Varanasi News: लापरवाही का उदाहरण बना नगर निगम, दस महीने में पकड़े मात्र 760 बंदर, स्ट्रीट डॉग का आतंक बढ़ा
एक ओर जहां बंदर और स्ट्रीट डॉग का आतंक बढ़ता नजर आ रहा है वहीं नगर निगम दावों पर कहीं न कहीं फेल है। पिछले दस महीनों में पकड़े गए बंदरों की संख्या सवाल खड़े कर रही है तो वहीं स्ट्रीट डॉग से पीड़ित लोगों की बढ़ी संख्या भी दावों को गलत बता रही है।
विस्तार
छह महीने में पकड़े गए मात्र 760 बंदर
नगर निगम की ओर से बीते दस महीने में मात्र 760 बंदरों को पकड़कर नौगढ़ के जंगलों में छोड़ा गया है। जबकि शहर में इनकी संख्या 25 हजार से अधिक है। बंदरों को पकड़ने की रफ्तार धीमी होने के कारण उत्पात बढ़ता जा रहा है। शिकायत के बाद भी बंदरों से लोगों को निजात नहीं मिल रही है।
बंदरों का आतंक मंदिरों और पक्के महाल के क्षेत्रों में काफी बढ़ गया है। सिगरा, विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध, चौक, लंका, सुंदरपुर, महमूरगंज, औरंगाबाद, सिद्धगिरीबाग आदि क्षेत्रों में बंदरों का उत्पात देखा जा सकता है। इन्हीं उत्पात के चलते कई लोग घायल हो चुके हैं। बंदरों को पकड़ने के लिए नगर निगम के पास आए दिन शिकायत पहुंच रही है।
बावजूद इसके कोई ठोस कार्रवाई न होने से लोग परेशान हैं। बंदरों के उत्पात के चलते लोगों ने छत पर जाना छोड़ दिया है। पार्षद मदन मोहन दूबे ने मेयर अशोक कुमार तिवारी से शिकायत की थी। इसके बाद मेयर ने पशु चिकित्सा विभाग को निर्देश दिया था कि अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ने की कार्रवाई सुनिश्चित करें।
इसमें यदि लापरवाही होगी तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पशु चिकित्सा के अधिकारियों के अनुसार बंदरों को पकड़ने के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। जुलाई 2024 से अप्रैल 2025 तक 760 बंदरों को पकड़े गए हैं।
आवारा कुत्तों पर लगाम लगाने के नगर निगम के दावे फेल, अस्पताल में प्रतिदिन आ रहे 80-100 रैबीज केस
शहर में आवारा कुत्तों पर लगाम लगाने के नगर निगम के दावे पूरी तरह फेल नजर आ रहे हैं। आवारा कुत्ते आए दिन लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं। मंडलीय अस्पताल से मिले आंकड़ों के अनुसार रैबीज इंजेक्शन के 80-100 केसेज प्रतिदिन आ रहे हैं। अप्रैल माह में आवारा कुत्तों ने 2500 लोगों को अपना शिकार बनाया।
बच्चे, नौजवान, बुजुर्ग कोई इनके हमलों से सुरक्षित नहीं है। बावजूद इसके अधिकारी मौन धारण किए हुए हैं। छुट्टा पशुओं को पकड़ने के नगर निगम के दावे केवल कागज पर ही सीमित नजर आ रहे हैं। शहर के मैदागिन, कबीरचौरा, लहुराबीर, गोदौलिया समेत कई ऐसे इलाके हैं, जहां आवारा कुत्तों की भरमार है।
इसके अलावा ग्रामीण से शहरी बने निगम के 10 वार्डों में भी छुट्टा पशु आए दिन लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। छुट्टा पशुओं के कारण आए दिन सड़क दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। सड़क पर चलती गाड़ियों के बीच अचानक से जानवर आ जा रहे है, जिससे लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं। सीएमओ डॉ संदीप चौधरी ने बताया कि जानवरों के काटने पर एआरवी लगाया जा रहा है।
कुत्तों को पकड़ने के बाद बंध्याकरण किया जाता है। इसके बाद उन्हें उसी स्थान पर छोड़ दिया जाता है। बंध्याकरण के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। दो संस्थाएं आई थी लेकिन मानक पूरे नहीं होने के कारण उन्हें बंध्याकरण का टेंडर नहीं दिया गया - डॉ संतोष पाल, पशु चिकित्साधिकारी नगर निगम