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वाराणसी : आठवीं मोहर्रम पर उठा अलम, शहर में कई जगह बिठाए गए ताजिए

Mon, 09 Sep 2019 01:39 AM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Mon, 09 Sep 2019 01:39 AM IST
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moharram in varanasi
मोहर्रम के अवसर पर मातम करते शिया समुदाय के लोग। - फोटो : अमर उजाला
मारा गया है तीर से बच्चा रबाब का... ये मातमी धुन सुनकर हर किसी की आंख नम हो उठी। हुसैनी लश्कर के अलमबरदार हजरत अब्बास की याद में आठवीं मोहर्रम का जुलूस निकला। अलम, दुलदुल और ताबूत के जुलूस उठाए गए। जियारत के लिए सैकड़ों की संख्या में अकीदतमंदों का रेला उमड़ा। हर कोई ताबूत को छूकर मन्नतें मांग रहा था तो कोई दुलदुल को शिरनी खिलाकर अपनी मुरादों को पूरी करने की दुआ मांग रहा था।
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चाहमामा स्थित ख्वाजा नब्बू साहब के इमामबाड़े से आठवीं मुहर्रम का जुलूस अलम व मौला अब्बास की शबीहे तुर्बत सैयद मुनाजिर हुसैन मंजू के जेरे इंतजाम उठा। जुलूस उठने से पूर्व अब्बास मुर्तजा शम्सी ने मजलिस को खिताब किया।
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जुलूस नई सड़क खजूर वाली मस्जिद, फाटक शेख सलीम, काली महल, पितरकुंडा, लल्लापुरा होते हुए फातमान पहुंचा। अलम व तुर्बत के जुलूसों में भी खूब मातम व सीनाजनी की गई। इस अवसर पर लियाकत अली, शराफत नकवी, आफताब हुसैन, अंसार बनारसी, अलमदार हुसैन, नौहा पढ़ते चल रहे थे। शायर हकीम कासिम बनारसी, मयकश गाजीपुरी, डॉ नाजिम जाफरी, अरशी जौनपुरी, आफाक हैदर आदि के नौहे पढ़े गए।

अंधेरे में निकला जूलूस :
चौहट्टा लाल खां में मिर्जा मेहंदी के इमामबाड़े से ताबूत का जुलूस उठा जो इमामबाड़ा मीर घूरा आकर खत्म हुआ। चौहट्टा लाल खां से ही एक दूसरा खास जुलूस उठा। इस जुलूस की खासियत यह रही कि पूरा जुलूस अंधेरे में निकाला गया। इस दौरान शामिल रिजवी, वजीर हसन, दानिश हसन और गुलाम अब्बास ने नौहाख्वानी की। अर्दली बाजार में जियारत हुसैन के निवास से शाहिद हुसैन के संयोजन में जुलूस उठाया गया। अंजुमन इमामिया अर्दली बाजार दर्द भरे नौहे पेश कर रही थी। शिवाले में डिप्टी जाफर बख्त के इमामबाड़े से और बाराती बेगम के इमामबाड़े से अलम, दुलदुल और ताबूत के जुलूस नौहा मातम के साथ उठाए गए।

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जुलूस के आगे चलते थे भारत रत्न बिस्मिल्लाह खां :
चाहमामा से निकलने वाले जुलूस के संयोजन मुनाजिर हुसैन मंजू ने बताया कि जुलूस में जब तक उस्ताद बिस्मिल्लाह खां सेहतयाब रहे उन्होंने शहनाई बजाई। वो जुलूस के आगे आगे शहनाई पर मातमी धुन बजाते थे और फि र फातमान में जहां आज उनका मकबरा है वहां बैठकर चांदी की शहनाई पर मातमी धुन पेश किया करते थे। अंजुमन हैदरी के नौहाखां शराफ त अली खां ने बताया कि उस्ताद इस जुलूस में नंगे पांव शिरकत करते थे। शराफ त अली खां ने बताया कि उस्ताद की शहनाई पर जब इमाम हुसैन के 6 माह की बेटे की याद में लिखा गया नौहा मारा गया है तीर से बच्चा रबाब का... की धुन सुनाई देती थी तो लोग रोने लगते थे।

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