कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती आज, उनके गांव लमही में सजा खुशियों का मेला

ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Mon, 31 Jul 2017 12:32 PM IST
जीवन और सामाजिक ताने-बाने को कथाओं में ढालने वाले मुंशी प्रेमचंद की जयंती आज
जीवन और सामाजिक ताने-बाने को कथाओं में ढालने वाले मुंशी प्रेमचंद की जयंती आज - फोटो : अमर उजाला
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कथासम्राट मुंशी प्रेमचंद के गांव लमही में जश्न का माहौल है। प्रेमचंद की जयंती पर सजने वाले मेले में शामिल होने के लिए गांव के लोगों ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं। मुंशी जी की जयंती के लिए सज रहे लमही की रौनक रविवार को देखते ही बनती थी। मुंशी प्रेमचंद न्यास को सजाने के लिए सुबह से ही कारीगर लगे हुए थे।
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रविवार को लमही में प्रवेश करते ही गांव में जश्न सरीखा नजारा था। साफ-सफाई के साथ ही प्रशासनिक अमला भी महोत्सव को मूर्त रूप देने में लगा हुआ था। मुंशी प्रेमचंद न्यास में पंडाल सजा रहे इद्दू ने बताया कि हम लोग सुबह से ही टेंट लगा रहे हैं। सोमवार को यहां बड़ा मेला लगेगा।


थोड़ी देर में किड्स गुरु कुल के बच्चे भी पहुंचे और उन्होंने मुंशी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। सीमांस, कौशल, सत्यम, स्वस्तिक और आलोक ने बताया कि उन्होंने प्रेमचंद की कई कहानियां पढ़ी हैं। आज वे उन कहानियों को रचने वाले मुंशी जी का गांव घूमने आए हैं।

बच्चे एक रुपये में देख सकेंगे प्रेमचंद की कहानियां
लमही स्थित मुंशी प्रेमचंद के पैतृक आवास में रविवार को ऑडियो-विजुअल शो का शुभारंभ कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने किया। यहां एक रुपये के टिकट पर बच्चे प्र्रेमचंद की कहानियों को देख और सुन सकेंगे। इसके उद्घाटन के बाद  

प्रेमचंद सरोवर में चलेगी बोट
प्रेमचंद सरोवर में बोट चलाने की तैयारी की जा रही है। बच्चों को लमही में आने के लिए प्रोत्साहित करने और मनोरंजन की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रेमचंद सरोवर में बोट चलेगी। इसका टिकट चार रुपये रखा जाएगा।

गांव के लोगों की टीस, बाकी दिनों में नहीं दिखती ऐसी रौनक 
गांव के आनंद कुमार पटेल ने कहा कि प्रेमचंद जयंती करीब आते ही प्रशासनिक अमला तो सक्रिय हो जाता है लेकिन साल के बाकी दिनों में महान शब्दकार के गांव में कोई साहित्यिक चहल-पहल नहीं नजर नहीं आती। राजनेताओं को तो लमही और प्रेमचंद की चिंता ही नहीं। अब तक यहां कोई नहीं पहुंचा। 

टीशर्ट और चाय के कप पर भी प्रेमचंद की कहानियां

मुंशी प्रेमचंद की जयंती आज
मुंशी प्रेमचंद की जयंती आज - फोटो : अमर उजाला
कथासम्राट के पैतृक निवास में कमिश्नर ने एक सोवेनियर शॉप का भी उद्घाटन किया। शॉप वीडीए एवं बनारस उत्सव एवं कला प्रकाश उत्सव के सौजन्य से लगाई गई है। इसमें कथासम्राट से जुड़ी कहानियों के चित्रों से सजी टीशर्ट, की-चेन, पोस्टर, कप आदि का स्टाल लगाया गया है।

दुकानदार आनंद कुमार पटेल ने बताया कि इसका विस्तार किया जाएगा। इसके साथ ही बच्चों के लिए प्रेमचंद की स्मृतियों से जुड़ी वस्तुओं की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। 

प्रदर्शनी लगी, बच्चों ने बनाए चित्र
संस्कृति विभाग, जिला प्रशासन एवं बीएचयू के सहयोग से आयोजित लमही महोत्सव में मंडलायुक्त ने क्षेत्रीय अभिलेखागार द्वारा आयोजित अभिलेख प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। कमिश्नर ने चित्र प्रतियोगिता का अवलोकन किया और बच्चों से चित्रों के बारे में जानकारी ली।

प्रतियोगिता में वाराणसी पब्लिक स्कूल, किड्स गुरुकुल स्कूल, ज्ञानदीप इंग्लिश स्कूल, संत अतुलानंद कॉन्वेंट स्कूल, काशी विद्यापीठ, बीएचयू् तथा बीआर फाउंडेशन के कुल 108 बच्चों ने प्रतिभाग किया।   

लमही महोत्सव में आज
शतरंज के खिलाड़ी का प्रदर्शन एवं पैनल डिस्कशन बीएचयू द्वारा
नाट्य प्रस्तुतियां
प्रेम रंग
बूढ़ी काकी
पंच परमेश्वर
कफन
गोदान
मैकू
मंत्र
लोक गायन

प्रेमचंद की कहानी न भूत न भविष्य, सदैव वर्तमान

प्रेमचंद
प्रेमचंद
प्रेमचंद की कहानी न भूत है न भविष्य है वह तो सदैव वर्तमान है। कथासम्राट मुंशी प्रेमचंद ने कहा था कि मेरा जीवन और मेरी रचना सपाट सड़क की तरह नहीं होगी वहां आपको गढ्ढे भी मिलेंगे। वहां आप झील, झरना और झुरमुट देखना चाहेंगे तो आपको निराशा होगी।

ये बातें जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने कहीं। वह रविवार को लमही स्थित मुंशी प्रेमचंद रिसर्च संस्थान के सभागार में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। 

‘मुंशी प्रेमचंद और आज का समय’ विषयक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आप जिस तरह कथा सम्राट की कहानियों को देखेंगे उन्हें उस रूप में पाएंगे। आज भी ईदगाह का हामिद, गोदान का होरी और बूढ़ी काकी भी दिख जाएंगी, नमक का दरोगा दिख जाएगा। डॉ. इंदीवर पांडेय ने कहा कि उनके लेखन में सत्य, अहिंसा और अपरिग्रह का भाव था। 

डॉ. श्रद्धानंद ने कहा कि प्रेमचंद के विचारों में साहित्य मनोरंजन की वस्तु नहीं वरन जीवन प्रगति की गाथा है। डॉ. रामसुधार सिंह, डॉ. सुरेंद्र प्रताप, डॉ. मुक्ता प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ला आदि ने भी प्रेमचंद की लेखनी और उनकी प्रतिबद्धता पर चर्चा की। संचालन डॉ. अत्रि भारद्वाज ने किया। 
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