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Varanasi News: शहीदों की चिताओं पर जलेंगे हर बरस मेले, वतन पे मरने वालों का यही बाकी निशां होगा

Mon, 18 Aug 2025 05:39 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Mon, 18 Aug 2025 05:39 PM IST
सार

17 अगस्त 1942 की बात है, जिस दौरान महात्मा गांधी की अगुआई में 08 अगस्त 1942 से शुरू किया गया भारत छोड़ो आंदोलन चरम पर था, चोलापुर क्षेत्र के आयर गांव में नाग पंचमी के क्षेत्र के पहलवान पट्ठे दंगल में जोर आजमाइश कर रहे थे। 

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Martyrdom Day celebrated at Cholapur Martyr Memorial in Varanasi
शहादत दिवस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी जनपद का एकमात्र शहीद स्थल चोलापुर शहीद स्मारक 17 अगस्त 1942 को हुए पांच शूरवीरों की शहादत को आज भी अपने जेहन में बसाए हुए हैं, शहीदों की याद में बीते वर्षों से उक्त शहीद स्थल पर प्रति वर्ष शहादत दिवस मनाया जाता है। 

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17 अगस्त 1942 की बात है, जिस दौरान महात्मा गांधी की अगुआई में 08 अगस्त 1942 से शुरू किया गया भारत छोड़ो आंदोलन चरम पर था, चोलापुर क्षेत्र के आयर गांव में नाग पंचमी के क्षेत्र के पहलवान पट्ठे दंगल में जोर आजमाइश कर रहे थे। 
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अखाड़े में स्वतंत्रता सेनानी वीर बहादुर सिंह हाथ में तिरंगा लेकर सीटी बजाते हुए पहुंचे और मौजूद पहलवानों को ललकारते हुए कहा हे शूरवीरों जंजीरों से जकड़ी धरती मां को छुड़ाने का प्रयास करो जिस मिट्टी में जोर आजमाइश कर रहे हो, धरती मां परतंत्रता की जंजीरों से जकड़ी हुई हैं, पहले उन्हें छुड़ाओ बाद में इस मिट्टी का तिलक लगाओ 
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वीर बहादुर सिंह के आवाह्न पर राम नरेश उपाध्याय उर्फ विद्यार्थी, श्री पंचम, श्रीराम उर्फ बच्चू, श्री चौथी एवं श्री निरहू के साथ दर्जनों लोग चोलापुर थाने पर तिरंगा फहराने के लिए चल पड़े, रास्ते में पड़ने वाले गांव सुलेमापुर, भठौली, आयर, रामगांव, शिवरामपुर, सुलेमापुर, गोसाईपुर से हजारों लोग इनके साथ हो लिए।

चोलापुर थाने पर पहुंचकर स्व. बीरबहादुर सिंह ने झंडा फहराने का प्रयास किया। जिस पर तात्कालिक दरोगा रामचंद्र सिंह ने विरोध किया। मौके पर मौजूद शहीद रामनरेश उर्फ विद्यार्थी जो कि पहलवान थे, शादी के बाद हाल ही में उनका गौना आया हुआ था लेकिन अपने परिवार की मोहमाया छोड़कर इसी जुनून में दरोगा रामचंद्र सिंह से भिड़ गए और उन्हें उठाकर के जोरदार पटखनी दे उनकी छाती पर पैर रख दिया। इतना देखते ही रामचंद्र के भतीजे ने रिवाल्वर से रामनरेश उर्फ विद्यार्थी को कनपटी पर गोली मार दी। जिससे वे मौके पर ही शहीद हो गयें।

मामला बिगड़ता देख मौके पर मौजूद उच्चाधिकारियों ने भीड़ पर फायरिंग का आदेश दे दिया। फायरिंग में श्री पंचम, श्रीराम उर्फ बच्चू, श्री चौथी एवं श्री निरहू मौके पर ही शहीद हो गये तथा बीर बहादुर सिंह घायल हो गये। घायलावस्था में गिरफ्तार कर अंग्रेज बनारस ले गए। जहां घातक पिटाई के बाद उन पर मुकदमा चला तथा सात वर्ष सश्रम कारावास की सजा हुई।  25 जुलाई सन 1987 को वीरबहादुर सिंह स्वर्गवासी हो गयें। 

घटना के 25 वर्ष बाद 17 अगस्त 1972 को पूर्व मुख्यमंत्री पंडित कमलापति त्रिपाठी ने यहां शहीद स्मारक का निर्माण कराया। तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा ने 12 जनवरी 1975 को इसका उद्घाटन किया   जब तक वीर बहादुर सिंह जिवित थे तब तक उनके अगुआई में प्रति वर्ष चोलापुर में स्थित शहीद दिवस पर शहीद दिवस मनाया जाता रहा। 


स्व० वीर बहादुर सिंह ने मृत्यु से 10 वर्ष पूर्व संन्यास ले लिया। दीक्षा स्वरूप उन्हें बाबा बेअंत दर्शनानंद जी महाराज नाम मिला। इनकी की मृत्यु के पश्चात सन्यासी बाबा बेअंत दर्शनानंद जी महाराज के धर्मशास्त्र के अनुसार आयर बाजार में उनको समाधि दी गयी तथा समाधि स्थल बनाया गया। जहां प्रतिवर्ष उनकी पुण्यतिथि पर लोग श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं। इसके बाद कांग्रेस समर्थक रहें पं. रामप्रवेश चौबे वर्षों तक शहीद स्थल की देखरेख करते रहे। पं. रामप्रवेश चौबे की मृत्यु के उपरांत उनके पुत्र कांग्रेस नेता सतीश चौबे प्रतिवर्ष शहीद दिवस पर शहीदों के परिजनों को सम्मानित करते आए हैं। 

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