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परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, भविष्य की सता रही चिंता
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जिले में हाल ही में पंचायत चुनाव खत्म हुआ, लेकिन इस बार का चुनाव अपने साथ कई लोगों को हमेशा के लिए गम दे गया। चुनाव ड्यूटी में लगे कई शिक्षक-शिक्षिकाएं कोरोना संक्रमित हुए। इनमें से कुछ का निधन भी हो गया। शिक्षकों की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी पत्नी व बच्चों पर आ गई है। परिवार पर टूटे इस कहर को याद कर उनकी तकलीफ बढ़ती जा रही है।
परिवार में कोई कमाने वाला नहीं
चोलापुर ब्लॉक के प्राइमरी विद्यालय दानगंज में सहायक अध्यापक पद पर तैनात शिवादित्य चौबे के जाने के बाद उनके परिवार में कमाने वाला कोई नहीं बचा। पत्नी का रो रोकर बुरा हाल है। कहती हैं हमारा परिवार अनाथ हो गया है। सास-ससुर का देहांत पहले ही हो चुका है। अब शिवादित्य भी छोड़कर चले गए। चार बच्चों के साथ भविष्य की गाड़ी कैसे चलेगी। 11 अप्रैल को शिवादित्य का चुनाव को लेकर प्रशिक्षण था। दो दिन बाद उनकी तबीयत खराब होने लगी। पोलिंग पार्टी की रवानगी के दिन 18 अप्रैल को उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई। वह चुनाव कराने नहीं जा सके। 20 अप्रैल को गांव के अस्पताल में डॉक्टर को दिखाया। दवाई दी, लेकिन सुधार नहीं हो रहा था। 21 अप्रैल को उन्हें कबीरचौरा अस्पताल लेकर गए। पहले कोरोना जांच हुई। डॉक्टर ने उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा था। 23 अप्रैल को तबीयत बिगड़ी तो उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी। अस्पताल में व्यवस्था नहीं थी तो बीएचयू ट्रामा सेंटर लेकर निकले, लेकिन उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। काश अस्पताल में सही वक्त पर वेंटिलेटर मिल जाता तो उनकी जान बच जाती। चारों बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है। छोटी बेटी अभी 8 साल की है। वह चाहते थे मैं टीचर बनूं। अब वह दुनिया में नहीं है, लेकिन उनके सपने को पूरा करने के लिए आगे की पढ़ाई पूरी करूंगी।
वर्जन
पति की मौत के बाद परास्नातक होते हुए भी विभाग चपरासी की नौकरी दे रहा है। मैंने समय मांगा है। बीएड करने के बाद टीईटी पास करूंगी और अध्यापक बन कर पति का सपना सच करूंगी।
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संयोगिता चौबे, शिवादित्य की पत्नी
अस्पताल पहुंचने से पहले ही तोड़ा दम
चिरईगांव ब्लॉक के प्राइमरी स्कूल शिवदशा में तैनात प्रधानाध्यापक उदय शंकर सिंह को कोरोना संक्रमण ने अस्पताल जाने तक का मौका नहीं दिया। उदय के बेटे दीपक बताते हैं कि तीन और चार अप्रैल को पिता को बुखार, गले में खराश की समस्या शुरू हो गई थी। घर पर ही दवा लेकर आराम करने लगे। कभी-कभी उन्हें घबराहट होने की समस्या हुई तो अस्पताल चलने के लिए कहा गया। लेकिन उस दौरान अस्पतालों की स्थिति को देख वह अस्पताल जाने से डर रहे थे। धीरे-धीरे तबीयत बिगड़ती रही। 10 अप्रैल को उन्होंने खाना-पीना छोड़ दिया। 11 अप्रैल भोर में उनकी तबीयत ज्यादा खराब होने लगी। डॉक्टर से बात की और उन्हें लेने निकला, लेकिन घर से थोड़ी ही दूर पहुंचा था कि फोन आया कि पिता इस दुनिया में नहीं रहे। उनके जाने से परिवार में खालीपन है। उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। मां की आंखों से बहते आंसू देख बहुत तकलीफ होती है।
मृतक आश्रित के तहत आवेदन किया है, लेकिन मेरी योग्यता एमबीबीएस की है। उसके मुताबिक चतुर्थ श्रेणी की जॉब बहुत कम है। विभाग से बात की है कि मुझे तृतीय श्रेणी की नौकरी मिले या बीएड व टीईटी करने का समय दिया जाए। ताकि उसे पास कर फिर से आवेदन कर सकूं।
- दीपक, उदय शंकर के बेटे
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परिवार में कोई कमाने वाला नहीं
चोलापुर ब्लॉक के प्राइमरी विद्यालय दानगंज में सहायक अध्यापक पद पर तैनात शिवादित्य चौबे के जाने के बाद उनके परिवार में कमाने वाला कोई नहीं बचा। पत्नी का रो रोकर बुरा हाल है। कहती हैं हमारा परिवार अनाथ हो गया है। सास-ससुर का देहांत पहले ही हो चुका है। अब शिवादित्य भी छोड़कर चले गए। चार बच्चों के साथ भविष्य की गाड़ी कैसे चलेगी। 11 अप्रैल को शिवादित्य का चुनाव को लेकर प्रशिक्षण था। दो दिन बाद उनकी तबीयत खराब होने लगी। पोलिंग पार्टी की रवानगी के दिन 18 अप्रैल को उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई। वह चुनाव कराने नहीं जा सके। 20 अप्रैल को गांव के अस्पताल में डॉक्टर को दिखाया। दवाई दी, लेकिन सुधार नहीं हो रहा था। 21 अप्रैल को उन्हें कबीरचौरा अस्पताल लेकर गए। पहले कोरोना जांच हुई। डॉक्टर ने उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा था। 23 अप्रैल को तबीयत बिगड़ी तो उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी। अस्पताल में व्यवस्था नहीं थी तो बीएचयू ट्रामा सेंटर लेकर निकले, लेकिन उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। काश अस्पताल में सही वक्त पर वेंटिलेटर मिल जाता तो उनकी जान बच जाती। चारों बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है। छोटी बेटी अभी 8 साल की है। वह चाहते थे मैं टीचर बनूं। अब वह दुनिया में नहीं है, लेकिन उनके सपने को पूरा करने के लिए आगे की पढ़ाई पूरी करूंगी।
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वर्जन
पति की मौत के बाद परास्नातक होते हुए भी विभाग चपरासी की नौकरी दे रहा है। मैंने समय मांगा है। बीएड करने के बाद टीईटी पास करूंगी और अध्यापक बन कर पति का सपना सच करूंगी।
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संयोगिता चौबे, शिवादित्य की पत्नी
अस्पताल पहुंचने से पहले ही तोड़ा दम
चिरईगांव ब्लॉक के प्राइमरी स्कूल शिवदशा में तैनात प्रधानाध्यापक उदय शंकर सिंह को कोरोना संक्रमण ने अस्पताल जाने तक का मौका नहीं दिया। उदय के बेटे दीपक बताते हैं कि तीन और चार अप्रैल को पिता को बुखार, गले में खराश की समस्या शुरू हो गई थी। घर पर ही दवा लेकर आराम करने लगे। कभी-कभी उन्हें घबराहट होने की समस्या हुई तो अस्पताल चलने के लिए कहा गया। लेकिन उस दौरान अस्पतालों की स्थिति को देख वह अस्पताल जाने से डर रहे थे। धीरे-धीरे तबीयत बिगड़ती रही। 10 अप्रैल को उन्होंने खाना-पीना छोड़ दिया। 11 अप्रैल भोर में उनकी तबीयत ज्यादा खराब होने लगी। डॉक्टर से बात की और उन्हें लेने निकला, लेकिन घर से थोड़ी ही दूर पहुंचा था कि फोन आया कि पिता इस दुनिया में नहीं रहे। उनके जाने से परिवार में खालीपन है। उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। मां की आंखों से बहते आंसू देख बहुत तकलीफ होती है।
मृतक आश्रित के तहत आवेदन किया है, लेकिन मेरी योग्यता एमबीबीएस की है। उसके मुताबिक चतुर्थ श्रेणी की जॉब बहुत कम है। विभाग से बात की है कि मुझे तृतीय श्रेणी की नौकरी मिले या बीएड व टीईटी करने का समय दिया जाए। ताकि उसे पास कर फिर से आवेदन कर सकूं।
- दीपक, उदय शंकर के बेटे