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मुगलसराय से पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर तक, 400 साल में चौथी बार बदला शहर का नाम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 08 Aug 2018 10:09 AM IST
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पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन
- फोटो : अमर उजाला
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एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम को पांच अगस्त को आत्मसात करने वाले मुगलसराय ने चौथी बार अपना नाम बदला है। विक्रम गढ़ से ओवेनगंज, मुगलसराय होते हुए चौथी बार पं दीनदयाल उपाध्याय के नाम को अपनाया है। यदि इसके नाम पर गौर करें तो इसका प्रत्येक नाम एक कालखंड की कहानी कहता नजर आता है। इस तरह भाजपा ने चार सौ वर्ष बाद न सिर्फ नगर का नाम बदला है बल्कि नए नाम के साथ एक नए कालखंड का निर्माण किया है।
यदि इसके नाम के इतिहास को देखें तो लिखित रूप में यहां का सबसे पहला नाम ओवेनगंज का पता चलता है। गूगल पर मुगलसराय का इतिहास लिख टाइप करने पर विकिपीडिया में सबसे पहला नाम ओवेनगंज का आता है। मुगल शासन के विस्तार के दौरान इसका नाम मुगलसराय के रूप मेें हुआ। हालांकि बुजुर्ग की चर्चाओं की माने तो ओवेनगंज से भी पहले यहां का नाम विक्रमगढ़ रहा।
काशी प्रांत का गंगा पार का हिस्सा था तो बनारस का हिस्सा लेकिन यहां की बस्ती का नाम विक्रमगढ़ था। वर्ष 1540 में शेर शाह सूरी ने हुमायू को पराजित कर देश के सिंहासन पर कब्जा जमाया। उसने भारत की डाक व्यवस्था को पुन: संगठित किया और अफ़गानिस्तान में काबुल से लेकर बांग्लादेश के चटगांव तक ग्रांड ट्रंक रोड का निर्माण किया।
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इस दौरान विक्रमगढ़ का नाम बदल कर ओवेनगंज कर दिया। वर्ष 1546 में शेर शाह सूरी की हार के बाद अकबर ने अपने साम्राज्य का विस्तार इसी रास्ते से होते हुए किया। मुगलों ने ओवेनगंज को ही अपना सराय बनाया। इस दौरान ओवेनगंज को नया नाम मुगलचक दिया गया लेकिन मुगलों का सराय होने की वजह से इसका नाम मुगलसराय ही रह गया।
मुगलों के पतन और अंग्रेजी शासनकाल में वर्ष 1862 में हावड़ा से दिल्ली के बीच रेलवे लाइन बिछाई गई और 1880 में मुगलसराय रेलवे स्टेशन का निर्माण किया गया। 11 फरवरी 1967 को एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय का शव प्लेटफार्म संख्या एक दो पर मिला।
इसके बाद से स्टेशन का नाम परिवर्तन की मांग चल रही थी। पांच अगस्त को मुगलसराय का नाम हटाकर पं दीनदयाल उपाध्याय जं किया गया। अखिल भारती कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय मंत्री शैलेन्द्र श्रीवास्तव कहते हैं कि वर्तमान परिवर्तन सिर्फ नाम परिवर्तन नहीं बल्कि इतिहास का परिवर्तन है।
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यदि इसके नाम के इतिहास को देखें तो लिखित रूप में यहां का सबसे पहला नाम ओवेनगंज का पता चलता है। गूगल पर मुगलसराय का इतिहास लिख टाइप करने पर विकिपीडिया में सबसे पहला नाम ओवेनगंज का आता है। मुगल शासन के विस्तार के दौरान इसका नाम मुगलसराय के रूप मेें हुआ। हालांकि बुजुर्ग की चर्चाओं की माने तो ओवेनगंज से भी पहले यहां का नाम विक्रमगढ़ रहा।
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काशी प्रांत का गंगा पार का हिस्सा था तो बनारस का हिस्सा लेकिन यहां की बस्ती का नाम विक्रमगढ़ था। वर्ष 1540 में शेर शाह सूरी ने हुमायू को पराजित कर देश के सिंहासन पर कब्जा जमाया। उसने भारत की डाक व्यवस्था को पुन: संगठित किया और अफ़गानिस्तान में काबुल से लेकर बांग्लादेश के चटगांव तक ग्रांड ट्रंक रोड का निर्माण किया।
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इस दौरान विक्रमगढ़ का नाम बदल कर ओवेनगंज कर दिया। वर्ष 1546 में शेर शाह सूरी की हार के बाद अकबर ने अपने साम्राज्य का विस्तार इसी रास्ते से होते हुए किया। मुगलों ने ओवेनगंज को ही अपना सराय बनाया। इस दौरान ओवेनगंज को नया नाम मुगलचक दिया गया लेकिन मुगलों का सराय होने की वजह से इसका नाम मुगलसराय ही रह गया।
मुगलों के पतन और अंग्रेजी शासनकाल में वर्ष 1862 में हावड़ा से दिल्ली के बीच रेलवे लाइन बिछाई गई और 1880 में मुगलसराय रेलवे स्टेशन का निर्माण किया गया। 11 फरवरी 1967 को एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय का शव प्लेटफार्म संख्या एक दो पर मिला।
इसके बाद से स्टेशन का नाम परिवर्तन की मांग चल रही थी। पांच अगस्त को मुगलसराय का नाम हटाकर पं दीनदयाल उपाध्याय जं किया गया। अखिल भारती कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय मंत्री शैलेन्द्र श्रीवास्तव कहते हैं कि वर्तमान परिवर्तन सिर्फ नाम परिवर्तन नहीं बल्कि इतिहास का परिवर्तन है।
मुगलसराय के नाम का खत्म हो गया अस्तित्व
चंदौली जनपद के मुगलसराय की धरती पर इतिहास के कई अंकुर फूटे तो कई दफन हो गए। एकात्मवाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन के नये नाम का लोकार्पण होते ही मुगलसराय के नाम का अस्तित्व खत्म हो गया । इतिहास पर गौर करें तो डॉ महेंद्रनाथ पांडेय चंदौली से पहली बार सांसद बने। उन्होंने पहली बार मुगलसराय जंक्शन का नाम बदलने के लिए 17 जून 2016 को तत्कालीन सपा सरकार में प्रस्ताव दिया था।
जिसे पहली नजर में खारिज कर दिया गया। केंद्र व प्रदेश में पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार का समन्वय मिला। महेंद्रनाथ पांडेय ने इस सरकार में पहली बार प्रस्ताव दिया जिसे पास कर दिया गया। जिसे केंद्र सरकार के विभिन्न संबंधित मंत्रालयों से स्वीकृति मिलती गई।
पांच अगस्त को पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन के नये नाम का लोकार्पण रखा गया है। मुगलसराय के रेलवे के इतिहास में पहली बार भाजपा सरकार के रेलमंत्री आए थे। कार्यक्रम में पहली बार रेलमंत्री, रेल राज्य मंत्री, सूबे के सीएम, सरकार से जुड़े पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष शामिल हुए। पूरे कार्यक्रम का संचालन एक ही स्थान से हो गया। पंडित दीनदयाल जंक्शन से पहली बार गुड्स ट्रेन चली। जिसे महिला चालक व गार्ड लेकर गए।
मुगलसराय मंडल का पहला जंक्शन बना जिसका नाम बदला गया। पहली बार मुगलसराय से एकात्मता एक्सप्रेस रवाना की गई। जनपद में पहली मूर्ति पंडित दीनदयाल की स्थापित की जाएगी जो सबसे बड़ी होगी। रेल इतिहास के पन्नों में 150 वर्षों से ज्यादा समय तक दर्ज मुगलसराय का नाम भाजपा शासन काल में दफन हो गया। मुगलसराय के लिए पांच अगस्त 2018 को याद किया जाता रहेगा जब उसका अस्तित्व समाप्त हो गया।
जिसे पहली नजर में खारिज कर दिया गया। केंद्र व प्रदेश में पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार का समन्वय मिला। महेंद्रनाथ पांडेय ने इस सरकार में पहली बार प्रस्ताव दिया जिसे पास कर दिया गया। जिसे केंद्र सरकार के विभिन्न संबंधित मंत्रालयों से स्वीकृति मिलती गई।
पांच अगस्त को पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन के नये नाम का लोकार्पण रखा गया है। मुगलसराय के रेलवे के इतिहास में पहली बार भाजपा सरकार के रेलमंत्री आए थे। कार्यक्रम में पहली बार रेलमंत्री, रेल राज्य मंत्री, सूबे के सीएम, सरकार से जुड़े पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष शामिल हुए। पूरे कार्यक्रम का संचालन एक ही स्थान से हो गया। पंडित दीनदयाल जंक्शन से पहली बार गुड्स ट्रेन चली। जिसे महिला चालक व गार्ड लेकर गए।
मुगलसराय मंडल का पहला जंक्शन बना जिसका नाम बदला गया। पहली बार मुगलसराय से एकात्मता एक्सप्रेस रवाना की गई। जनपद में पहली मूर्ति पंडित दीनदयाल की स्थापित की जाएगी जो सबसे बड़ी होगी। रेल इतिहास के पन्नों में 150 वर्षों से ज्यादा समय तक दर्ज मुगलसराय का नाम भाजपा शासन काल में दफन हो गया। मुगलसराय के लिए पांच अगस्त 2018 को याद किया जाता रहेगा जब उसका अस्तित्व समाप्त हो गया।
तहसील पर अभी है मुगलसराय की छाप
बाकले मैदान पर रविवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, सीएम तथा केंद्रीय मंत्रियों और सांसद की मौजूदगी में पांच अगस्त को मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन कर दिया गया। इसके पूर्व नगर पालिका का नाम भी परिवर्तित हो चुका है।
मगर अभी तक विधानसभा क्षेत्र और तहसील पर मुगलसराय की छाप बरकरार है। मुगलसराय विधायक साधना सिंह का कहना है कि विधानसभा सत्र शुरू होते ही इसके भी पंडित जी के नाम पर रखे जाने के लिए प्रस्ताव रखा जाएगा।
एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीन दयाल उपाध्याय को श्रद्धांजलि देते हुए पहले मुगलसराय नगर पालिका का नाम बदलकर पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर कर दिया गया। इसके बाद पांच अगस्त को बाकले मैदान से रेलवे स्टेशन के नये नाम पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन की घोषणा कर दी गई।
हालांकि अभी भी रेलवे मंडल, विधानसभा, तहसील, थाना और पोस्ट आफिस पर मुगलसराय का नाम ही चल रहा है। कहा कि आधार कार्ड में जिला चंदौली में शहर का नाम मुगलसराय ही दिखा रहा है। विधायक साधना सिंह ने बताया कि कुछ प्रक्रियाओं के बाद सभी जगह नाम बदल जाएगा।
मगर अभी तक विधानसभा क्षेत्र और तहसील पर मुगलसराय की छाप बरकरार है। मुगलसराय विधायक साधना सिंह का कहना है कि विधानसभा सत्र शुरू होते ही इसके भी पंडित जी के नाम पर रखे जाने के लिए प्रस्ताव रखा जाएगा।
एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीन दयाल उपाध्याय को श्रद्धांजलि देते हुए पहले मुगलसराय नगर पालिका का नाम बदलकर पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर कर दिया गया। इसके बाद पांच अगस्त को बाकले मैदान से रेलवे स्टेशन के नये नाम पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन की घोषणा कर दी गई।
हालांकि अभी भी रेलवे मंडल, विधानसभा, तहसील, थाना और पोस्ट आफिस पर मुगलसराय का नाम ही चल रहा है। कहा कि आधार कार्ड में जिला चंदौली में शहर का नाम मुगलसराय ही दिखा रहा है। विधायक साधना सिंह ने बताया कि कुछ प्रक्रियाओं के बाद सभी जगह नाम बदल जाएगा।