चित्रकूट जेल में गैंगवार: गाजीपुर के पैतृक गांव पहुंचा मेराज का शव, जनाजे की नमाज के बाद होगा सुपुर्द-ए-खाक
मेराज का शव सबसे पहले वाराणसी के आवास पर ले जाया गया। उसके कुछ देर बाद परिजन शव को पैतृक गांव गाजीपुर जिले के करीमुद्दीनपुर स्थित महेंद गांव लेकर चले गए। वहीं उसके शव को दफनाया जाएगा।
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मऊ जिले के सदर विधायक मुख्तार अंसारी के करीबी मेराजुद्दीन उर्फ मेराज का शव चित्रकूट से सुबह वाराणसी पहुंच गया। पहड़िया स्थित अशोक विहार कॉलोनी में आवास पर कुछ देर के लिए मेराज का शव रखा रहा। इसके परिजन शव लेकर गाजीपुर के करीमुद्दीनपुर स्थित महेंद गांव निकल गए। करीब दो बजे मेराज का शव गांव पहुंच गया।
शव पहुंचते ही दरवाजे पर ग्रामीणों की भीड़ लग गई। परिवार के सदस्य ग्रामीणों की मदद से दफनाने की तैयारियों में जुट गए। शाम चार बजे जनाजे की नमाज अदा के बाद पैतृक कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। इधर सुरक्षा की दृष्टिकोण से गांव में मुहम्मदाबाद एसडीएम राजेश गुप्ता एवं सीओ राजीव द्विवेदी के नेतृत्व में पांच थानों की फोर्स गांव के चप्पे-चप्पे पर तैनात कर दी गई।
वहीं दोनों अधिकारी गांव में लगातार चक्कर काटते रहे। वहीं गांव पहुंचने वाले प्रत्येक लोगों पर भी पुलिस द्वारा नजर रखी जा रही थी। इधर एहतियात के तौर पर एक पलाटून पीएसी करीमुद्दीनपुर थाने पर कैंप कर रही है, जिससे किसी भी विकट परिस्थितियों में मोर्चा संभाला जा सके।
महेंद गांव निवासी मेराज खां वाराणसी में जहां आतंक पर्याय था। वहीं मुख्तार गैंग की रीढ़ माना जाता था। बीस वर्ष पूर्व परिवार के साथ पैतृक गांव छोड़कर वाराणसी चला गया था। जहां मछली व्यवसाय से लेकर मंडी की वसूली और अपराधियों घटनाओं से लेकर ठेका-पट्टी तक का लेखा-जोखा रखता था। चित्रकूट में हत्या की जानकारी मिलते ही वाराणसी एवं पैतृक गांव महेंद में मातम पसर गया।
इधर पैतृक गांव शव सुपुर्द खाक की जानकारी मिलते ही एसडीएम राजेश गुप्ता एवं सीओ राजीव द्विवेदी के नेतृत्व में मुहम्मदाबाद, नोनहरा, भांवरकोल, बरेसर और करीमुद्दीनपुर थाने की फोर्स गांव में चप्पे-चप्पे पर तैनात हो गई। इधर दोनों अधिकारियों के नेतृत्व में पुलिस टीम गांव में जहां चक्रमण करती नजर आई। वहीं प्रत्येक आने वाले पर नजर रखी जा रही है। परिजनों ने बताया कि शाम चार बजे जनाजे की नमाज अदाकर सुपुर्द खाक किया जाएगा।
वाराणसी भी एक-दो घंटे रहा शव
अशोक विहार कॉलोनी स्थित आवास पर जब सुबह मेराज का शव पहुंचा तो घर के बाहर भीड़ लग गई। मेराज को जानने वालों की गाड़ियों से कॉलोनी भर गई। शव देखते ही घर की महिलाएं बेसुध हो गईं। कुछ देर घर के बाहर ही मेराज का शव रखा रहा और इसके तुरंत बाद ही परिजन लेकर गाजीपुर निकल गए। ईद के दिन चित्रकूट जेल में बंद मेराज की गोली मारकर हत्या कर दी गई। आपसी गैंगवार में पश्चिम का कुख्यात मुकीम काला व अवध के कुख्यात अंशु दीक्षित भी मारा गया।