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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   More patients, less figures: Like Corona, the health department is also hiding the figures of dengue

मरीज ज्यादा-आंकड़े कम: कोरोना की तरह डेंगू के आंकड़े भी छिपा रहा स्वास्थ्य महकमा, सेहत से खिलवाड़ क्यों?

Sat, 30 Sep 2023 01:21 PM IST
किरन रौतेला रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी
रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Sat, 30 Sep 2023 01:21 PM IST
सार

वाराणसी के सरकारी व गैर सरकारी पैथालॉजी में खून की जांच कराने और ब्लड बैंकों से प्लेटलेट्स लेने वालों की लाइन लंबी है। जांच कराने वालों में डेंगू के लक्षण हैं, लेकिन स्वास्थ्य महकमे की तरफ से पीड़ितों की संख्या कम करके जारी की जा रही है।

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More patients, less figures: Like Corona, the health department is also hiding the figures of dengue
डेंगू। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

कोरोना की तरह ही डेंगू के आंकड़े भी स्वास्थ्य महकमा छिपा रहा है। सरकारी व गैर सरकारी अस्पताल बुखार पीड़ितों से भरे हैं। डेंगू के लक्षण हैं, फिर भी महकमा मानने को तैयार नहीं है। वाराणसी के साथ ही मिर्जापुर और आजमगढ़ मंडल के ज्यादातर जिलों में डेंगू फैला है। सबसे बड़ा सवाल है कि स्वास्थ्य महकमा शहरवासियों के सेहत से खिलवाड़ क्यों कर रहा है? कोरोना काल में भी ऐसे ही हुआ था।

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वाराणसी के सरकारी व गैर सरकारी पैथालॉजी में खून की जांच कराने और ब्लड बैंकों से प्लेटलेट्स लेने वालों की लाइन लंबी है। जांच कराने वालों में डेंगू के लक्षण हैं, लेकिन स्वास्थ्य महकमे की तरफ से पीड़ितों की संख्या कम करके जारी की जा रही है। ब्लड बैंकों से रोजाना 200 से 250 यूनिट प्लेटलेट्स दिए जा रहे हैं, जबकि स्वास्थ्य महकमा रोजाना डेंगू पीड़ितों की संख्या दस से कम ही बता रहा है। महकमे का तर्क है कि केवल एलाइजा पॉजिटिव को ही डेंगू पीड़ित माना जाता है। हालांकि, कोरोना काल में एंटीजन किट से जांच के बाद ही सतर्कता बरती जाती थी। आरटीपीसीआर जांच के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाती थी, लेकिन डेंगू व चिकनगुनिया के मामले में ऐसा नहीं किया जा रहा।

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More patients, less figures: Like Corona, the health department is also hiding the figures of dengue
डेंगू ने बरपाया कहर - फोटो : अमर उजाला

तीन सरकारी अस्पतालों के डेंगू वार्ड फुल

मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा में दस बेड, दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में बीस बेड और शास्त्री अस्पताल में बना छह बेड का डेंगू वार्ड फुल है। इनमें हर उम्र के लोग भर्ती हैं। दूसरे वार्डों में भी बुखार पीड़ित भरे हैं। पंजीकरण काउंटर सुबह 8 बजे खुलता है, लेकिन लोगों की लाइन पहले से लग जाती है। इनमें से ज्यादातर बुखार पीड़ित होते हैं।

अस्पताल                        ओपीडी में रोज दिखाने वाले मरीज

मंडलीय                         1600-1800

दीनदयाल                         1500-1700

शास्त्री अस्पताल रामनगर 1000-1200

एसडीपी की मांग अधिक

ब्लड बैंकों में इन दिनों रेंडम डोनर प्लेटलेट (आरडीपी) की जगह सिंगल डोनर प्लेटस्ट्स (एसडीपी) की मांग ज्यादा है। आईएमए ब्लड बैंक लहुराबीर से पिछले 15 दिन से रोजाना 50 यूनिट एसडीपी जा रही है। उधर, बीएचयू अस्पताल के ब्लड बैंक से भी 25 से 30 यूनिट प्लेटलेट्स दिया जा रहा है। लेकिन, एसडीपी 3 से 5 यूनिट जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि आरडीपी चढ़ाने पर करीब 5 से 10 हजार प्लेटलेट्स काउंट बढ़ता है, जबकि एसडीपी चढ़ाने से 30-40 हजार काउंट शरीर में बढ़ता है। डेंगू में तेजी से प्लेटलेट्स कम होता है,जो एसडीपी से ही पूरा होता है। हालांकि, सरकारी अस्पतालों में केवल आरडीपी की व्यवस्था है। ऐसे में एसडीपी आईएमए से ही जा रहा है।

निजी अस्पताल, ब्लड बैंक नहीं दे रहे सही जानकारी

शहर में निजी अस्पतालों में चलने वाले ब्लड बैंक के साथ ही निजी पैथोलॉजी को भी हर दिन होने वाली जांच, रिपोर्ट की जानकारी देनी है, लेकिन जिस तरह से आंकड़े सामने आ रहे हैं, उससे यह नहीं लग रहा कि स्वास्थ्य विभाग को सही जानकारी मिल पा रही। ऐसा इसलिए भी कहा जा सकता है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर दिन तीन से चार लोगों के डेंगू पीड़ित होने की जानकारी दी जा रही है।

More patients, less figures: Like Corona, the health department is also hiding the figures of dengue
डेंगू - फोटो : अमर उजाला

एक नजर में आंकड़े

शहर में ब्लड बैंक-17

हर दिन प्लेटलेट्स की मांग-200 से 250 यूनिट

एसडीपी की मांग-100 से 150 यूनिट

आरडीपी की मांग-100 यूनिट

एक यूनिट एसडीपी का मनमाना शुल्क

सिंगल डोनल प्लेटलेट्स (एसडीपी) की प्रक्रिया कठिन व महंगी है। इसके लिए आईएमए ब्लड बैंक में छह मशीनें लगी हैं। एक यूनिट एसडीपी के लिए करीब साढ़े नौ से दस हजार रुपये लगते हैं। निजी अस्पतालों के ब्लड बैंक में शुल्क ज्यादा है। 16 से 18 हजार रुपये शुल्क वसूले जा रहे हैं। शहर के आठ अस्पतालों में ब्लड बैंक है। एक अस्पताल ऐसा है, जो दूसरी जगह का एसडीपी ही नहीं स्वीकार करता है। सरकारी अस्पतालों में एसडीपी निकालने की सुविधा नहीं है। बीएचयू में ही व्यवस्था है।

डेंगू के तय मानक के अनुसार एनएस1 पॉजिटिव वाली रिपोर्ट को डेंगू का संदिग्ध लक्षण वाला मरीज माना जाता है। एलाइजा रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उसे डेंगू पीड़ित माना जाएगा। जो भी जानकारी ब्लड बैंकों से दी जा रही है, उसे जारी किया जा रहा है। -एससी पांडेय, जिला मलेरिया अधिकारी

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मंडलीय अस्पताल में भर्ती डेंगू के मरीज - फोटो : अमर उजाला

केस-1

सिगरा निवासी शिक्षिका रश्मि को जोड़ों में तेज दर्द के साथ बुखार आया। निजी लैब में जांच कराई तो डेंगू की पुष्टि हुई। शिक्षिका के अनुसार, निजी लैब संचालक ने रिपोर्ट नहीं दी। आपत्ति की तो कहा गया कि स्वास्थ्य महकमे से रिपोर्ट देने के लिए मना किया गया है।

केस-2

करौंदी आदित्यनगर निवासी महिला पूजा चौबे ने लंका स्थित एक निजी लैब में जांच करवाई। डेंगू की पुष्टि हुई। रिपोर्ट मिली तो डॉक्टर ने इलाज शुरू कर दिया। पूजा के मुताबिक, स्वास्थ्य महकमे के डेंगू पीड़ितों की सूची में उनका नाम नहीं है।

 

 

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