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Mukhtar Ansari: पूर्वांचल में वर्चस्व की खूनी जंग का लंबा इतिहास, अफजाल की सियासी हार नहीं पचा पाया था मुख्तार

Sun, 30 Apr 2023 08:40 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 30 Apr 2023 08:40 AM IST
सार

पूर्वांचल में वर्चस्व के लिए खूनी जंग का एक लंबा इतिहास रहा है। कृष्णानंद राय एक ऐसी शख्सियत थे जो गाजीपुर से लेकर पूर्वांचल के अलग अलग जिलों में माफिया मुख्तार अंसारी को खुली टक्कर देते थे।

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Mukhtar Ansari Long history of war of supremacy in Purvanchal Mukhtar could not digest Afzal political defeat
Mukhtar Ansari - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 2002 में अफजाल अंसारी की सियासी हार माफिया मुख्तार अंसारी पचा नहीं पाया था। आरोप था कि भाई की हार से बौखलाकर ही चुनाव जीतने वाले भाजपा विधायक कृष्णानंद राय और उनके लोगों को ठिकाने लगाने का सिलसिला शुरू हुआ। 
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इसी का नतीजा रहा कि फरवरी 2004 से नवंबर 2005 के बीच कृष्णानंद राय और उनके खेमे के 15 लोगों की हत्या हुई थी। ज्यादातर मामलों में मुख्तार अंसारी को नामजद किया गया था। 17 वर्ष से ज्यादा समय से जेल की सलाखों के पीछे कैद माफिया मुख्तार अंसारी और उसके भाई अफजाल अंसारी को गाजीपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के तहत दोषी पाकर सजा सुनाई है। 
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पूर्वांचल के जरायम जगत में तीन दशक से ज्यादा समय से अपनी करतूतों को लेकर सुर्खियों में रहने वाले मुख्तार अंसारी और गाजीपुर के पूर्व विधायक कृष्णानंद राय व उनके करीबी रहे बृजेश सिंह की अदावत जगजाहिर रही है। 
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इसमें 2002 के विधानसभा चुनाव ने आग में घी का काम किया। चुनाव में गाजीपुर के मोहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र से कृष्णानंद राय से मुख्तार अंसारी का बड़ा भाई और पांच बार विधायक रहा अफजाल अंसारी चुनाव हार गया था।

पूर्वांचल में वर्चस्व की लड़ाई
पूर्वांचल में वर्चस्व के लिए खूनी जंग का एक लंबा इतिहास रहा है। कृष्णानंद राय एक ऐसी शख्सियत थे जो गाजीपुर से लेकर पूर्वांचल के अलग अलग जिलों में माफिया मुख्तार अंसारी को खुली टक्कर देते थे। वर्ष 1996 और 1999 में गाजीपुर लोकसभा का चुनाव मनोज सिन्हा ने जीता था। दोनों ही चुनावों में मनोज सिन्हा का कृष्णानंद राय और उनके लोगों ने खुला समर्थन किया था। 

 

कृष्णानंद और मुख्तार की अदावत के बीच नया मोड़ तब आया जब 2002 में अफजाल अंसारी विधानसभा का चुनाव हार गया। गाजीपुर में मनोज सिन्हा के बढ़ते वर्चस्व और कृष्णानंद राय की जीत से मुख्तार अंसारी खेमा बौखला गया। 2004 का लोकसभा चुनाव नजदीक आया तो खूनी जंग एक बार फिर शुरू हुई। फरवरी 2004 में कृष्णानंद राय के खास रहे अक्षय कुमार राय उर्फ टुनटुन पहलवान की गाजीपुर में सरेआम हत्या कर दी गई। 

 

26 अप्रैल 2004 को कृष्णानंद राय के करीबी झिनकू की हत्या कर दी गई। फिर मोहम्मदाबाद रेलवे फाटक के समीप भाजपा कार्यकर्ता शोभनाथ राय की हत्या कर दी गई। 27 अप्रैल 2004 को दिलदारनगर में रामऔतार पर अंधाधुंध फायरिंग कर हत्या कर दी गई। लोकसभा चुनाव के बाद बाराचवर विकास खंड मुख्यालय पर कृष्णानंद राय के करीबी अविनाश सिंह पर अंधाधुंध फायरिंग की गई।

अक्तूबर 2005 में एक मामले में अपनी जमानत रद्द करा कर मुख्तार अंसारी जेल चला गया। इसके लगभग एक माह बाद नवंबर 2005 में कृष्णानंद राय और उनके काफिले में शामिल सात अन्य लोगों पर 400 राउंड से ज्यादा फायरिंग कर मौत के घाट उतार दिया गया था।

गैंगस्टर मामले में माफिया मुख्तार अंसारी और बसपा सांसद अफजाल अंसारी को सजा

आपको बता दें कि गैंगस्टर मामले में पूर्व विधायक माफिया मुख्तार अंसारी और उसके भाई बसपा सांसद अफजाल अंसारी को एमपी/एमएलए कोर्ट के अपर सत्र न्यायाधीश दुर्गेश कुमार ने दोषी करार दिया है। मुख्तार को दस साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। 

 

अफजाल अंसारी को चार साल की सजा हुई है और एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। सजा के एलान के साथ ही अफजाल की लोकसभा की सदस्यता खत्म होने की नौबत आ गई है। लोकसभा सचिवालय से अधिसूचना जारी होते ही संसद की सदस्यता खत्म हो जाएगी। सजा सुनते ही मुख्तार व अफजाल के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं। 

 

बांदा जेल में बंद मुख्तार की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेशी हुई थी, जबकि अफजाल कोर्ट में मौजूद था। उसे गिरफ्तार करजेल भेज दिया गया। गैंगस्टर का मामला 16 वर्ष पुराना है। मुख्तार व अफजाल के गैंग चार्ट में भाजपा विधायक रहे कृष्णानंद राय की हत्या का मामला भी शामिल है। गाजीपुर के मोहम्मदाबाद और करंडा थाने में दर्ज मामलों को लेकर वर्ष 2007 में मुख्तार व अफजाल पर गैंगस्टर एक्ट लगाया गया था। 

 

कोर्ट ने 15 अप्रैल को सुरक्षित रख लिया था फैसला

इसके लिए कृष्णानंद राय की हत्या, वाराणसी के कोयला कारोबारी व विहिप नेता नंद किशोर रुंगटा के अपहरण व हत्या को भी आधार बनाया गया। एमपी/एमएलए कोर्ट ने इस मामले में 15 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था। शनिवार को फैसला सुनाया जाना था, इसलिए अफजाल सुबह ही एमपी/एमएलए कोर्ट पहुंच गया। मुख्तार की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेशी कराई गई। 

 

पहले माफिया मुख्तार को सजा सुनाई गई। 19 पेज के फैसले में गैंगस्टर मामले को गंभीर बताया। अफजाल की सजा का फैसला 115 पेज में लिखा गया है। इसे पढ़कर सुनाने में कोर्ट को समय लगा है। सजा का एलान होते ही अफजाल को न्यायिक अभिरक्षा में ले लिया गया, फिर कोर्ट से ही जेल भेज दिया गया।
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