{"_id":"5b92857a867a557eb2061987","slug":"medical-employees-gate-lock-of-women-hospital-in-mau","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"मऊः वेतन ने मिलने नाराज स्वास्थ्य कर्मियों ने महिला अस्पताल में जड़ा ताला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मऊः वेतन ने मिलने नाराज स्वास्थ्य कर्मियों ने महिला अस्पताल में जड़ा ताला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मऊ
Updated Fri, 07 Sep 2018 07:34 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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यूपी के मऊ में दो माह से वेतन नहीं मिलने से भड़के महिला अस्पताल के कर्मचारियों ने शुक्रवार को अस्पताल पर ताला जड़ दिया। कर्मचारियों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि जब तक उन्हें वेतन नहीं मिल जाता वह आंदोलन जारी रखेंगे।
आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा। चेतावनी दी कि यदि हफ्तेभर में उन्हें वेतन का भुगतान नहीं किया गया तो वह फिर आंदोलन करेंगे। उधर, हड़ताल के चलते अस्पताल में मरीजों और उनके तीमारादारों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
तालाबंदी की सूचना पर मुख्य चिकित्साधिकारी के साथ सीआरओ मौके पर पहुंचे। कर्मचारियों से वार्ता के बाद समस्याओं को सप्ताहभर में निस्तारित करने का आश्वासन दिया। तब जाकर कर्मचारियों ने बंद ताला खोला।
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मालूम हो कि तत्कालीन सीएमएस डा. माधुरी सिंह का 30 मई 2018 को बलिया स्थानांतरण हो गया। स्थानांतरण के बाद सीएमएस 60 दिनों के लिए मेडिकल लीव पर चली गईं। इसके बाद अस्पताल का प्रभार डा. आरके गुप्ता को सौंपा गया। लेकिन उनहें वित्तीय अधिकार नहीं दिया गया।
ऐसे में अस्पताल में तैनात चार डाक्टर, चार फार्मासिस्ट, एक लिपिक सहित 28 कर्मचारियों को जुलाई के साथ अगस्त माह का वेतन नहीं मिला। यही नहीं कई संविदा कर्मचारियों को तो कई माह से वेतन का भुगतान नहीं हो सका है। स्वास्थ्यकर्मियों ने सीएमओ से लेकर एडी तक से गुहार लगा ली।
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आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा। चेतावनी दी कि यदि हफ्तेभर में उन्हें वेतन का भुगतान नहीं किया गया तो वह फिर आंदोलन करेंगे। उधर, हड़ताल के चलते अस्पताल में मरीजों और उनके तीमारादारों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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तालाबंदी की सूचना पर मुख्य चिकित्साधिकारी के साथ सीआरओ मौके पर पहुंचे। कर्मचारियों से वार्ता के बाद समस्याओं को सप्ताहभर में निस्तारित करने का आश्वासन दिया। तब जाकर कर्मचारियों ने बंद ताला खोला।
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मालूम हो कि तत्कालीन सीएमएस डा. माधुरी सिंह का 30 मई 2018 को बलिया स्थानांतरण हो गया। स्थानांतरण के बाद सीएमएस 60 दिनों के लिए मेडिकल लीव पर चली गईं। इसके बाद अस्पताल का प्रभार डा. आरके गुप्ता को सौंपा गया। लेकिन उनहें वित्तीय अधिकार नहीं दिया गया।
ऐसे में अस्पताल में तैनात चार डाक्टर, चार फार्मासिस्ट, एक लिपिक सहित 28 कर्मचारियों को जुलाई के साथ अगस्त माह का वेतन नहीं मिला। यही नहीं कई संविदा कर्मचारियों को तो कई माह से वेतन का भुगतान नहीं हो सका है। स्वास्थ्यकर्मियों ने सीएमओ से लेकर एडी तक से गुहार लगा ली।
वित्तीय प्रभार नहीं मिला
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- फोटो : self
कर्मचारियों की मानें तो प्रभारी सीएमएस भी कर्मचारियों की समस्या को लेकर एडी से मिलकर वित्तीय प्रभार देने की बात कर चुके थे, लेकिन उन्हें प्रभार नहीं दिया गया। उधर गुहार के बाद भी वेतन न मिलते देखकर शुक्रवार की सुबह कर्मचारियों ने अस्पताल के मेन गेट पर तालाबंदी कर कार्य का बहिष्कार कर दिया।
करीब दो घंटे बाद हड़ताल की जानकारी मिलने पर डीएम प्रकाश बिंदु ने स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव से वार्ता करने के बाद प्रतिनिधि के रूप में सीआरओ हंसनाथ और सीएमओ डा. सतीशचंद्र सिंह को मौके पर भेजा।
जहां हड़ताल पर बैठे लोगों को सीएमओ ने एक सप्ताह के भीतर सारी समस्या का निस्तारण का आश्वासन दिया। जिसके बाद कर्मचारियों ने हड़ताल समाप्त कर दी लेकिन चेताया कि एक सप्ताह में मांग पूरी न होने पर तालाबंदी कर फिर कार्य का बहिष्कार किया जाएगा। इस दौरान नराज स्वास्थ्यकर्मी एडी के विरोध में जमकर नारेबाजी करते रहे।
करीब दो घंटे बाद हड़ताल की जानकारी मिलने पर डीएम प्रकाश बिंदु ने स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव से वार्ता करने के बाद प्रतिनिधि के रूप में सीआरओ हंसनाथ और सीएमओ डा. सतीशचंद्र सिंह को मौके पर भेजा।
जहां हड़ताल पर बैठे लोगों को सीएमओ ने एक सप्ताह के भीतर सारी समस्या का निस्तारण का आश्वासन दिया। जिसके बाद कर्मचारियों ने हड़ताल समाप्त कर दी लेकिन चेताया कि एक सप्ताह में मांग पूरी न होने पर तालाबंदी कर फिर कार्य का बहिष्कार किया जाएगा। इस दौरान नराज स्वास्थ्यकर्मी एडी के विरोध में जमकर नारेबाजी करते रहे।
प्राइवेट अस्पताल की रही चांदी
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- फोटो : amar ujala
डाक्टरों और कर्मचारियों की तालबंदी और कार्यबहिष्कार से प्राइवेट अस्पतालों की चांदी रही। हड़ताल के चलते अस्पताल में आने वाले मरीज परेशान रहे। सबसे ज्यादा परेशानी दूरदराज से आने वाले मरीजों को हुई।
भावनाथपुर गांव से आई मरीज साधना ने बताया कि वह सुबह 8 बजे अस्पताल में जांच के लिए आई थी। लेकिन हड़ताल के चलते मजबूरन निजी अस्पताल जाना पड़ा। वहीं मधुबन के गजियापुर गांव से आई सरिता भी तीन घंटे तक हड़ताल के समाप्त होने के इंतजार करती रही।
हड़ताल समाप्त न होने पर प्राइवेट अस्पताल में इजाल करने को मजबूर हुई। इसी तरह से नजराना, खुशबू, अनामिका सहित 100 से ज्यादा मरीज परेशान रहे।
भावनाथपुर गांव से आई मरीज साधना ने बताया कि वह सुबह 8 बजे अस्पताल में जांच के लिए आई थी। लेकिन हड़ताल के चलते मजबूरन निजी अस्पताल जाना पड़ा। वहीं मधुबन के गजियापुर गांव से आई सरिता भी तीन घंटे तक हड़ताल के समाप्त होने के इंतजार करती रही।
हड़ताल समाप्त न होने पर प्राइवेट अस्पताल में इजाल करने को मजबूर हुई। इसी तरह से नजराना, खुशबू, अनामिका सहित 100 से ज्यादा मरीज परेशान रहे।