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शिशुओं के लिए स्तनपान कोरोना काल में सबसे बड़ा बचाव
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वाराणसी। मां का दूध बच्चों के लिए सर्वोत्तम आहार माना गया है। कोरोना काल में जब बच्चे भी कोरोना की जद में आते जा रहे हैं, तो इसका महत्व और बढ़ जाता है। स्तनपान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ही एक से सात अगस्त तक स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा हैं। इसमें अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों पर महिलाओं को जागरूक किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस साल की थीम स्वस्थ समाज के लिए स्तनपान का संकल्प रखा गया हैं। सीएमओ डॉ. वीबी सिंह ने बताया कि अभियान में मुख्य रूप से शिशु के जन्म के पहले घंटे के अंदर मां का पहला गाढ़ा दूध पिलाने, छह माह तक सिर्फ स्तनपान कराना, कंगारू मदर केयर एवं गृह आधारित नवजात की देखभाल (एचबीएनसी) के बारे में जागरूक किया जाएगा। इसमें एएनएम, आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका होगी। आईएमएस बीएचयू की पूर्व निदेशक तथा स्त्री रोग विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. प्रियंबदा तिवारी ने बताया कि स्तनपान बच्चों को कई बीमारियों से बचाता है। छह माह तक की आयु के शिशु को केवल स्तनपान कराने पर सामान्य रोग जैसे दस्त एवं निमोनिया के खतरों में क्रमश: 11 एवं 15 प्रतिशत की कमी लाई जा सकती है। अधिक समय तक स्तनपान करने वाले बच्चों की बुद्धि उन बच्चों की अपेक्षा अधिक होती है, जिन्हें मां का दूध थोड़े समय के लिए प्राप्त होता है।
जिला महिला अस्पताल कबीरचौरा की प्रमुख चिकित्साधीक्षक डॉ. लिली श्रीवास्तव ने बताया कि स्तनपान का महत्व कोविड संक्रमण के दौरान और अधिक हो जाता है, क्योंकि स्तनपान रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
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यह भी जानना जरूरी
जन्म के एक घंटे के भीतर मां का पहला गाढ़ा दूध पिलाना जरूरी
छह माह तक शिशु को सिर्फ स्तनपान कराना चाहिए।
दो वर्ष तक बच्चे को पूरक आहार के साथ स्तनपान कराना।
दूध में पाया जाने वाला कोलेस्ट्रम शिशु को प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है।
स्तन कैंसर, गर्भाशय कैंसर तथा अंडाशय के कैंसर का कम होता है खतरा।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस साल की थीम स्वस्थ समाज के लिए स्तनपान का संकल्प रखा गया हैं। सीएमओ डॉ. वीबी सिंह ने बताया कि अभियान में मुख्य रूप से शिशु के जन्म के पहले घंटे के अंदर मां का पहला गाढ़ा दूध पिलाने, छह माह तक सिर्फ स्तनपान कराना, कंगारू मदर केयर एवं गृह आधारित नवजात की देखभाल (एचबीएनसी) के बारे में जागरूक किया जाएगा। इसमें एएनएम, आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका होगी। आईएमएस बीएचयू की पूर्व निदेशक तथा स्त्री रोग विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. प्रियंबदा तिवारी ने बताया कि स्तनपान बच्चों को कई बीमारियों से बचाता है। छह माह तक की आयु के शिशु को केवल स्तनपान कराने पर सामान्य रोग जैसे दस्त एवं निमोनिया के खतरों में क्रमश: 11 एवं 15 प्रतिशत की कमी लाई जा सकती है। अधिक समय तक स्तनपान करने वाले बच्चों की बुद्धि उन बच्चों की अपेक्षा अधिक होती है, जिन्हें मां का दूध थोड़े समय के लिए प्राप्त होता है।
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जिला महिला अस्पताल कबीरचौरा की प्रमुख चिकित्साधीक्षक डॉ. लिली श्रीवास्तव ने बताया कि स्तनपान का महत्व कोविड संक्रमण के दौरान और अधिक हो जाता है, क्योंकि स्तनपान रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
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जन्म के एक घंटे के भीतर मां का पहला गाढ़ा दूध पिलाना जरूरी
छह माह तक शिशु को सिर्फ स्तनपान कराना चाहिए।
दो वर्ष तक बच्चे को पूरक आहार के साथ स्तनपान कराना।
दूध में पाया जाने वाला कोलेस्ट्रम शिशु को प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है।
स्तन कैंसर, गर्भाशय कैंसर तथा अंडाशय के कैंसर का कम होता है खतरा।