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राजगढ़ पहाड़ी पर मिले हजारों वर्ष पुराने जीवाश्म को संरक्षित करने की मांग
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी/मिर्जापुर
Updated Thu, 19 Jan 2017 09:32 PM IST
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बीएचयू के पुरातत्व विभाग ने की पुष्टि
- फोटो : अमर उजाला
मिर्जापुर के राजगढ़ पहाड़ी पर हजारों वर्ष पुराने जीवाश्म मिले हैं। कौतूहल बने इन जीवाश्म को देखने के लिए लोग यहां पहुंच रहे हैं।
पांच से सात सौ मीटर एरिया में फैले जीवाश्म को संरक्षित करने की ग्रामीणों ने मांग की है।
बीएचयू के पुरातत्व विभाग के प्रो. सुभाष यादव ने बताया कि ऐसा जीवाश्म सोनभद्र के सलखन स्थित फासिल्स पार्क में भी नहीं है, इसलिए इसका संरक्षित होना बेहद जरूरी है।
वहीं इसे सुरक्षित रखने के लिए सोनभद्र के शिवद्वार स्थित संग्रहालय में ले जाए जाने की बात कही गई है। विकास खंड राजगढ़ क्षेत्र में हजारों साल पुराने जीवाश्म बहुतायत मात्रा में विद्यमान हैं लेकिन इनको संरक्षित करने की कोई पहल नहीं की जा रही है।
अज्ञानता के कारण ग्रामीणों द्वारा पहाड़ पर पत्थरों को तोड़ कर गिट्टी के रूप में तब्दील कर दिया गया। बाद में जब ग्रामीणों ने जाना कि यह हजारों वर्ष पुराना जीवाश्म है तब उन लोगों को पश्चाताप हुआ।
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पहाड़ी के दूसरे छोर पर पत्थरों पर उभरी रेखाओं को देखकर ग्रामीण मानते थे कि देवी-देवता इन पत्थरों में उत्पन्न हुए हैं और कई जगहों पर तो पत्थरों को घेरकर उसका पूजन भी किया जाता है।
पहाड़ी पर एक वर्ष पूर्व बीएचयू के पुरातत्व विभाग के प्रो. डा. सुभाष यादव के नेतृत्व में टीम पहुंची थी। टीम ने जीवाश्म को चिह्नित करके शिवद्वार के संग्रहालय में ले जाने की कवायद की थी, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद जब इस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई तो क्षेत्र के बुद्धिजीवियों ने इसे संरक्षित करने की पुन: मांग उठाई है।
बुद्धिजीवियों का कहना है कि पुरातत्व विभाग द्वारा जैसे सोनभद्र के सलखन गांव में जीवाश्म को एक एरिया में बैरिकेडिंग करके पार्क बनाया गया है, उसी प्रकार यदि राजगढ़ पहाड़ी के फसिल्स को सुरक्षित कर दिया जाए तो विद्यार्थी आकर अध्ययन कर सकेंगे।
जीवाश्म के बारे में बीएचयू के पुरातत्व विभाग को अवगत कराया तो विभाग ने जीवाश्म की पुष्टि की और कहा कि इनको सुरक्षित रखने के लिए सोनभद्र के शिवद्वार स्थित संग्रहालय में ले जाया जाएगा।
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पांच से सात सौ मीटर एरिया में फैले जीवाश्म को संरक्षित करने की ग्रामीणों ने मांग की है।
बीएचयू के पुरातत्व विभाग के प्रो. सुभाष यादव ने बताया कि ऐसा जीवाश्म सोनभद्र के सलखन स्थित फासिल्स पार्क में भी नहीं है, इसलिए इसका संरक्षित होना बेहद जरूरी है।
वहीं इसे सुरक्षित रखने के लिए सोनभद्र के शिवद्वार स्थित संग्रहालय में ले जाए जाने की बात कही गई है। विकास खंड राजगढ़ क्षेत्र में हजारों साल पुराने जीवाश्म बहुतायत मात्रा में विद्यमान हैं लेकिन इनको संरक्षित करने की कोई पहल नहीं की जा रही है।
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अज्ञानता के कारण ग्रामीणों द्वारा पहाड़ पर पत्थरों को तोड़ कर गिट्टी के रूप में तब्दील कर दिया गया। बाद में जब ग्रामीणों ने जाना कि यह हजारों वर्ष पुराना जीवाश्म है तब उन लोगों को पश्चाताप हुआ।
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पहाड़ी के दूसरे छोर पर पत्थरों पर उभरी रेखाओं को देखकर ग्रामीण मानते थे कि देवी-देवता इन पत्थरों में उत्पन्न हुए हैं और कई जगहों पर तो पत्थरों को घेरकर उसका पूजन भी किया जाता है।
पहाड़ी पर एक वर्ष पूर्व बीएचयू के पुरातत्व विभाग के प्रो. डा. सुभाष यादव के नेतृत्व में टीम पहुंची थी। टीम ने जीवाश्म को चिह्नित करके शिवद्वार के संग्रहालय में ले जाने की कवायद की थी, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद जब इस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई तो क्षेत्र के बुद्धिजीवियों ने इसे संरक्षित करने की पुन: मांग उठाई है।
बुद्धिजीवियों का कहना है कि पुरातत्व विभाग द्वारा जैसे सोनभद्र के सलखन गांव में जीवाश्म को एक एरिया में बैरिकेडिंग करके पार्क बनाया गया है, उसी प्रकार यदि राजगढ़ पहाड़ी के फसिल्स को सुरक्षित कर दिया जाए तो विद्यार्थी आकर अध्ययन कर सकेंगे।
जीवाश्म के बारे में बीएचयू के पुरातत्व विभाग को अवगत कराया तो विभाग ने जीवाश्म की पुष्टि की और कहा कि इनको सुरक्षित रखने के लिए सोनभद्र के शिवद्वार स्थित संग्रहालय में ले जाया जाएगा।