मकर संक्रांति: 15 जनवरी को लगेगी पुण्य की डुबकी, 14 जनवरी की रात को भगवान भास्कर करेंगे मकर राशि में प्रवेश
मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। इस दिन गंगा में पुण्य की डुबकी लगाने पूर्वांचल भर से श्रद्धालु काशी पहुंचते हैं।
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सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। सूर्य की उपासना के पर्व के साथ ही खरमास की भी समाप्ति हो जाएगी। मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। इस दिन गंगा में पुण्य की डुबकी लगाने पूर्वांचल भर से श्रद्धालु काशी पहुंचते हैं। शनिवार के दिन संक्रांति का पुण्यकाल मिलने से सुखद संयोग भी बन रहे हैं।
काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के सदस्य पं. दीपक मालवीय ने बताया कि पौष शुक्ल द्वादशी 14 जनवरी को रात्रि में 8.34 बजे भगवान भास्कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही सूर्य उत्तरायण भी हो जाएंगे। रात्रि के समय संक्रांति लग रही है इसलिए इसका पुण्यकाल अगले दिन 15 जनवरी शनिवार को माना जाएगा।
खिचड़ी का पर्व व मकर संक्रांति का स्नान, दान प्रात: काल से मध्याह्न काल तक किया जा सकेगा। पं. मालवीय ने बताया कि इस बार संक्रांति की शुरुआत रोहिणी नक्षत्र में हो रही है। यह बेहद उत्तम है। संक्रांति के दिन से ही शुभ कार्य विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश व धार्मिक कार्य आरंभ हो जाएंगे।
मकर संक्रांति के दिन जप, तप, दान और पवित्र नदियों में स्नान का महत्व है। प्रात: काल सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर पूजन करें। सूर्य को लाल वस्त्र, गेहूं, गुड़, मसूर की दाल, लाल पुष्प, नारियल, दक्षिणा अर्पित करें। ब्राह्मणों को चावल, उड़द की दाल, तिल, कंबल, घी, दक्षिणा का दान करें। इस दिन दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।