{"_id":"59edd7fa4f1c1bc8678b7327","slug":"morari-bapu-ram-katha-stage-manas-masan-attract-people","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बनारस के डोमरी में ‘जलती चिताओं’ के बीच ‘मानस मसान’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बनारस के डोमरी में ‘जलती चिताओं’ के बीच ‘मानस मसान’
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Mon, 23 Oct 2017 05:22 PM IST
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मोरारी बापू की व्यासपीठ पर मणिकर्णिका महाश्मशान की झलक
- फोटो : अमर उजाला
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वाराणसी में संत मोरारी बापू की रामकथा ‘जलती चिताओं’ के बीच हो रही है। मानस मसान रामकथा के लिए डोमरी में व्यासपीठ को ही श्मशान का रूप दिया गया है। 60 फीट लंबे और 40 फीट चौड़े मानस व्यास पीठ के मंच पर 25 से अधिक चिताएं एक साथ जलती नजर आ रही हैं।
मानस मसान कथा के लिए तैयार व्यास पीठ की चित्रकारी देश-दुनिया से पहुंचे हर श्रद्धालु का ध्यान खींच रही है। एक तरफ हिलोरें मारती गंगा तो दूसरी ओर जलती चिताएं। व्यासपीठ पर जहां मोरारी बापू कथा सुना रहे हैं, वहां का नजारा कुछ ऐसा ही है।
गुजराती चित्रकार अजय मलमकार ने महीने भर की मेहनत के बाद व्यासपीठ पर मणिकिर्णिका महाश्मशान को चित्रित किया है। इस में गंगा का तट भी है और शिवालय भी। मणिकर्णिका महातीर्थ के मंदिर भी हैं और मढ़ियां भी।
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नावें-पतवारें भी व्यासपीठ पर चित्रित की गई हैं, ताकि हर किसी को एहसास हो सके कि कथा श्मशान पर ही हो रही है। आयोजक मंडल से जुड़े जय प्रकाश माली ने बताया कि मोरारी बापू की इच्छा काशी में श्मशान पर ही कथा सुनाने की थी।
वहां जगह न होने की वजह से सतुआ बाबा की गोशाला परिसर में श्मशान की अनुकृति वाले व्यास पीठ को तैयार कराया गया।
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मानस मसान कथा के लिए तैयार व्यास पीठ की चित्रकारी देश-दुनिया से पहुंचे हर श्रद्धालु का ध्यान खींच रही है। एक तरफ हिलोरें मारती गंगा तो दूसरी ओर जलती चिताएं। व्यासपीठ पर जहां मोरारी बापू कथा सुना रहे हैं, वहां का नजारा कुछ ऐसा ही है।
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गुजराती चित्रकार अजय मलमकार ने महीने भर की मेहनत के बाद व्यासपीठ पर मणिकिर्णिका महाश्मशान को चित्रित किया है। इस में गंगा का तट भी है और शिवालय भी। मणिकर्णिका महातीर्थ के मंदिर भी हैं और मढ़ियां भी।
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नावें-पतवारें भी व्यासपीठ पर चित्रित की गई हैं, ताकि हर किसी को एहसास हो सके कि कथा श्मशान पर ही हो रही है। आयोजक मंडल से जुड़े जय प्रकाश माली ने बताया कि मोरारी बापू की इच्छा काशी में श्मशान पर ही कथा सुनाने की थी।
वहां जगह न होने की वजह से सतुआ बाबा की गोशाला परिसर में श्मशान की अनुकृति वाले व्यास पीठ को तैयार कराया गया।
श्मशान परम यज्ञ की भूमि: मोरारी बापू
सतुआ बाबा की गोशाला में नौ दिवसीय ‘मानस मसान’ आरंभ
- फोटो : अमर उजाला
गंगा तट पर डोमरी में उमड़ी भीड़ के बीच संत मोरारी बापू ने रविवार को मसान की तुलना बिना किसी आवरण वाले परम यज्ञ से की। कहा कि मसान ही निष्पक्ष, निरावर्ण, निष्कपट है। अनिश्चितता शोकदायक होती है लेकिन जो निश्चित है उसका आनंद होना चाहिए। मृत्यु निश्चित है, उसे रोका नहीं जा सकता। जहां परमात्मा की इच्छा होती है वहीं निश्चितता होती है।
संगीतमय रामकथा में बापू ने मृत्यु के सत्य को उद्घाटित किया। बताया कि मृत्यु आदमी को निष्कपट घोषित कर देती है। मृत्यु में कोई आवरण नहीं होता है। जो जैसा आता है, वैसा ही जाता है। हर घर मसान है। मसान को प्रेत निवास कहा गया है और कोई घर ऐसा नहीं है, जहां मृत्यु न हुई हो।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक जागरूक व्यक्ति को वियोग में, बुद्ध पुरुष को संयोग में घर मसान लगता है।
जो मरने को राजी हो जाए, उसे ही मसान जैसी जगह मिलती है। मसान की महिमा जानने से शिव महिमा का ज्ञान मिलता है। मसान हमारे लिए एक अद्भुत प्रेरणा है। सुख और आनंद अलग है। हम सुख और आनंद दोनों को एक ही मान लेते हैं, जो गलत है। सुख और आनंद दोनों अलग-अलग हैं। हमें सुख तो मिलता है लेकिन आनंद नहीं मिलता है। सुख उसे कहते हैं, जहां दुख दब जाए।
आनंद उसे कहते हैं जहां दुख दूर हो जाए। जहां दुख जड़ से मिट जाए वहीं आनंद है। बापू की कथा सुुनने के लिए डोमरी गांव में श्रद्धालुओं का सुबह से ही रेला उमड़ता रहा। नावों के अलावा निजी वाहनों से लोग कथास्थल पर पहुंचे। संगीतमय रामकथा के दौरान कोई झूमता रहा तो कोई थिरकता रहा। हर तरफ आनंद और भक्ति का प्रवाह तरंगित नजर आया।
संगीतमय रामकथा में बापू ने मृत्यु के सत्य को उद्घाटित किया। बताया कि मृत्यु आदमी को निष्कपट घोषित कर देती है। मृत्यु में कोई आवरण नहीं होता है। जो जैसा आता है, वैसा ही जाता है। हर घर मसान है। मसान को प्रेत निवास कहा गया है और कोई घर ऐसा नहीं है, जहां मृत्यु न हुई हो।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक जागरूक व्यक्ति को वियोग में, बुद्ध पुरुष को संयोग में घर मसान लगता है।
जो मरने को राजी हो जाए, उसे ही मसान जैसी जगह मिलती है। मसान की महिमा जानने से शिव महिमा का ज्ञान मिलता है। मसान हमारे लिए एक अद्भुत प्रेरणा है। सुख और आनंद अलग है। हम सुख और आनंद दोनों को एक ही मान लेते हैं, जो गलत है। सुख और आनंद दोनों अलग-अलग हैं। हमें सुख तो मिलता है लेकिन आनंद नहीं मिलता है। सुख उसे कहते हैं, जहां दुख दब जाए।
आनंद उसे कहते हैं जहां दुख दूर हो जाए। जहां दुख जड़ से मिट जाए वहीं आनंद है। बापू की कथा सुुनने के लिए डोमरी गांव में श्रद्धालुओं का सुबह से ही रेला उमड़ता रहा। नावों के अलावा निजी वाहनों से लोग कथास्थल पर पहुंचे। संगीतमय रामकथा के दौरान कोई झूमता रहा तो कोई थिरकता रहा। हर तरफ आनंद और भक्ति का प्रवाह तरंगित नजर आया।