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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Maa Vishalakshi Kumbhabhishekam Shaktipeeth doors closed for 45 hours special prayers and worship

मां विशालाक्षी: कुंभाभिषेक...45 घंटे के लिए बंद किए गए शक्तिपीठ के कपाट, विशेष स्तुति और आराधना हुई; जुटे भक्त

Mon, 01 Dec 2025 01:20 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Mon, 01 Dec 2025 01:20 PM IST
सार

Varanasi News: मां विशालाक्षी शक्तिपीठ में कुंभाभिषेक के दूसरे दिन सुबह गणपति पूजन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद मंडपम पूजन, प्रधान कलश पूजन और विशेष स्तुति और आराधना की गई। 

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Maa Vishalakshi Kumbhabhishekam Shaktipeeth doors closed for 45 hours special prayers and worship
मां विशालाक्षी के कुंभाभिषेक अनुष्ठान के बाद बंद हुआ मंदिर का कपाट। - फोटो : संवाद

विस्तार

मां विशालाक्षी के कुंभाभिषेक के अनुष्ठान दूसरे दिन रविवार को भी हुए। मुख्य अनुष्ठान के पूर्व मंदिर के शिखर पर छह स्वर्णकलश स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही यह काशी का पांचवां स्वर्ण मंदिर बन जाएगा। शाम को मां की आरती और पूजन के साथ ही गर्भगृह के कपाट 45 घंटे के लिए बंद कर दिए गए। 

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तमिलनाडु से आए वैदिक विद्वान डाॅ. शिवश्री के पिचई गुरुकुल व शिवश्री एम सुंदर गुरुकुल के आचार्यत्व में 11 तमिल ब्राह्मणों ने पूजन शुरू किया। 11 वैदिक ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ-हवन कराया। पूरा परिसर मंत्रध्वनि से गूंज उठा और आध्यात्मिक ऊर्जा का सघन प्रवाह महसूस किया गया। 
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नौवां कुंभाभिषेक श्रीयुक्त काशी नाट्टकोट्टई नगरम मैनेजिंग सोसाइटी की ओर से कराया जा रहा है। पांच दिवसीय कुंभाभिषेक के क्रम में आदि शक्तिपीठ माता विशालाक्षी के पट आम दर्शनार्थियों के लिए बंद कर दिए गए। लगभग 45 घंटे के बाद प्राण प्रतिष्ठा संपन्न होने पर सोमवार को अपराह्न 3 बजे के बाद दर्शन प्रारंभ होंगे। इस अवसर पर मंदिर में कांची की कामाक्षी, मदुरै की मीनाक्षी, काशी विशालाक्षी, गणेश और कार्तिक भगवान की नई प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। 

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विधि विधान से हुआ पूजन

कुंभाभिषेक के क्रम में रविवार को भी हवन, पूजन का कार्यक्रम चलता रहा। शाम को मंदिर से शोभायात्रा निकली गई जो मीरघाट, त्रिपुरा भैरवी, दशाश्वमेध, गोदौलिया का चक्रमण कर मंदिर वापस पहुंची। एक दिसंबर को कुंभाभिषेक के मुख्य अनुष्ठान होंगे। सहयोगी ब्राह्मणों में सोम सुंदरम, कार्तिकेयम, सुभईया सहित कई भक्तगण उपस्थित रहे। सोमवार को सुबह सात बजे से नौ बजे तक यज्ञ होगा। 

इसके बाद 9:30 बजे से पूजन व मंदिर की परिक्रमा की जाएगी। सुबह 10 से 10:20 बजे तक कुंभाभिषेक होगा। संगम के जल से शिखर का अभिषेक कर शिखर पर छह स्वर्ण कलश स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही श्री काशी विश्वनाथ, मां अन्नपूर्णा, संत रविदास और कैथी मार्कंडेय महादेव के बाद यह बनारस का पांचवां स्वर्ण मंदिर होगा।

रजत मुकुट धारण कर देवव्रत बने दंडक्रम विक्रमादित्य
दंडक्रम पारायणकर्ता अभिनंदन समारोह रविवार को सांगवेद विद्यालय में हुआ। मुख्य पारायणकर्ता वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे घनपाठी को दंडक्रम विक्रमादित्य और शुक्लयजुर्वेदालंकार की उपाधियां अनेक मूर्धन्य विद्वानों की उपस्थिति में प्रदान की गईं। हर-हर महादेव के जयघोष के साथ विद्वानों ने आशीर्वचन दिया।

रविवार को सांगवेद विद्यालय में आयोजित अभिनंदन समारोह में समिति की ओर से पं. विश्वेश्वर शास्त्री द्राविड़, पद्मश्री गणेश्वर शास्त्री द्राविड़, नृसिंह आश्रम स्वामी, महेश चैतन्य ब्रह्मचारी, शांता राम भानुसे, प्रो. माधव जनार्दन रटाटे और अनेक प्रदेशों से आए वेदप्रेमी उपस्थित रहे। 

वैदिक सम्राट श्रीकृष्ण शास्त्री गोडशे की जन्मशताब्दी के उपलक्ष्य में वेदमूर्ति विश्वनाथ भट्ट जोशी की स्मृति में और पारायणकर्ता की माता की पावन स्मृति में काशी के इतिहास में प्रथम बार आयोजित शुक्ल यजुर्वेद माध्यंदिनी शाखा का सम्पूर्ण एकाकी कंठस्थ दंडक्रम पारायण संपूर्ण हुआ। 

वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे घनपाठी को दंडक्रम विक्रमादित्य और शुक्लयजुर्वेदालंकार की उपाधियां दी गईं। अध्यक्षता आचार्य जगन्नाथ शास्त्री तैलंग ने की। पारायण कर्ता अभिनंदन समारोह समिति की ओर से विक्रमादित्य को  विशिष्ट सम्मान पत्र प्रदान किया गया। पिता महेश चंद्रकांत रेखे, देवेंद्र रामचंद्र गढीकर और नीलेश केदार जोशी का भी सम्मान हुआ। देवव्रत रेखे को नवरत्न जड़ित स्वर्ण कंकण और रजत मुकुट भी प्रदान किया गया। 

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