{"_id":"6a739a80f5ce0cdf1e0133aa","slug":"malayalam-translation-of-neerja-madhavs-novel-tibetan-anguish-gains-global-recognition-varanasi-news-c-20-vns1056-1494193-2026-08-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Varanasi News: नीरजा माधव के उपन्यास गेशे जम्पा का मलयालम में अनुवाद, तिब्बती व्यथा को मिली वैश्विक पहचान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Varanasi News: नीरजा माधव के उपन्यास गेशे जम्पा का मलयालम में अनुवाद, तिब्बती व्यथा को मिली वैश्विक पहचान
विज्ञापन
नीरजा माधव की कृति गेशे जम्पा का मलयालम अनुवाद स्वयं
लेखिका नीरजा माधव के हिंदी उपन्यास गेशे जम्पा का मलयालम में अनुवाद किया गया है। केरल की सिमी एस कुरूप ने इस उपन्यास का अनुवाद किया है। यह कृति तिब्बती शरणार्थियों की व्यथा को वैश्विक धरातल तक पहुंचाएगी।
गेशे जम्पा परम पावन दलाई लामा के पलायन से लेकर भारत में उनके निर्वासित जीवन तक की कहानी कहती है। यह उपन्यास तिब्बती शरणार्थियों की व्यथा और मानवीय संवेदना को गहराई से दर्शाता है। इसमें तिब्बत की महिलाओं के जीवन के दर्द को बखूबी उभारा गया है। नीरजा माधव को सांस्कृतिक और राष्ट्रीयता बोध की उपन्यासकार के रूप में जाना जाता है। उनकी लगभग 50 प्रकाशित कृतियों में देनपा: तिब्बत की डायरी और फ्री तिब्बत नामक एक द्विभाषी कविता संग्रह भी शामिल है। ये कृतियां तिब्बत की अहिंसक मुक्ति साधना और मानवाधिकारों की अनदेखी पर आधारित हैं।
समीक्षक इंदीवर ने नीरजा माधव को भारत की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय परंपरा तथा अंतरराष्ट्रीय संबंधों की पीड़ा को चित्रित करने वाली प्रथम लेखिका बताया। उन्होंने कहा कि उनका पहला उपन्यास यमदीप थर्ड जेंडर विमर्श पर भारत का प्रथम उपन्यास माना जाता है। वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार हिमांशु उपाध्याय ने सिमी एस कुरूप के अनुवाद कार्य की सराहना की। नीरजा माधव की अनेक कृतियां अंग्रेजी और अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवादित और प्रकाशित हो चुकी हैं। शिक्षाविद बेनी माधव मिश्र ने इस अनुवाद को अहिंदी भाषी साहित्य प्रेमियों, विशेषकर केरल के लिए एक उपहार बताया। कार्यक्रम में प्रो. वंदना मिश्रा, कवींद्र नारायण, डॉ. पद्मनाभ त्रिवेदी, प्रो. सुरेंद्र प्रताप, तनु तिवारी, ऋषभ पांडे आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
गेशे जम्पा परम पावन दलाई लामा के पलायन से लेकर भारत में उनके निर्वासित जीवन तक की कहानी कहती है। यह उपन्यास तिब्बती शरणार्थियों की व्यथा और मानवीय संवेदना को गहराई से दर्शाता है। इसमें तिब्बत की महिलाओं के जीवन के दर्द को बखूबी उभारा गया है। नीरजा माधव को सांस्कृतिक और राष्ट्रीयता बोध की उपन्यासकार के रूप में जाना जाता है। उनकी लगभग 50 प्रकाशित कृतियों में देनपा: तिब्बत की डायरी और फ्री तिब्बत नामक एक द्विभाषी कविता संग्रह भी शामिल है। ये कृतियां तिब्बत की अहिंसक मुक्ति साधना और मानवाधिकारों की अनदेखी पर आधारित हैं।
विज्ञापन
समीक्षक इंदीवर ने नीरजा माधव को भारत की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय परंपरा तथा अंतरराष्ट्रीय संबंधों की पीड़ा को चित्रित करने वाली प्रथम लेखिका बताया। उन्होंने कहा कि उनका पहला उपन्यास यमदीप थर्ड जेंडर विमर्श पर भारत का प्रथम उपन्यास माना जाता है। वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार हिमांशु उपाध्याय ने सिमी एस कुरूप के अनुवाद कार्य की सराहना की। नीरजा माधव की अनेक कृतियां अंग्रेजी और अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवादित और प्रकाशित हो चुकी हैं। शिक्षाविद बेनी माधव मिश्र ने इस अनुवाद को अहिंदी भाषी साहित्य प्रेमियों, विशेषकर केरल के लिए एक उपहार बताया। कार्यक्रम में प्रो. वंदना मिश्रा, कवींद्र नारायण, डॉ. पद्मनाभ त्रिवेदी, प्रो. सुरेंद्र प्रताप, तनु तिवारी, ऋषभ पांडे आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन