फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   More than 200 nursing homes in ballia only 43 registered no one has NOC of fire department

लापरवाही: जिले में 200 से ज्यादा नर्सिंग होम, सिर्फ 43 रजिस्टर्ड, किसी के पास अग्निशमन विभाग की एनओसी नहीं

Mon, 23 Nov 2020 03:59 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, बलिया
अमर उजाला नेटवर्क, बलिया Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Mon, 23 Nov 2020 03:59 PM IST
विज्ञापन
More than 200 nursing homes in ballia only 43 registered no one has NOC of fire department
demo pic

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में एक जिला अस्पताल, एक जिला महिला अस्पताल, 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 13 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 67 न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हो रहे हैं। इनमे से सिर्फ जिला अस्पताल की इमरजेंसी भवन और जिला महिला अस्पताल की नई बिल्डिंग के पास ही अग्निशमन विभाग की एनओसी है। इसके साथ ही जिले में लगभग दो सौ से अधिक नर्सिंग होम चल रहे हैं, लेकिन किसी के भी भवन के लिए अग्निशमन विभाग से एनओसी नहीं ली गई है।

विज्ञापन

इसमें गौरतलब तो ये है कि जिले में दो सौ से भी अधिक नर्सिंग होम संचालित होने के बावजूद सीएमओ के यहां सिर्फ 43 नर्सिंग होम ही रजिस्टर्ड हैं। बाकी किसकी परमिशन से चल रहे हैं, इसका जवाब देने वाला भी कोई नहीं है।
विज्ञापन



अग्निशमन विभाग से मिले आंकडों के अनुसार, जिले में संचालित सिर्फ तीन जिला अस्पताल के पास संचालित सृष्टि डायग्नोसिस्ट और मनोज निदान के साथ रसड़ा की एक सरोज पैथोलॉजी ने ही एनओसी रिन्यूवल कराई है। नियमों के अनुसार, चिकित्सा से जुड़े भवनों के बेसमेंट में वाहन पार्किंग के अलावा कोई भी कार्य नहीं होगा। लेकिन नर्सिंग होम, क्लीनिक संचालक भवन के बेसमेंट में पैथोलॉजी, एनआईसीयू व एक्स-रे सहित तमाम चीजें संचालित कर रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

इन नर्सिंग होमों में मानक के अनुरूप अग्निशमन यंत्र तथा सुरक्षा से संबंधित उपकरण भी उपलब्ध नहीं हैं। यही नहीं वहां तक अग्निशमन विभाग की गाड़ी पहुंचने के लिए रास्ता तक नहीं है। यदि किन्हीं कारणों से कोई अप्रिय घटना घटित होती है तो उस पर नियंत्रण पाना अग्निशमन विभाग के लिए टेढ़ी खीर साबित होगी।

स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के कारण जिले में सैकड़ों नर्सिंग होम व अस्पताल अवैध रूप से संचालित हैं। जबकि मुख्य चिकित्साधिकारी के कार्यालय में सिर्फ 43 नर्सिंग होम ही पंजीकृत हैं। इनमें न आग से बचने का इंतजाम है और न ही आपातकालीन स्थिति में निकलने के लिए कोई इमरजेंसी गेट। नगर में अधिकांश नर्सिंग होम व अस्पताल गली में संचालित हैं।

इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन पर लगाम नहीं लगाई जाती है। जब किसी नर्सिंग होम या अस्पताल में घटना हो जाती है तो स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीम गठित कर एक-दो दिन छापेमारी कर खानापूर्ति कर दी जाती है। अग्निशमन विभाग के आकड़ों पर गौर करें तो इस वर्ष भवन की एनओसी महावीर अस्पताल द्वारा ली गई है।

शेष किसी भी नर्सिंग होम व अस्पताल ने अग्निशमन विभाग से एनओसी लेना मुनासिब नहीं समझा है। इसकी जानकारी भी स्वास्थ्य विभाग को दी गई है, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। अग्निशमन विभाग का कहना है कि इसे लेकर कई बार सीएमओ को पत्र भी लिखा जा चुका है।

जिला अस्पताल के पास नहीं है एनओसी
जिला महिला अस्पताल के नए भवन और जिला अस्पताल की इमरजेंसी भवन को छोड़ किसी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ने अग्निशमन विभाग से एनओसी प्राप्त नहीं की है। जब जिले में सरकारी अस्पतालों ने ही एनओसी नहीं ली है तो प्राइवेट अस्पताल के संचालक एनओसी क्यों लेंगे।  इस बाबत अग्निशमन अधिकारी धीरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि एक नर्सिंग होम को छोड़ किसी ने भी एनओसी नहीं ली है।

ये हैं मानक
अस्पताल में दो सीढ़ी होनी चाहिए।
अस्पताल में फायर सर्विस यंत्र होना चाहिए।
अस्पताल में आपातकालीन खिड़की होनी चाहिए।
अस्पताल के चारों तरफ छह मीटर का रास्ता होना चाहिए।
अस्पताल तक पहुंचने के लिए 18 मीटर का रास्ता होना चाहिए।
नर्सिंग होम में अलार्म सिस्टम होना चाहिए।
नर्सिंग होम में हाईड्रेंट सिस्टम लगा होना चाहिए।
अस्पताल में पार्किंग की व्यवस्था होनी चाहिए।
बेसमेंट में पैथालाजी, एक्स-रे, एनआईसीयू, ओपीडी, वार्ड, वेटिंग रूम आदि नहीं होना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed