फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Mahakavi Jaishankar Prasad birth anniversary Vice-Chancellor and writers shared their thoughts in varanasi

महाकवि जयशंकर प्रसाद की जयंती: कुलपति बोले- अगली पीढ़ी के लिए प्रसाद की कृतियों, साहित्य व धरोहरों को संजोएं

Sat, 31 Jan 2026 01:14 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Sat, 31 Jan 2026 01:14 PM IST
सार

Varanasi News: महाकवि जयशंकर प्रसाद की जयंती पर बीएचयू के प्रो. अवधेश प्रधान ने कहा कि प्रसाद की कृतियों में बहुत ही बारीकी, शालीनता और गंभीरता है। उनकी दृष्टि एक अनासक्ति मानव की दृष्टि थी, जो उन्हें मानव से महामानव की ऊंचाइयों तक पहुंचाती है।

विज्ञापन
Mahakavi Jaishankar Prasad birth anniversary Vice-Chancellor and writers shared their thoughts in varanasi
महाकवि जयशंकर प्रसाद साहित्य संस्कृति महोत्सव में संबोधित करते कुलपति प्रो. अजीत चतुर्वेदी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महाकवि जयशंकर प्रसाद की जयंती पर शुक्रवार को उनके चेतगंज स्थित आवास पर प्रसाद मंदिर में महाकवि जयशंकर प्रसाद साहित्य संस्कृति महोत्सव का उद्घाटन बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत चतुर्वेदी ने किया। उन्होंने कहा कि प्रसाद की कृतियों, उनके साहित्य, उनकी धरोहरों को संजोने की जरूरत है, ताकि अगली पीढ़ी को अवगत कराया जा सके। यह सब ऐसे आयोजनों से ही संभव है।

विज्ञापन


उन्होंने कहा कि समाज की निरंतरता बनाए रखने के लिए साहित्य की बहुत बड़ी उपयोगिता है। साहित्य एक ऐसी विधा है, जिसमें समाज का हर तत्व शामिल है। चाहे वह विज्ञान हो, कला या अन्य कोई तत्व हो। उन्होंने प्रसाद साहित्य पर और अधिक शोध कार्य किए जाने पर बल दिया। बीएचयू के प्रो. अवधेश प्रधान ने कहा कि प्रसाद की कृतियों में बहुत ही बारीकी, शालीनता और गंभीरता है। उनकी दृष्टि एक अनासक्ति मानव की दृष्टि थी, जो उन्हें मानव से महामानव की ऊंचाइयों तक पहुंचाती है।
विज्ञापन


बीएचयू के ही प्रो. प्रभात मिश्र ने कहा कि प्रसाद के रचना क्रम में एक व्यवस्थित स्वरूप है, उनकी काव्य यात्रा एक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ती है। उनके उत्तराधिकारी के रूप में आज तक कोई और नहीं आ सका है। प्रो. सुमन जैन ने कहा कि जयंती समारोह से प्रसाद का साहित्य आम पाठकों से जुड़ने का भी बहुत ही प्रभावकारी माध्यम बनेगा। प्रसाद ने अपने साहित्य में स्त्री समस्याओं को भी बड़ी बारीकी से उठाया है। बस्ती के साहित्यकार अष्टभुजा शुक्ल ने कहा कि प्रसाद ने कामायनी के रूप में हिंदी साहित्य को एक ऐसा उपहार दिया है, जिसे सदियों तक याद रखा जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. इंदीवर ने कहा कि उनका साहित्य चमत्कृत करने वाला था। साहित्यकार डॉ. दयानिधि मिश्र, हिमांशु उपाध्याय, डॉ. कवींद्र नारायण, सुरेंद्र वाजपेयी, गौतम अरोड़ा आदि ने विचार रखे। स्वागत जयशंकर प्रसाद की प्रपौत्री व संयोजक डॉ. कविता प्रसाद ने किया। संचालन डॉ. राम सुधार सिंह और धन्यवाद ज्ञापन अवधेश प्रसाद ने किया। संगीत संध्या में सितार वादक देवब्रत मिश्र ने सितार वादन की प्रस्तुति दी। उपशास्त्रीय गायिका सुचरिता गुप्ता ने गायन और जयपुर की विजय लक्ष्मी व डॉ. अपर्णा मक्कर ने प्रसाद के काव्य पर आधारित नृत्य पेश कर सभी को आनंदित किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed