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कार्तिक में बही मनोज की फागुनी बयार...
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कार्तिक मास में भोजपुरी गायक और सांसद मनोज तिवारी ने फागुनी बयार बहाकर समां बांध दिया। पुराने स्वरूप में मनोज तिवारी का अंदाज श्रोताओं के सिर चढ़कर बोला। तुलसी के राम पर बोलते हुए मनोज तिवारी ने कहा कि तुलसी बाबा के राम जग-जग के राम हैं। वह सभी के रोम-रोम में बसते हैं। हमारे भी हैं और तुम्हारे भी हैं। हर सांस-सांस राम की है।
सिगरा स्थित रुद्राक्ष में बृहस्पतिवार को तीन दिवसीय काशी उत्सव का समापन मनोज तिवारी के भोजपुरी सुरों से हुआ। मनोज तिवारी ने भगवान राम और हनुमान जी के होली मिलन पर गीत गाकर कार्तिक मास में फागुनी रंग घोल दिया। आज अवध में होरी रे रसिया...., रंग लेके आवें हनुमान जी....के बाद मनोज तिवारी गाते-गाते हनुमान हनुमान चालीसा पर आ गए तो जुग सहस्त्र के बाद की लाइन पर ही अटक गए। जनता के बीच से उठकर एक लड़के ने जुग सहस्त्र जोजन पर भानू...की लाइन को पूरा किया तो फिर मनोज ने हनुमान चालीसा को पूरा सुनाया जुग सहस्त्र जोजन पर भानू, लील्यो ताहि मधुर फल जानू। तुलसी के राम पर बोलते-बोलते मनोज ने भोजपुरी गानों की शुरुआत की। जनता की मांग पर उन्होंने अपना पुराना अंदाज भी दिखाया और चट देनी मार दे ली खींच के तमाचा, ही ही ही हंस देलीं रिंकिया के पापा...जब गुनगुनाया तो दर्शकों ने भी उनके सुर से सुर मिलाना शुरू कर दिया। ए दरभंगिया भऊजी अपने बहिनी से ब्याह करा दा ना....के बाद मनोज ने जिया हो बिहार के लाला...सुनाया तो पूरे रुद्राक्ष में खूब तालियां बजीं और लोग झूमकर नाच उठे। लोगों ने खूब हो हल्ला मचाना शुरू किया तो इस पर मनोज तिवारी को कहना पड़ा कि थोड़ा कम हल्ला मचावा जा।
बैरंग लौटे वीआईपी पासधारक
वाराणसी। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की ओर से आयोजित तीन दिवसीय काशी उत्सव में अव्यवस्थाओं की भरमार रही। रुद्राक्ष की क्षमता से पांच से छह गुना पास बांट दिए गए। वहीं देर शाम को कार्यक्रम देखने के लिए वीआईपी पास लेकर पहुंचे दर्शकों को निराश लौटना पड़ा। कार्यक्रम शुरू होने के घंटा भर पहले ही पूरा हाल दर्शकों से भर गया था। इसके बाद भी बाहर सड़क पर पास धारियों की कतार लगी हुई थी। आयोजकों ने भीड़ का दबाव देख घंटा भर पहले ही रुद्राक्ष के प्रवेश द्वार को बंद कर दिया।
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सिगरा स्थित रुद्राक्ष में बृहस्पतिवार को तीन दिवसीय काशी उत्सव का समापन मनोज तिवारी के भोजपुरी सुरों से हुआ। मनोज तिवारी ने भगवान राम और हनुमान जी के होली मिलन पर गीत गाकर कार्तिक मास में फागुनी रंग घोल दिया। आज अवध में होरी रे रसिया...., रंग लेके आवें हनुमान जी....के बाद मनोज तिवारी गाते-गाते हनुमान हनुमान चालीसा पर आ गए तो जुग सहस्त्र के बाद की लाइन पर ही अटक गए। जनता के बीच से उठकर एक लड़के ने जुग सहस्त्र जोजन पर भानू...की लाइन को पूरा किया तो फिर मनोज ने हनुमान चालीसा को पूरा सुनाया जुग सहस्त्र जोजन पर भानू, लील्यो ताहि मधुर फल जानू। तुलसी के राम पर बोलते-बोलते मनोज ने भोजपुरी गानों की शुरुआत की। जनता की मांग पर उन्होंने अपना पुराना अंदाज भी दिखाया और चट देनी मार दे ली खींच के तमाचा, ही ही ही हंस देलीं रिंकिया के पापा...जब गुनगुनाया तो दर्शकों ने भी उनके सुर से सुर मिलाना शुरू कर दिया। ए दरभंगिया भऊजी अपने बहिनी से ब्याह करा दा ना....के बाद मनोज ने जिया हो बिहार के लाला...सुनाया तो पूरे रुद्राक्ष में खूब तालियां बजीं और लोग झूमकर नाच उठे। लोगों ने खूब हो हल्ला मचाना शुरू किया तो इस पर मनोज तिवारी को कहना पड़ा कि थोड़ा कम हल्ला मचावा जा।
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वाराणसी। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की ओर से आयोजित तीन दिवसीय काशी उत्सव में अव्यवस्थाओं की भरमार रही। रुद्राक्ष की क्षमता से पांच से छह गुना पास बांट दिए गए। वहीं देर शाम को कार्यक्रम देखने के लिए वीआईपी पास लेकर पहुंचे दर्शकों को निराश लौटना पड़ा। कार्यक्रम शुरू होने के घंटा भर पहले ही पूरा हाल दर्शकों से भर गया था। इसके बाद भी बाहर सड़क पर पास धारियों की कतार लगी हुई थी। आयोजकों ने भीड़ का दबाव देख घंटा भर पहले ही रुद्राक्ष के प्रवेश द्वार को बंद कर दिया।
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