिक्षण लेती मुस्लिम महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिंद् और मुस्लिम संप्रदायों को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच काशी में सात संमदर पार से आयी मुस्लिम बालाएं योग सीख रही हैं। तुम राम कहो, वो रहीम कहें दोनों की गरज अल्लाह से है। तुम दीन कहो वो धर्म कहें, मंशा तो उसी की राह से है...। काशी की इसी सांस्कृतिक दरियादिली पर हर धर्म और देश के लोग फिदा हैं। इस कड़ी में कुंडलिनी शक्ति जागृत करने की कला विदेशी मुस्लिम बालाएं सीख रही हैं।
धर्म, मजहब के परे मानसिक परेशानियों, व्याधियों से पार पाने और शांति की तलाश में सात समंदर पार से आईं ये बालाएं यहां मंत्र दीक्षा के साथ ही कुंडलिनी शक्ति जागृत करने का प्रशिक्षण ले रही हैं।
वाग्योग चेतना पीठम् संस्थान में आचार्य वागीश शास्त्री के निर्देशन में दस दिवसीय उनका प्रशिक्षण चल रहा है। भारतीय संस्कृति, धर्म और तंत्र की शिक्षा लेने के उद्देश्य से विदेशी पर्यटक काशी का रुख करते हैं। इसी उद्देश्य से मोरक्को से योग प्रशिक्षक ओमानिया, फ्रांस की नसरीन और अजरबैजान की इल्हामा, ये तीन मुस्लिम बालाएं काशी पहुंची हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
धर्म, मजहब के परे मानसिक परेशानियों, व्याधियों से पार पाने और शांति की तलाश में सात समंदर पार से आईं ये बालाएं यहां मंत्र दीक्षा के साथ ही कुंडलिनी शक्ति जागृत करने का प्रशिक्षण ले रही हैं।
विज्ञापन
वाग्योग चेतना पीठम् संस्थान में आचार्य वागीश शास्त्री के निर्देशन में दस दिवसीय उनका प्रशिक्षण चल रहा है। भारतीय संस्कृति, धर्म और तंत्र की शिक्षा लेने के उद्देश्य से विदेशी पर्यटक काशी का रुख करते हैं। इसी उद्देश्य से मोरक्को से योग प्रशिक्षक ओमानिया, फ्रांस की नसरीन और अजरबैजान की इल्हामा, ये तीन मुस्लिम बालाएं काशी पहुंची हैं।
विज्ञापन
शांति की तलाश का उपाय कुंडलिनी शक्ति में
सात समंदर पार से आई बालाएं
- फोटो : अमर उजाला
वाग्योग चेतना पीठम् में कुंडलिनी शक्ति को जागृत करने का प्रशिक्षण शक्तिपात द्वारा ले रही हैं। मोरक्को से आईं ओमानिया कहती हैं कि व्यक्ति के लिए आंतरिक शांति अहम है। फिर वो चाहे किसी के गुरु मंत्र से मिले या किसी की दुआ से।
हमें एक दूसरे के मजहब का सम्मान करना चाहिए और इंसानियत का परिचय देना चाहिए। नसरीन कहती हैं कि कुंडलिनी शक्ति की दीक्षा से एक अलग ही शांति की अनुभूति हो रही है।
इल्हामा का कहना है कि काशी आकर काफी अच्छा लग रहा है। सुना था कि कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है तो मन को शांति मिलती है, बस उसी की तलाश में यहां आ गईं। वागीश शास्त्री बताते हैं कि शांति की तलाश का उपाय कुंडलिनी शक्ति में है। ध्यान और मंत्र के जरिये कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है।
हमें एक दूसरे के मजहब का सम्मान करना चाहिए और इंसानियत का परिचय देना चाहिए। नसरीन कहती हैं कि कुंडलिनी शक्ति की दीक्षा से एक अलग ही शांति की अनुभूति हो रही है।
इल्हामा का कहना है कि काशी आकर काफी अच्छा लग रहा है। सुना था कि कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है तो मन को शांति मिलती है, बस उसी की तलाश में यहां आ गईं। वागीश शास्त्री बताते हैं कि शांति की तलाश का उपाय कुंडलिनी शक्ति में है। ध्यान और मंत्र के जरिये कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है।