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पत्रकारिता पर अर्थ और राजनीति शास्त्र का प्रभाव : प्रो. मनोज
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गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय हिसार के मीडिया अध्ययन संकाय के प्रो. मनोज दयाल ने कहा कि आज पत्रकारिता पर अर्थशास्त्र व राजनीतिशास्त्र का प्रभाव है, संचार शास्त्र गौण हो गया है। फिर भी लोग जागरूक होंगे तो पत्रकारिता की विकृतियां खत्म हो जाएंगी। आज भी हिंदी पत्रकारिता में आत्मतीयता, भावनात्मकता, भारतीयता एवं राष्ट्रीयता है।
वह सोमवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की ओर से हिंदी पत्रकारिता की प्रवृतियां अतीत से वर्तमान तक विषय पर आयोजित दो दिवसीय वेबिनार के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
गुजरात विद्यापीठ के प्रो. विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि आज समाचार में विचार डाल दिया जाता है जो पत्रकारिता के मानक के विपरीत है। अमरकंटक से प्रो. राघवेंद्र मिश्र ने कहा कि आज जिस तरह से डिजिटल हिंदी पत्रकारिता का प्रचलन बढ़ रहा है उससे लगता है कि भविष्य में इसकी संभावनाएं बढ़ेंगी। पूर्वांचल विश्विद्यालय के डॉ. अवध विहारी सिंह ने कहा कि हिंदी अखबार आकर्षक हुए हैं। इनका प्रसार भी बढ़ा है, लेकिन इसके मूल्यों और संपादकीय में गिरावट भी आई है। अध्यक्षता करते हुए जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. योगेंद्र सिंह ने कहा कि निश्चित रूप से हिंदी पत्रकारिता में बहुत बदलाव आया है। हिंदी पत्रकारिता पहले से ज्यादा समृद्ध हुई है, लेकिन भाषा को लेकर इस पर सवाल भी उठता रहता है। इस अवसर पर डॉ. विनोद कुमार सिंह, डॉ. अरुण शर्मा, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. नागेन्द्र पाठक, डॉ. रमेश सिंह, डॉ. शिवजी सिंह, डॉ. अजय वर्मा, विनय सिंह आदि की भागीदारी रही।
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वह सोमवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की ओर से हिंदी पत्रकारिता की प्रवृतियां अतीत से वर्तमान तक विषय पर आयोजित दो दिवसीय वेबिनार के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
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गुजरात विद्यापीठ के प्रो. विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि आज समाचार में विचार डाल दिया जाता है जो पत्रकारिता के मानक के विपरीत है। अमरकंटक से प्रो. राघवेंद्र मिश्र ने कहा कि आज जिस तरह से डिजिटल हिंदी पत्रकारिता का प्रचलन बढ़ रहा है उससे लगता है कि भविष्य में इसकी संभावनाएं बढ़ेंगी। पूर्वांचल विश्विद्यालय के डॉ. अवध विहारी सिंह ने कहा कि हिंदी अखबार आकर्षक हुए हैं। इनका प्रसार भी बढ़ा है, लेकिन इसके मूल्यों और संपादकीय में गिरावट भी आई है। अध्यक्षता करते हुए जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. योगेंद्र सिंह ने कहा कि निश्चित रूप से हिंदी पत्रकारिता में बहुत बदलाव आया है। हिंदी पत्रकारिता पहले से ज्यादा समृद्ध हुई है, लेकिन भाषा को लेकर इस पर सवाल भी उठता रहता है। इस अवसर पर डॉ. विनोद कुमार सिंह, डॉ. अरुण शर्मा, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. नागेन्द्र पाठक, डॉ. रमेश सिंह, डॉ. शिवजी सिंह, डॉ. अजय वर्मा, विनय सिंह आदि की भागीदारी रही।
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