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यादें 2016 : काशी ने धर्म-संस्कृति -सद्भाव के एवरेस्ट पर लहराई पताका
टीम डिजिटल,वाराणसी
Updated Fri, 30 Dec 2016 12:39 PM IST
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मालिनी अवस्थी
- फोटो : self
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संगीत के शहर में शुमार बनारस ने सांस्कृतिक सद्भाव के एवरेस्ट पर पताका लहराने में कामयाबी हासिल की। इसके दूरवर्ती सकारात्मक परिणाम देखे जा रहे हैं। राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव में जहां 19 से अधिक पद्म सम्मान से विभूषित हस्तियों ने सुर, लय , ताल से काशी की संगीत परंपरा को सींच कर आनंद की वर्षा की।
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वहीं नृत्यांगना सोनी चौरसिया ने 126.05 घंटे के अपने मैराथन नृत्य से त्रिचूर की मोहिनी अट्टम नृत्यांगना हेमलता कमंडलु के 123.20 घंटे के नृत्य के रिकार्ड को तोड़कर कीर्तिमान बनाया।
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तो संगीत, साहित्य से जुड़ी छह हस्तियों को पद्म सम्मान से अलंकृत किया गया। आठ विभूतियों को प्रदेश सरकार ने यश भारती से नवाज कर काशी की गरिमा का मान रखा।
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काशी विश्वनाथ मंदिर, संकट मोचन और अन्नपूर्णा धाम से बनारस घराने की संगीत परंपरा को नई ऊंचाई मिलने की उम्मीद है। धर्म की नगरी से सामाजिक सद्भाव की मिसाल इस बार भी पेश की गई।
संकट मोचन मंदिर प्रबंधन ने पाकिस्तानी गजल गायक उस्ताद गुलाम अली को विश्व विख्यात संकट मोचन संगीत समारोह के मंच पर तमाम विरोधों के बाद भी उतार कर सद्भाव की दिशा में मिसाल कायम की।
संस्कृति मंत्रालय की ओर से काशी में पहली बार राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव आयोजित किया गया और इसमें पीएम नरेंद्र मोदी खुद कलाकारों का उत्साह बढ़ाने के लिए पहुंचे। इस महोत्सव में देश को चोटी के कलाकारों ने अपनी संगीत साधना का परचम लहराया।
पद्म विभूषण पंडित जसराज, ठुमरी साम्राज्ञी पद्मविभूषण गिरिजा देवी, पद्मभूषण पं. राजन-साजन मिश्र, पद्मभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र, ओडिसी नृत्यांगना पद्मभूषण सोनल मानसिंह, संतूर वादक पद्मश्री भजन सोपोरी, तबला वादक पद्मश्री सुरेश तलवरकर, पद्मश्री विश्व मोहन भट्ट, प्रभा आत्रे, पद्मश्री वडाली बंधु के अलावा महाभारत के श्रीकृष्ण के अभिनय से सजी चक्रव्यूह नाटक और मनोज जोशी के चाणक्य नाटक की प्रस्तुतियां यादगार बन गईं।
उम्मीदें 2016 : कला धाम-भोजपुरी धाम का सपना होगा साकार
girija devi
- फोटो : अमर उजाला
संगीत-कला, साहित्य के पटल पर उम्मीदों की नई सुबह होने के संकेत मिले हैं। प्रभाती रागों के साथ सुबह-ए-बनारस की संगीत महफिल ने जहां 700 दिन पूरे करने का रिकार्ड बनाया, वहीं इस मंच ने नए कलाकार पैदा करने का विशिष्ट प्लेटफार्म भी बन गया है।
वर्षांत में बीएचयू में हुए राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव के जरिए संगीत जगत में नए पर्यवेक्षकों, कलाकारों के साथ ही दर्शकों की नई पीढ़ी को विस्तार मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा भोजपुरी धाम, कला धाम के अलावा संगीत ग्राम के साथ ही जापान के सहयोग से 140 करोड़ रुपये की लागत से एक ही छत के नीचे साहित्य-कला , संस्कृति का दर्शन कराने के लिए काशी-जापान मैत्री भवन का निर्माण भी आने वाले साल में दिखने लगेगा।
काशी में कला-संगीत और सेवा के क्षेत्र में बड़ी परियोजनाओं को साल के अंत तक डिजाइन कर लिया गया है। इसमें अन्नपूर्णा मंदिर ने सेहत के लिए नए योगध्यान केंद्र का विस्तार करने का फैसला किया है। इसके लिए रामकुंड स्थित आश्रम परिसर में भवन बन कर तैयार हो गया है।
विश्वनाथ मंदिर में विस्तारीकरण योजना के तहत मंदिर प्रशासन के कदमों ने नई उम्मीदें जगा दी हैं। राजा कर्ण सिंह की ऐतिहाहिक जम्मूकोठी, मिर्जापुर कोठी को मंदिर प्रशासन ने खरीद कर अपनी सीमा का विस्तार किया।
अब जम्मू कोठी में नए साल में बाबा का अन्नक्षेत्र खुलने की उम्मीद है। इसके अलावा दशाश्वमेध में 41 कमरों के अतिथिगृह का भी मार्ग प्रशस्त हो गया है। संगीत यात्रा को नई ऊंचाई मिली है।
ठुमरी गायिका पद्मविभूषण गिरिजा देवी कहती हैं कि बनारस घराने के संगीत को नई ऊंचाई मिली है। जापान के सहयोग से बनने वाला कन्वेंसन सेंटर संगीत-कला के संरक्षण-संवर्धन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। नई पीढ़ी को बनारस घराने के संगीत को आगे बढ़ाने के लिए मेहनत करनी चाहिए।
वर्षांत में बीएचयू में हुए राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव के जरिए संगीत जगत में नए पर्यवेक्षकों, कलाकारों के साथ ही दर्शकों की नई पीढ़ी को विस्तार मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा भोजपुरी धाम, कला धाम के अलावा संगीत ग्राम के साथ ही जापान के सहयोग से 140 करोड़ रुपये की लागत से एक ही छत के नीचे साहित्य-कला , संस्कृति का दर्शन कराने के लिए काशी-जापान मैत्री भवन का निर्माण भी आने वाले साल में दिखने लगेगा।
काशी में कला-संगीत और सेवा के क्षेत्र में बड़ी परियोजनाओं को साल के अंत तक डिजाइन कर लिया गया है। इसमें अन्नपूर्णा मंदिर ने सेहत के लिए नए योगध्यान केंद्र का विस्तार करने का फैसला किया है। इसके लिए रामकुंड स्थित आश्रम परिसर में भवन बन कर तैयार हो गया है।
विश्वनाथ मंदिर में विस्तारीकरण योजना के तहत मंदिर प्रशासन के कदमों ने नई उम्मीदें जगा दी हैं। राजा कर्ण सिंह की ऐतिहाहिक जम्मूकोठी, मिर्जापुर कोठी को मंदिर प्रशासन ने खरीद कर अपनी सीमा का विस्तार किया।
अब जम्मू कोठी में नए साल में बाबा का अन्नक्षेत्र खुलने की उम्मीद है। इसके अलावा दशाश्वमेध में 41 कमरों के अतिथिगृह का भी मार्ग प्रशस्त हो गया है। संगीत यात्रा को नई ऊंचाई मिली है।
ठुमरी गायिका पद्मविभूषण गिरिजा देवी कहती हैं कि बनारस घराने के संगीत को नई ऊंचाई मिली है। जापान के सहयोग से बनने वाला कन्वेंसन सेंटर संगीत-कला के संरक्षण-संवर्धन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। नई पीढ़ी को बनारस घराने के संगीत को आगे बढ़ाने के लिए मेहनत करनी चाहिए।