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Mukhtar Ansari: आठ माह... चार मामलों में सजा, मुख्तार के 26 वर्षों के सियासी सफर का THE END; ढह गया साम्राज्य
Sun, 30 Apr 2023 08:06 AM IST
शाहरुख खान
नीतीश सिंह, अमर उजाला, गाजीपुर
नीतीश सिंह, अमर उजाला, गाजीपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 30 Apr 2023 08:06 AM IST
सार
माफिया मुख्तार अंसारी को 22 सितंबर 2022 से 29 अप्रैल 2023 के बीच चार मामलों में सजा मिल चुकी है। 22 सितंबर 2022 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मुख्तार को सात साल की सुनाई थी। ठीक अगले ही दिन यानी 23 सितंबर को जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की अदालत ने गैंगस्टर के मामले में पांच साल की सजा सुनाई थी।
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बाहुबली मुख्तार अंसारी (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI (File Photo)
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विस्तार
बांदा जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी का राजनीतिक भविष्य लगभग खत्म हो गया है। आठ महीने के दौरान ही उसे चार मामलों में सजा मिल चुकी है। अब माफिया के लिए राजनीतिक सफर को आगे बढ़ा पाना मुश्किल होगा। वह लंबे समय तक मऊ की सदर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहा है।
दूसरी तरफ, माफिया का एक छत्र साम्राज्य भी ढह गया है। सांसद भाई अफजाल अंसारी को भी चार साल की सजा मिल गई है। मऊ सदर से वर्तमान विधायक व माफिया का बेटा अब्बास अंसारी चित्रकूट जेल में बंद है। बहू निखत अंसारी भी जेल में है। पत्नी आफ्शा अंसारी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित हो चुका है। पुलिस के रिकॉर्ड में वह फरार चल रही है।
माफिया मुख्तार अंसारी को 22 सितंबर 2022 से 29 अप्रैल 2023 के बीच चार मामलों में सजा मिल चुकी है। 22 सितंबर 2022 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मुख्तार को सात साल की सुनाई थी। ठीक अगले ही दिन यानी 23 सितंबर को जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की अदालत ने गैंगस्टर के मामले में पांच साल की सजा सुनाई थी।
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इसी तरह 15 दिसंबर 2022 को अवधेश राय की हत्या से जुड़े एक मामले और एडिशनल एसपी पर हमले समेत कुल पांच मामलों में गाजीपुर की एमपी/एमएलए कोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई थी। अब गाजीपुर की एमपी/एमएल कोर्ट ने गैंगस्टर मामले में मुख्तार को 10 साल की सजा सुनाई है। उसके भाई अफजाल अंसारी को भी चार साल की सजा सुनाई गई है।
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दूसरी तरफ, माफिया का एक छत्र साम्राज्य भी ढह गया है। सांसद भाई अफजाल अंसारी को भी चार साल की सजा मिल गई है। मऊ सदर से वर्तमान विधायक व माफिया का बेटा अब्बास अंसारी चित्रकूट जेल में बंद है। बहू निखत अंसारी भी जेल में है। पत्नी आफ्शा अंसारी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित हो चुका है। पुलिस के रिकॉर्ड में वह फरार चल रही है।
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माफिया मुख्तार अंसारी को 22 सितंबर 2022 से 29 अप्रैल 2023 के बीच चार मामलों में सजा मिल चुकी है। 22 सितंबर 2022 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मुख्तार को सात साल की सुनाई थी। ठीक अगले ही दिन यानी 23 सितंबर को जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की अदालत ने गैंगस्टर के मामले में पांच साल की सजा सुनाई थी।
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इसी तरह 15 दिसंबर 2022 को अवधेश राय की हत्या से जुड़े एक मामले और एडिशनल एसपी पर हमले समेत कुल पांच मामलों में गाजीपुर की एमपी/एमएलए कोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई थी। अब गाजीपुर की एमपी/एमएल कोर्ट ने गैंगस्टर मामले में मुख्तार को 10 साल की सजा सुनाई है। उसके भाई अफजाल अंसारी को भी चार साल की सजा सुनाई गई है।
मुख्तार अंसारी का सियासी सफर 26 वर्षों का रहा
मुख्तार अंसारी ने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर वर्ष 1996 में पहली बार मऊ के सदर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीता था। इसके बाद 2002 व 2007 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और जीतकर लखनऊ पहुंच गया। 2012 में कौमी एकता दल का गठन किया और चुनाव लड़कर जीत हासिल की।
मुख्तार अंसारी ने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर वर्ष 1996 में पहली बार मऊ के सदर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीता था। इसके बाद 2002 व 2007 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और जीतकर लखनऊ पहुंच गया। 2012 में कौमी एकता दल का गठन किया और चुनाव लड़कर जीत हासिल की।
2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी से टिकट की मांग की, लेकिन नहीं मिल सका। इसके बाद कौमी एकता दल से ही चुनाव मैदान में उतरा और जीत हासिल की। हालांकि, वर्ष 2022 के चुनाव से मुख्तार ने दूरी बना ली और अपनी राजनीतिक विरासत बेटे अब्बास अंसारी को सौंप दी। अब्बास अंसारी ने पिता की परंपरागत सीट से ही सुभासपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की है।
संकट में अफजाल अंसारी की सियासी पारी
गैंगस्टर मामले में चार साल की सजा मिलने के बाद माफिया के भाई अफजाल अंसारी की सियासी पारी भी संकट में है। अफजाल अंसारी गाजीपुर की मोहम्मदाबाद सीट से छह बार विधायक चुना गया। गाजीपुर से दो बार लोकसभा का चुनाव भी जीता है। 2019 के लोकसभा चुनाव में अफजाल ने भाजपा के कद्दावर नेता मनोज सिन्हा को हराया था।
गैंगस्टर मामले में चार साल की सजा मिलने के बाद माफिया के भाई अफजाल अंसारी की सियासी पारी भी संकट में है। अफजाल अंसारी गाजीपुर की मोहम्मदाबाद सीट से छह बार विधायक चुना गया। गाजीपुर से दो बार लोकसभा का चुनाव भी जीता है। 2019 के लोकसभा चुनाव में अफजाल ने भाजपा के कद्दावर नेता मनोज सिन्हा को हराया था।
अफजाल अंसारी ने वर्ष 1985 भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की है। वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में अफजाल अंसारी को हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि, 2004 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर गाजीपुर से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की। अफजाल ने 2009 और 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन हार का सामना करना पड़ा था।
माफिया मुख्तार के खिलाफ 61 मुकदमे
60 वर्ष के माफिया मुख्तार अंसारी के खिलाफ गाजीपुर, वाराणसी, मऊ और आजमगढ़ के अलग-अलग थानों में 61 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें से आठ मुकदमे ऐसे हैं, जो कि जेल में रहने के दौरान दर्ज हुए थे। ज्यादातर मामले हत्या से संबंधित हैं। सबसे ज्यादा मुकदमे उसके गृह जिले गाजीपुर में दर्ज हैं।
यह भी पढ़ें: कृष्णानंद राय हत्याकांड: आखिर किस वजह से मुख्तार खेमे ने खेला था खूनी खेल, पढ़ें- अदावत की खौफनाक कहानी
60 वर्ष के माफिया मुख्तार अंसारी के खिलाफ गाजीपुर, वाराणसी, मऊ और आजमगढ़ के अलग-अलग थानों में 61 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें से आठ मुकदमे ऐसे हैं, जो कि जेल में रहने के दौरान दर्ज हुए थे। ज्यादातर मामले हत्या से संबंधित हैं। सबसे ज्यादा मुकदमे उसके गृह जिले गाजीपुर में दर्ज हैं।
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नौ मुकदमे मऊ और नौ मुकदमे वाराणसी में दर्ज हैं। राजधानी लखनऊ में भी सात मामले दर्ज हैं। 61वां मुकदमा गाजीपुर के मुहम्मदाबाद कोतवाली क्षेत्र में उसरी चट्टी हत्याकांड को लेकर दर्ज हुआ था। मऊ दंगे के बाद मुख्तार अंसारी ने 25 अक्तूबर 2005 को गाजीपुर कोर्ट में सरेंडर किया था। इसके बाद से जेल में बंद है।