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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Music Festival Pt. Sajan mishra adorned Maa Kushmanda with his music worshipped compositions

संगीत समारोह: पं. साजन ने सुरों से मां कूष्मांडा का शृंगार किया, बंदिशों की आराधना; माता दरबार में लगाई हाजिरी

Thu, 21 Aug 2025 05:26 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Thu, 21 Aug 2025 05:26 AM IST
सार

मां कूष्मांडा के शृंगार महोत्सव में कलाकारों के साथ भक्तों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। शहनाई वादक की शुरुआत होते ही लोग मंत्रमुग्ध हो गए। इसके बाद प्रख्यात शास्त्रीय गायक पद्मभूषण पं. साजन मिश्र ने मनोहारी प्रस्तुति दी।

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Music Festival Pt. Sajan mishra adorned Maa Kushmanda with his music worshipped compositions
मां कूष्मांडा के दरबार में सांस्कृतिक प्रस्तुति देते प्रख्यात शास्त्रीय गायक पद्मभूषण पं. साजन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Varanasi News: प्रख्यात शास्त्रीय गायक पद्मभूषण पं. साजन मिश्र के सुरों से बुधवार को सात दिवसीय मां कूष्मांडा के शृंगार महोत्सव एवं संगीत समारोह का आगाज हुआ। कलाकारों ने आदिशक्ति जगतजननी माता की स्वर्णमयी दमकती आभा के बीच सुर, लय, ताल की त्रिवेणी प्रवाहित की। पहले दिन 10 कलाकारों ने हाजिरी लगाई। वहीं, घंटा-घड़ियाल की अनुगूंज होती रही।

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दुर्गाकुंड स्थित मंदिर में मां के शृंगार के बाद संगीत समारोह की शुरुआत शहनाई वादक पं. जवाहरलाल साथियों संगत राग यमन की अवतारणा की। दादरा की बंदिश के बाद माई के सोहर की धुन पेशकर समापन किया। सह शहनाई पर मोहनलाल, तबले पर राजेन्द्र कुमार, दुक्कड़ पर मंगल प्रसाद एवं स्वर पर राजेश कुमार ने संगत की। 
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इसके बाद पं. साजन मिश्र और उनके पुत्र स्वरांश मिश्र के शास्त्रीय गायन से हुआ। उन्होंने के मां के चरण वंदन करते हुए आशीष लिया। फिर सुरों से उनका शृंगार किया। राग जोग कौंस में बंदिशों से मां के साथ कान्हा की भी आराधना की। इस राग में विलंबित मध्यलय बड़ा ख्याल की बंदिश के बोल थे- काहे गुमान करे बावरे..., छोटा ख्याल में- जगत है समझ, सपना कोउ नाही... सुनाया। राग दुर्गा में जय जय दुर्गे माई... से गायन को विराम दिया। 

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तबले पर पं. अभिषेक मिश्रा, सारंगी पर विनायक सहाय एवं हारमोनियम पर सुमित मिश्रा ने संगत की। संगीत समारोह का शुभारंभ हर वर्ष की तरह शहनाई वादन के साथ हुआ। दिल्ली के बांसुरी वादक रितेश प्रसन्ना राग गोरख कल्याण के बाद एक धुन से समापन किया। तबले पर पं. अभिषेक मिश्रा रहे। 

देर रात तक विदुषी कमला शंकर का गिटार, पं. देवाशीष डे, पं. गणेश प्रसाद मिश्र, चारुचंद्र सिंह का गायन, प्रो. राजेश शाह का सितार, सम्यक पाराशरी का बांसुरी और कोलकाता के शुक्ल दत्ता एंड ग्रुप की कथक की प्रस्तुति हुई। संचालन प्रीतेश आचार्य एवं सोनू झा ने किया। इस मौके पर संजय दुबे, विकास दुबे, प्रकाश दुबे आदि उपस्थित रहे।

मां का पंचमेवा की माला से शृंगार, 11 भूदेवों ने वेद पाठ
मां कूष्माण्डा दुर्गा देवी का पट डमरुओं की गड़गड़ाहट के बीच रात को आठ बजे खुला तो चहुंओर मां की जय जयकार से मंदिर परिसर गूंज उठा। मंदिर के महंत राजनाथ दुबे एवं पं. विश्वजीत दुबे ने शृंगार करवाया। मां की स्वर्णमयी प्रतिमा का पंचामृत एवं पंचगव्य स्नान कर कोलकाता के विशेष गुलाब, बेला, कमल पुष्पों से शृगार हुआ। पंचमेवा की माला अर्पित की गई। छप्पन भोग की दिव्य झांकी सजाई गई। मां की विराट आरती उतारी हुई। 

वैदिक आचार्यों ने चारों वेदों के मंगलाचरण के बाद आचार्य श्रीधर पाण्डेय एवं बलभद्र तिवारी के आचार्यत्व में पं. हेमंत त्रिपाठी हंडी महाराज सहित 11 वैदिक भूदेवों ने वेद पाठ किया। आरती पं. किशन दुबे एवं कौशलपति द्विवेदी ने किया। वहीं, कोलकाता के कारीगरों ने मंदिर परिसर को फूल बंगले के स्वरूप प्रदान कर आकर्षक सजावट की थी।

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