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हेलीकॉप्टर बाबा-
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मड़िहान। थाना क्षेत्र के कोटवा गांव स्थित सिकटही मौजा में हेलीकाप्टर बाबा के आश्रम की दीवार ढहवा दी गई। तहसीलदार कर्मेंद्र कुमार के नेतृत्व में की गई कार्रवाई में बड़ी संख्या में पुलिस बल और राजस्व कर्मी भी मौजूद थे।
आठ किलोमीटर लंबी चहारदीवारी गिराने का काम रविवार को पूरा नहीं हो सका। बताया गया कि अपर खजुरी बंधा के पानी की वजह से वहां की दलदली मिट्टी में बुलडोजर धंसने लगा, जिससे कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। इससे पूर्व में भी उपजिलाधिकारी मड़िहान विमल कुमार दूबे ने चहारदीवारी गिरवाई थी लेकिन उसके बाद भी ग्रामीण असंतुष्ट थे। इससे पुन: कार्रवाई की गई। तहसीलदार ने बताया कि जंगल के आठ किलोमीटर तक पत्थर की चहारदीवारी बनी है। लगभग दो किलोमीटर बाउंड्रीवाल गिराई गई है। कोटवा पांडेय स्थित सिकटही मौजा में बालयोगेश्वर महराज उर्फ प्रेम रावत का एसएन फ्लैगस फाउंडेशन के नाम से आश्रम लगभग चार हजार बीघे में फैला है।
सिंचाई विभाग की जमीन पर अनाधिकार कब्जा करने के लिए बाबा के अनुयायियों ने सिकटही नदी का प्रवाह पत्थर की दीवार से रोक दिया है। इस संबंध में विभाग द्वारा अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। बताते हैं कि इस प्रवाह के रुकने से हजारों एकड़ क्षेत्रफल की सिंचाई करने वाले अपर खजुरी बांध का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है। इस पर रोक नहीं लगी तो यह बंधा और नदी के लिए खतरा साबित होगा।
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आठ किलोमीटर लंबी चहारदीवारी गिराने का काम रविवार को पूरा नहीं हो सका। बताया गया कि अपर खजुरी बंधा के पानी की वजह से वहां की दलदली मिट्टी में बुलडोजर धंसने लगा, जिससे कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। इससे पूर्व में भी उपजिलाधिकारी मड़िहान विमल कुमार दूबे ने चहारदीवारी गिरवाई थी लेकिन उसके बाद भी ग्रामीण असंतुष्ट थे। इससे पुन: कार्रवाई की गई। तहसीलदार ने बताया कि जंगल के आठ किलोमीटर तक पत्थर की चहारदीवारी बनी है। लगभग दो किलोमीटर बाउंड्रीवाल गिराई गई है। कोटवा पांडेय स्थित सिकटही मौजा में बालयोगेश्वर महराज उर्फ प्रेम रावत का एसएन फ्लैगस फाउंडेशन के नाम से आश्रम लगभग चार हजार बीघे में फैला है।
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सिंचाई विभाग की जमीन पर अनाधिकार कब्जा करने के लिए बाबा के अनुयायियों ने सिकटही नदी का प्रवाह पत्थर की दीवार से रोक दिया है। इस संबंध में विभाग द्वारा अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। बताते हैं कि इस प्रवाह के रुकने से हजारों एकड़ क्षेत्रफल की सिंचाई करने वाले अपर खजुरी बांध का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है। इस पर रोक नहीं लगी तो यह बंधा और नदी के लिए खतरा साबित होगा।
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