कृष्णानंद राय हत्याकांड: आखिर किस वजह से मुख्तार खेमे ने खेला था खूनी खेल, पढ़ें- अदावत की खौफनाक कहानी
17 वर्ष से ज्यादा समय से जेल की सलाखों के पीछे कैद माफिया मुख्तार अंसारी और उसके भाई अफजाल अंसारी को गाजीपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के तहत दोषी पाकर सजा सुनाई है। मुख्तार अंसारी और गाजीपुर के पूर्व विधायक कृष्णानंद राय व उनके करीबी रहे बृजेश सिंह की अदावत जगजाहिर रही है।
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यूपी गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 2002 में अफजाल अंसारी की सियासी हार माफिया मुख्तार अंसारी पचा नहीं पाया था। आरोप था कि भाई की हार से बौखलाकर ही चुनाव जीतने वाले पूर्व विधायक कृष्णानंद राय और उनके लोगों को ठिकाने लगाने का सिलसिला शुरू हुआ। इसी का नतीजा रहा कि फरवरी 2004 से नवंबर 2005 के बीच कृष्णानंद राय और उनके खेमे के 15 लोगों की हत्या हुई थी। ज्यादातर मामलों में मुख्तार अंसारी को नामजद किया गया था।
17 वर्ष से ज्यादा समय से जेल की सलाखों के पीछे कैद माफिया मुख्तार अंसारी और उसके भाई अफजाल अंसारी को गाजीपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के तहत दोषी पाकर सजा सुनाई है। पूर्वांचल के जरायम जगत में तीन दशक से ज्यादा समय से अपनी करतूतों को लेकर सुर्खियों में रहने वाले मुख्तार अंसारी और पूर्व विधायक कृष्णानंद राय व उनके करीबी रहे बृजेश सिंह की अदावत जगजाहिर रही है।
इसमें 2002 के विधानसभा चुनाव ने आग में घी का काम किया। चुनाव में गाजीपुर के मोहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र से कृष्णानंद राय से मुख्तार अंसारी का बड़ा भाई और पांच बार विधायक रहा अफजाल अंसारी चुनाव हार गया था।
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खूनी जंग का एक लंबा इतिहास
पूर्वांचल में वर्चस्व के लिए खूनी जंग का एक लंबा इतिहास रहा है। वर्ष 1996 और 1999 में गाजीपुर लोकसभा का चुनाव मनोज सिन्हा ने जीता था। दोनों ही चुनावों में मनोज सिन्हा का कृष्णानंद राय और उनके लोगों ने खुला समर्थन किया था। मुख्तार को यह पसंद नहीं आया। इस बीच नया मोड़ तब आया जब 2002 में अफजाल अंसारी विधानसभा का चुनाव हार गया।
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गाजीपुर में मनोज सिन्हा के बढ़ते वर्चस्व और कृष्णानंद राय की जीत से मुख्तार अंसारी खेमा बौखला गया। 2004 का लोकसभा चुनाव नजदीक आया तो खूनी जंग एक बार फिर शुरू हुई। फरवरी 2004 में कृष्णानंद राय के खास रहे अक्षय कुमार राय उर्फ टुनटुन पहलवान की गाजीपुर में सरेआम हत्या कर दी गई। 26 अप्रैल 2004 को कृष्णानंद राय के करीबी झिनकू की हत्या कर दी गई। फिर मोहम्मदाबाद रेलवे फाटक के समीप भाजपा कार्यकर्ता शोभनाथ राय की हत्या कर दी गई।
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27 अप्रैल 2004 को दिलदारनगर में रामऔतार पर अंधाधुंध फायरिंग कर हत्या कर दी गई। लोकसभा चुनाव के बाद बाराचवर विकास खंड मुख्यालय पर कृष्णानंद राय के करीबी अविनाश सिंह पर अंधाधुंध फायरिंग की गई। अक्तूबर 2005 में एक मामले में अपनी जमानत रद्द करा कर मुख्तार अंसारी जेल चला गया। इसके लगभग एक माह बाद नवंबर 2005 में कृष्णानंद राय और उनके काफिले में शामिल सात अन्य लोगों पर 400 राउंड से ज्यादा फायरिंग कर मौत के घाट उतार दिया गया था।
कृष्णानंद राय की हत्या के दौरान जेल में था मुख्तार
गाजीपुर के बसनियां गांव में 29 नवंबर 2005 को एके-47 से अंधाधुंध गोलियां बरसाकर तत्कालीन विधायक कृष्णानंद राय सहित सात लोगों की हत्या की गई थी। उस समय मुख्तार अंसारी गाजीपुर जेल में बंद था। वारदात को अंजाम देने वालों में मुख्तार अंसारी गिरोह के शूटरों में मुख्य रूप से अताउर रहमान उर्फ बाबू उर्फ सिकंदर, संजीव जीवा उर्फ माहेश्वरी, मुन्ना बजरंगी, राकेश पांडेय उर्फ हनुमान पांडेय विश्वास नेपाली और रिंकू तिवारी शामिल थे।
इनमें से मुन्ना बजरंगी, राकेश पांडेय और रिंकू तिवारी मारे जा चुके हैं। वहीं, अताउर रहमान उर्फ बाबू उर्फ सिकंदर अब भी फरार है और उस पर दो लाख का इनाम घोषित है। इसी तरह से विश्वास नेपाली भी फरार है और उस पर 50 हजार का इनाम घोषित है।