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UP: मुख्तार अंसारी ने असलहा लाइसेंस लेने में की धोखाधड़ी, बचाव पक्ष की बहस के लिए 16 जनवरी को होगी सुनवाई

Sat, 13 Jan 2024 05:31 PM IST
प्रगति चंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: प्रगति चंद Updated Sat, 13 Jan 2024 05:31 PM IST
सार

मुख्तार अंसारी पर असलहा लाइसेंस लेने में धोखाधड़ी के आरोप को लेकर कोर्ट में बहस पूरी हुई। अब अदालत ने बचाव पक्ष की बहस के लिए अगली तिथि 16 जनवरी नियत की है। वहीं मुख्तार की ओर से बांदा जेल से लिखित बयान जेल अधीक्षक के जरिये कोर्ट में भेजा गया। कहा गया कि इस मामले में साजिश करने का आरोप है।

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Mafia Mukhtar Ansari committed fraud in obtaining arms license hearing will be held on January 16
Mukhtar Ansari - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

36 साल पहले फर्जीवाड़ा कर दोनाली बंदूक का लाइसेंस लेने के मामले में आरोपी माफिया मुख्तार अंसारी के खिलाफ विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) अवनीश गौतम की अदालत में सुनवाई हुई। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बांदा जेल से मुख्तार अंसारी की पेशी के बीच अभियोजन पक्ष की ओर से बहस पूरी कर ली गई। अदालत ने बचाव पक्ष की बहस के लिए अगली तिथि 16 जनवरी नियत की है।

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सीबीसीआईडी के अभियोजन अधिकारी उदय राज शुक्ल और एडीजीसी विनय कुमार सिंह ने बहस की। कहा कि इस मामले में सुनवाई के दौरान प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव और डीजीपी ने बयान में मुख्तार अंसारी के असलहे के लाइसेंस में अपना हस्ताक्षर होने से इंकार किया है। तत्कालीन आयुध लिपिक और मुख्तार अंसारी की साजिश से असलहा लाइसेंस लेने में धोखाधड़ी की गई। तत्कालीन आयुध लिपिक की मौत हो चुकी है और अब सिर्फ मुख्तार इस मामले में आरोपी है। 
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मुख्तार की ओर से बांदा जेल से लिखित बयान जेल अधीक्षक के जरिये कोर्ट में भेजा गया। कहा गया कि इस मामले में साजिश करने का आरोप है। जबकि, साजिश करने वाला ऐसा कोई नहीं है, जिसके खिलाफ मुकदमा चल रहा हो। कहा कि वह निर्दोष है और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण मुकदमा दर्ज करा कर आरोपी बनाया गया है। कोर्ट में बहस के दौरान मुख्तार अंसारी के अधिवक्ता श्री नाथ त्रिपाठी, आदित्य वर्मा और राकेश मिश्रा मौजूद रहे।

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प्रकरण के अनुसार, मुख्तार अंसारी के खिलाफ आरोप है कि 10 जून 1987 को दोनाली बंदूक के लाइसेंस के लिए गाजीपुर के जिला मजिस्ट्रेट के यहां प्रार्थना पत्र दिया था। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के फर्जी हस्ताक्षर से उसने शस्त्र लाइसेंस प्राप्त कर लिया था। फर्जीवाड़े के उजागर होने पर सीबीसीआईडी ने चार दिसंबर 1990 को गाजीपुर के मुहम्मदाबाद थाने में मुख्तार अंसारी, तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर समेत पांच नामजद और अन्य अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। 

जांच के बाद तत्कालीन आयुध लिपिक गौरीशंकर श्रीवास्तव और मुख्तार अंसारी के विरुद्ध 1997 में अदालत में आरोप पत्र प्रेषित किया गया। सुनवाई के दौरान गौरीशंकर श्रीवास्तव की मृत्यु हो जाने के कारण उसके विरुद्ध मुकदमा 18 अगस्त 2021 को समाप्त कर दिया गया। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन और पूर्व डीजीपी देवराज नागर समेत 10 गवाहों का बयान दर्ज कराया गया है।
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