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Varanasi News: तीन पग भूमि में नाप लिए तीनों लोक, पाताल भेजे गए राजा बलि
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नाटी इमली के पास चित्रकूट रामलीला समिति की शुरु हुई रामलीला में भगवान के स्वरुपों की आरती पूजा
वाराणसी। श्री चित्रकूट रामलीला समिति के ओर से धूपचंडी स्थित चित्रकूट भवन व मैदान में समुद्र मंथन और श्रीवामन अवतार की लीला का भव्य मंचन किया गया। संध्या काल में रिमझिम बारिश के बीच पारंपरिक गणेश वंदना के साथ लीला का शुभारंभ हुआ, जिसे देख उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
लीला की शुरुआत में राक्षसों के बढ़ते अत्याचारों और आतंक से त्रस्त देवताओं ने करुण स्वर में भगवान विष्णु की स्तुति की। देवताओं की पुकार सुनकर भगवान ने आकाशवाणी की और आश्वासन दिया कि वह शीघ्र ही अयोध्या के रघुकुल में प्रभु श्रीराम के रूप में अवतरित होकर असुरों का संहार करेंगे। इसके बाद मंच पर भगवान विष्णु के वामन अवतार का दृश्य प्रस्तुत हुआ। ब्राह्मण बालक के वेश में भगवान वामन दानवीर दैत्यराज बलि के यज्ञ में पहुंचे और दान स्वरूप मात्र तीन पग भूमि की मांग की।
दैत्य गुरु शुक्राचार्य ने वामन रूपी प्रभु को पहचानते हुए राजा बलि को सावधान किया और भूमि दान देने से मना किया, लेकिन अपने प्रण पर अडिग रहने वाले बलि ने चेतावनियों को दरकिनार कर तीन पग भूमि दान देने का संकल्प ले लिया। इसके तुरंत बाद भगवान वामन ने अपना विराट स्वरूप धारण कर लिया। उन्होंने पहले पग में पृथ्वी, दूसरे पग में आकाश और तीसरे पग के लिए स्थान न बचने पर राजा बलि के समर्पण को स्वीकारते हुए तीसरा पग उनके सिर पर रखकर उन्हें सुतल लोक (पाताल) भेज दिया। इस प्रकार पृथ्वी पर दैत्यराज के साम्राज्य का अंत हुआ और धर्म की पुनर्स्थापना हुई।
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लीला के दौरान समिति और भजन मंडल के कलाकारों ने सस्वर रामायण चौपाइयों का गायन और महाआरती की। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि मुकुट पूजन के साथ 5 अक्तूबर से रामलीला का नियमित मंचन प्रारंभ किया जाएगा। इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष सुबोध अग्रवाल, मंत्री मोहन कृष्ण अग्रवाल, व्यवस्थापक पं. मुकुंद उपाध्याय, भंडार मंत्री रघुनाथ दास, कोषाध्यक्ष दीपेश चंद्र चौधरी, संजय गुजराती, अशोक सिंह, सत्येंद्र राय तथा अभिनव उपाध्याय सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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लीला की शुरुआत में राक्षसों के बढ़ते अत्याचारों और आतंक से त्रस्त देवताओं ने करुण स्वर में भगवान विष्णु की स्तुति की। देवताओं की पुकार सुनकर भगवान ने आकाशवाणी की और आश्वासन दिया कि वह शीघ्र ही अयोध्या के रघुकुल में प्रभु श्रीराम के रूप में अवतरित होकर असुरों का संहार करेंगे। इसके बाद मंच पर भगवान विष्णु के वामन अवतार का दृश्य प्रस्तुत हुआ। ब्राह्मण बालक के वेश में भगवान वामन दानवीर दैत्यराज बलि के यज्ञ में पहुंचे और दान स्वरूप मात्र तीन पग भूमि की मांग की।
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दैत्य गुरु शुक्राचार्य ने वामन रूपी प्रभु को पहचानते हुए राजा बलि को सावधान किया और भूमि दान देने से मना किया, लेकिन अपने प्रण पर अडिग रहने वाले बलि ने चेतावनियों को दरकिनार कर तीन पग भूमि दान देने का संकल्प ले लिया। इसके तुरंत बाद भगवान वामन ने अपना विराट स्वरूप धारण कर लिया। उन्होंने पहले पग में पृथ्वी, दूसरे पग में आकाश और तीसरे पग के लिए स्थान न बचने पर राजा बलि के समर्पण को स्वीकारते हुए तीसरा पग उनके सिर पर रखकर उन्हें सुतल लोक (पाताल) भेज दिया। इस प्रकार पृथ्वी पर दैत्यराज के साम्राज्य का अंत हुआ और धर्म की पुनर्स्थापना हुई।
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लीला के दौरान समिति और भजन मंडल के कलाकारों ने सस्वर रामायण चौपाइयों का गायन और महाआरती की। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि मुकुट पूजन के साथ 5 अक्तूबर से रामलीला का नियमित मंचन प्रारंभ किया जाएगा। इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष सुबोध अग्रवाल, मंत्री मोहन कृष्ण अग्रवाल, व्यवस्थापक पं. मुकुंद उपाध्याय, भंडार मंत्री रघुनाथ दास, कोषाध्यक्ष दीपेश चंद्र चौधरी, संजय गुजराती, अशोक सिंह, सत्येंद्र राय तथा अभिनव उपाध्याय सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।