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Pitru Paksha 2023: कोरोना काल के मृतकों की मुक्ति के लिए काशी में धर्मानुष्ठान, विद्यामठ में मंत्र गूंज उठे
Sun, 08 Oct 2023 04:58 PM IST
वाराणसी ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 08 Oct 2023 04:58 PM IST
सार
कोरोना काल में जान गंवाने वालों की मुक्ति की कामना के साथ ही काशी में धर्मानुष्ठान आरंभ हो गए। केदारघाट स्थित श्री विद्यामठ में कोरोना काल में मृतकों की मुक्ति के मंत्र गूंज उठे। मातृनवमी से शुरू होकर सर्वपितृ अमावस्या तक चलने वाले आयोजन में देश ही नहीं विदेश के श्रद्धालुओं के लिए भी अनुष्ठान होंगे।
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श्री विद्यामठ में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कोरोना काल में जान गंवाने वालों की मुक्ति की कामना के साथ ही काशी में धर्मानुष्ठान आरंभ हो गए। केदारघाट स्थित श्री विद्यामठ में कोरोना काल में मृतकों की मुक्ति के मंत्र गूंज उठे। मातृनवमी से शुरू होकर सर्वपितृ अमावस्या तक चलने वाले आयोजन में देश ही नहीं विदेश के श्रद्धालुओं के लिए भी अनुष्ठान होंगे।
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शनिवार को ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कथा के साथ धर्मानुष्ठान के साथ शुरू किया। वैदिक ब्राह्मणों ने गंगा के तट पर मातृनवमी की तिथि पर मातृशक्तियों की मुक्ति की कामना के साथ पितृपक्ष के अनुष्ठान शुरू किए। इसमें देश-विदेश में कोरोना मृतकों का ब्योरा एकत्र किया गया है।
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10 हजार से अधिक वैदिक ब्राह्मण
अनुष्ठान के लिए देश के कई हिस्सों से परिजन भी इस आयोजन का हिस्सा बनने के लिए काशी पहुंचेंगे। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बताया कि कोरोना काल के दौरान मरने वालों के लिए जो भी परिजन अंतिम संस्कार नहीं करा पाए हैं उन सभी का ब्यौरा एकत्र करके यह अनुष्ठान आरंभ हुआ है।
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जिस धर्म के लोगों की कोरोना के कारण असमय मृत्यु हुई है उनकी उनके धर्म के अनुसार ही सद्गति के लिए अनुष्ठान की प्रक्रिया को पूर्ण कराया जाएगा। धार्मिक अनुष्ठान के साथ ही कोरोना काल में मरने वालों की सद्गति के लिए अनुष्ठान की शुरुआत हो चुकी है। इसमें लगभग 10 हजार से अधिक वैदिक ब्राह्मण अनुष्ठान को पूर्ण कराएंगे। 14 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या पर सामूहिक रूप से ज्ञात और अज्ञात मृतकों के लिए धर्मानुष्ठान संपन्न होंगे।