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महाकुंभ : रोडवेज चालकों और परिचालकों पर बढ़ा दबाव, इस हादसे के बाद उठे सवाल; युवती की हुई थी माैत

Mon, 20 Jan 2025 03:09 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Mon, 20 Jan 2025 03:09 AM IST
सार

महाकुंभ को लेकर रोडवेज चालकों और परिचालकों पर काफी दबाव बढ़ा है। इसके लेकर क्षेत्रीय प्रबंधक ने कहा कि जिन चालकों की स्वास्थ्य में दिक्कत थी, उन्हें दवा के साथ ही आराम की सलाह दी गईं।

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Mahakumbh Pressure increased roadways drivers conductors questions after accident in varanasi
वाराणसी का रोडवेज बस स्टेशन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Mahakumbh 2025 : महाकुंभ को लेकर चालक और परिचालकों पर ज्यादा दबाव है। सिविल लाइंस डिपो के चालक को मिर्गी जैसी बीमारी की जानकारी होने के बावजूद उसे बस की स्टेयरिंग थमाई गईं। नतीजा, चालक को मिर्गी आई और अनियंत्रित बस की चपेट में आने से लहरतारा में युवती की दबकर मौत हो गईं। वहीं, रोडवेज अधिकारियों का दावा है कि चालक और परिचालक की नियमित जांच होती है।

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महाकुंभ शुरू होने से पूर्व 13 जनवरी को ही कैंट बस स्टेशन पर रोडवेज चालकों और परिचालकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया था। हालांकि महाकुंभ का इतना दबाव है कि चालक और परिचालक अवसाद में आकर नौकरी कर रहे हैं। रोडवेज अधिकारियों ने बताया कि रोस्टर के आधार पर ही ड्यूटी ली जा रही है। 
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रोडवेज में नियमित और संविदा पर चालक हैं। अब तो आउटसोर्सिंग पर परिचालक रखे जा रहे हैं। वाराणसी परिक्षेत्र के आठ डिपो में 1600 चालक और परिचालक हैं। सिविल लाइंस डिपो की बस लेकर आवाजाही करने वाले रोडवेज चालकों और परिचालकों ने बताया कि इस समय दबाव ज्यादा है। डिपो या स्टेशन पहुंचने के 10 से 15 मिनट के अंतराल पर बस लेकर निकलना पड़ रहा है।
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वाराणसी परिक्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक परशुराम पांडेय ने बताया कि तय मानक पर चालकों और परिचालकों का स्वास्थ्य परीक्षण होता है। 13 जनवरी को ही परीक्षण हुआ, जिन चालकों की स्वास्थ्य में दिक्कत थी, उन्हें दवा के साथ ही आराम की सलाह दी गईं। रोस्टर के अनुसार ही ड्यूटी ली जाती है।

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अनुबंधित बसों के चालक और परिचालक नहीं पूरा करते मानक

अनुबंधित बस चालकों और परिचालकों की कोई निगरानी नहीं होती है। सिर्फ लाइसेंस के आधार पर मोटर मालिक नौकरी पर उन्हें रख लेते हैं। सिविल लाइंस डिपो की बस से युवती की मौत मामले में छानबीन में सामने आया कि अनुबंधित बस चालक का सिर्फ लाइसेंस ही चेक किया गया। अन्य किसी तरह का चिकित्सकीय परीक्षण नहीं हुआ।

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