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न नगर निगम गंभीर, न ही पार्षद
Updated Thu, 27 Oct 2016 02:18 AM IST
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शहर में खस्ताहाल बुनियादी सुविधाओं को लेकर न तो नगर निगम गंभीर है और न ही इस पर पार्षद चर्चा करना चाहते हैं। बुधवार को केवल 24 घंटे पहले सूचना देकर नगर निगम सदन की बैठक बुलाने का उपक्रम किया गया, वहीं बैठक में इतने भी पार्षद नहीं पहुंचे कि कोरम तक पूरा हो सके। विकास कार्यों के नाम पर शोर मचाने वाले आधे से अधिक पार्षद बैठक में नहीं पहुंचे। नतीजा, पुनरीक्षित बजट के लिए होने वाली यह बैठक 15 मिनट में स्थगित कर दी गई। अब सदन की अगली बैठक 16 नवंबर को होगी।
सभापति, महापौर राम गोपाल मोहले ने 12:05 बजे सदन की कार्यवाही शुरू की तभी सपा के अमरदेव यादव ने कोरम पूरा न होने का मुद्दा उठा दिया। विजय जायसवाल और वरुण सिंह ने पार्षदों के आने का इंतजार की बात की। इस बीच कांग्रेस के राजेश यादव, गोविंद शर्मा ने शहर में मलेरिया और डेंगू का मसला उठाया। सीताराम केसरी, ओमप्रकाश चौरसिया समेत कई पार्षदों ने शहर में बीमारियों के प्रकोप और जनसुविधाओं की बदहाली का मसला उठाया।
इसी बीच, कोरम पूरा न होने का मुद्दा फिर उठा। 100 पार्षदों (90 चुने गए और 10 नामित) में सदन में उपस्थिति सिर्फ 43 की थी, जबकि सदन को चलने के लिए कम से कम दो तिहाई पार्षदों का होना जरूरी होता है। सदन में भाजपा के 31 में से 20, सपा के 45 (चुने हुए/नामित) में से 11, कांग्रेस के 21 में से नौ ही उपस्थित हुए। बसपा के दो और निर्दल एक पार्षद उपस्थित रहे। पार्षदों ने आरोप लगाया कि सदन में होने वाली चर्चा का विवरण उन्हें 24 घंटे पहले दिया गया, जबकि नियमानुसार उसे सदन की कार्यवाही से 96 घंटे पहले मुहैया कराना होता है। साथ ही, पार्षदों की ओर से 91(2) के तहत विकास कार्यों के लिए नगर निगम की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं मांगने पर भी नाराजगी जताई गई।
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सभापति, महापौर राम गोपाल मोहले ने 12:05 बजे सदन की कार्यवाही शुरू की तभी सपा के अमरदेव यादव ने कोरम पूरा न होने का मुद्दा उठा दिया। विजय जायसवाल और वरुण सिंह ने पार्षदों के आने का इंतजार की बात की। इस बीच कांग्रेस के राजेश यादव, गोविंद शर्मा ने शहर में मलेरिया और डेंगू का मसला उठाया। सीताराम केसरी, ओमप्रकाश चौरसिया समेत कई पार्षदों ने शहर में बीमारियों के प्रकोप और जनसुविधाओं की बदहाली का मसला उठाया।
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इसी बीच, कोरम पूरा न होने का मुद्दा फिर उठा। 100 पार्षदों (90 चुने गए और 10 नामित) में सदन में उपस्थिति सिर्फ 43 की थी, जबकि सदन को चलने के लिए कम से कम दो तिहाई पार्षदों का होना जरूरी होता है। सदन में भाजपा के 31 में से 20, सपा के 45 (चुने हुए/नामित) में से 11, कांग्रेस के 21 में से नौ ही उपस्थित हुए। बसपा के दो और निर्दल एक पार्षद उपस्थित रहे। पार्षदों ने आरोप लगाया कि सदन में होने वाली चर्चा का विवरण उन्हें 24 घंटे पहले दिया गया, जबकि नियमानुसार उसे सदन की कार्यवाही से 96 घंटे पहले मुहैया कराना होता है। साथ ही, पार्षदों की ओर से 91(2) के तहत विकास कार्यों के लिए नगर निगम की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं मांगने पर भी नाराजगी जताई गई।
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