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चांद का हुआ दीदार, ईद मुबारक आज
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जौनपुर। बृहस्पतिवार की शाम ईद के चांद का दीदार होते ही घरों में ईद की तैयारियां शुरू हो गई। चार घंटे के लिए खुले बाजार में ईद की खरीदारी खूब की गई। शाम होते-होते ईद का चांद देखने की बेताबी रोजेदारों में छाने लगी। शाम ढलते ही महिला-पुरुष, युवा व नन्हे रोजेदार घर के छत से लेकर खुले मैदान तक में ईद का चांद देखने के लिए जुटने लगे। फिर क्या था, जैसे ही आसमान में ईद के चांद का दीदार हुआ, रोजेदार एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद देने लगे। मस्जिदों से भी ईद का चांद होने का एलान किया गया।
कोरोना संक्रमण को देखते हुए चांद देखने के दौरान भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन होता रहा। चूंकि दिन के 11 बजे के बाद लाकडॉउन था इसलिए बाजार तो वीरान रहा लेकिन मुस्लिम बाहुल्य इलाके पूरी रात गुलजार रहे। मदीना मस्जिद के मौलाना कयामुद्दीन, मरकजी सीरत कमेटी के नायब सदर शकील मंसूरी, अरशद कुरैशी ने बताया कि लगातार दूसरे साल ईद में उत्साह देखने को नहीं मिल रहा है। पहले रमजान शुरू होते ही रौनक बढ़ जाती थी लेकिन अब ऐसा नहीं है। सभी लोग मस्जिदों की जगह घरों में नमाज पढ़ेंगे।
बक्शा के उत्तरपट्टी रन्नों गांव निवासी अकील रजा का कहना है कि पहले ईद में मेहमानों को अधिक से अधिक दावत देकर बुलाया जाता था। तमाम लोग बिना बुलाए घर पर आया करते थे, लेकिन पिछली बार की तरह इस बार भी कोरोना को लेकर डर बना हुआ है। लोग एक दूसरे के घर जाने से कतरा रहे हैं। इसलिए त्योहार को लेकर खुशियां तो जरूर है, लेकिन तैयारी आधी अधूरी है। पकवान तो जरूर बनेंगे लेकिन सीमित मात्रा में। मेहमानों को बुलाने से भी थोड़ा परहेज किया जाएगा। पहले की तरह ही सेवईयां, छोला, चाट, मिठाई, नमकीन आदि बनाएं जा रहे है। लेकिन, कोरोना के कारण यह भी पता है कि मेहमान कम आएंगे, इसलिए कम मात्रा में बनाए जा रहे।
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कोरोना संक्रमण को देखते हुए चांद देखने के दौरान भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन होता रहा। चूंकि दिन के 11 बजे के बाद लाकडॉउन था इसलिए बाजार तो वीरान रहा लेकिन मुस्लिम बाहुल्य इलाके पूरी रात गुलजार रहे। मदीना मस्जिद के मौलाना कयामुद्दीन, मरकजी सीरत कमेटी के नायब सदर शकील मंसूरी, अरशद कुरैशी ने बताया कि लगातार दूसरे साल ईद में उत्साह देखने को नहीं मिल रहा है। पहले रमजान शुरू होते ही रौनक बढ़ जाती थी लेकिन अब ऐसा नहीं है। सभी लोग मस्जिदों की जगह घरों में नमाज पढ़ेंगे।
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बक्शा के उत्तरपट्टी रन्नों गांव निवासी अकील रजा का कहना है कि पहले ईद में मेहमानों को अधिक से अधिक दावत देकर बुलाया जाता था। तमाम लोग बिना बुलाए घर पर आया करते थे, लेकिन पिछली बार की तरह इस बार भी कोरोना को लेकर डर बना हुआ है। लोग एक दूसरे के घर जाने से कतरा रहे हैं। इसलिए त्योहार को लेकर खुशियां तो जरूर है, लेकिन तैयारी आधी अधूरी है। पकवान तो जरूर बनेंगे लेकिन सीमित मात्रा में। मेहमानों को बुलाने से भी थोड़ा परहेज किया जाएगा। पहले की तरह ही सेवईयां, छोला, चाट, मिठाई, नमकीन आदि बनाएं जा रहे है। लेकिन, कोरोना के कारण यह भी पता है कि मेहमान कम आएंगे, इसलिए कम मात्रा में बनाए जा रहे।
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