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मां कुष्मांडा दुर्गा संगीत समारोह: मनोज तिवारी के भजनों पर झूमे भक्त, काशी और आदि शक्ति का किया बखान

Thu, 05 Sep 2024 12:39 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Thu, 05 Sep 2024 12:39 AM IST
सार

Varanasi News: संगीत समारोह में देर शाम से ही भक्तों का जमावड़ा लग जा रहा है। भजनों को सुन और देवी के दर्शन कर मां के जयकारे लगाते हुए भक्त रात भर संगीत समारोह का लुत्फ उठा रहे हैं।

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Maa Kushmanda Durga Music Festival Devotees danced to bhajans of Manoj Tiwari praised Kashi
दुर्गाकुंड स्थित दुर्गा मंदिर में भजन सुनाते मनोज तिवारी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मां कुष्मांडा दुर्गा संगीत समारोह की पांचवी निशा लोक संगीत को समर्पित रही। एक तरफ काशी वालो की भजन मंडली झांझ - मजीरे के साथ सुर मिलाकर मां की महिमा का बखान करते रहे तो प्रख्यात लोक गायक मनोज तिवारी, रागिनी सोपोरी जैसे कलाकारों ने भी देर रात तक देवी भजनों से मां कुष्माण्डा का अभिषेक किया।

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कार्यक्रम का शुभारंभ त्रिदेव मंदिर सेवक परिवार द्वारा भजनों की प्रस्तुति से हुई। उन्होंने सबसे पहले 'गाइये गणपति जग वंदन' से भजन का शुभारंभ किया, उसके बाद सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। उसके उपरांत 'दरबार तेरा मइया जन्नत का नजारा है', 'नाचों गाओ खुशी मनाओ की मइया आई है', 'आएंगी शेरोवाली मां दिल से पुकार कर देखो' आदि भजनों से पूरा मंदिर गुंजायमान रखा।
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कीर्तन मण्डली में मुख्य रूप से गायक अनूप सराफ, राधेगोविन्द केजरीवाल आदि शामिल रहे। उनके साथ तबले पर पंकज राय, पैड पर पप्पू,कीबोर्ड पर रंजन, ढोलक पर मनीष तिवारी रहे।
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समारोह की दूसरी प्रस्तुति दिल्ली से आई भजन गायिका रागिनी सोपोरी की रही।

कलाकारों ने दी प्रस्तुति
उन्होंने पंजाबी- कश्मीरी शैली में जब भजनों की प्रस्तुति दी तो मंदिर प्रांगण में मौजूद हर भक्त झूमता नजर आया। उन्होंने गणेश वंदना के बाद 'जय मां दुर्गा अष्ट भवानी' प्रस्तुत किया। उसके बाद कबीर के साखी, शबद से मंदिर को गुंजायमान किया।

अंत में 'छाप तिलक धन छीनी' सुनाया तो भक्त भी सुर से सुर मिलाते नजर आए। उनके साथ तबले पर आनंद मिश्रा, ढोलक पर चंचल सिंह नामधारी, संवादिनी पर मोहित साहनी, बांसुरी पर सुधीर गौतम, साइड रिदम पर संजय रहे।

तीसरी प्रस्तुति काशी के ख्यात भजन गायक अमलेश शुक्ला अमन की रही। उन्होंने सबसे पहले 'दुर्गा मैया का सजा दरबार', 'जय जय दुर्गे नमोस्तुते' एवं 'माँ के दरबार नगाड़ा बजा' आदि भजनों की प्रस्तुति दी। उनके साथ सह गायन में रही आस्था शुक्ला ने 'लाल चूड़ियां चढ़ाऊँ', 'सबसे बड़ा तेरा नाम', पचरा गीत ' लाले रंग मंदिर पर है' सुनाकर समापन किया।

संगत में आर्गन पर रंजन दादा, तबले पर सुधांशु, ढोलक पर भोलागुरु, पैड पर विवेक रहे। कलाकारों का सम्मान महंत राजनाथ दुबे एवं विकास दुबे ने किया। व्यवस्था में चंदन दुबे, किशन दुबे आदि रहे। 

भक्तों में प्रसाद भी वितरित किया गया
मां का हुआ पंचमेवा श्रृंगार- श्रृंगार महोत्सव के पाँचवे दिन मां कुष्माण्डा का पंचमेवा श्रृंगार किया गया। नित्य की भांति सायंकाल 4 बजे माँ का पट बंद किया गया, तत्पश्चात पण्डित संजय दुबे ने माँ के पंचामृत स्नान एवं फलोदक स्नान कराया गया। उसके बाद लाल, हरे रंग की विशेष बनारसी साड़ी धारण कराया गया, उसके बाद एडी और माणिक रत्न जड़ित हार पहनाया गया, उसके बाद जलबेरा, जूही और गुलाब के मालाओं से माँ का श्रृंगार किया गया।

इस मौके पर खास तौर से तैयार की गई पंचमेवा की माला से माँ को सुशोभित किया गया। आज के श्रृंगार में हरे पान के पत्तो से माँ का मंडप सजाया गया था। श्रृंगार महोत्सव में पांचवें दिन मां को पाँच कुंतल हलवा, बूंदिया और खीर का भोग लगाया गया और भक्तों में वितरित भी किया गया। श्रृंगार संजय दुबे एवं आरती चंचल दुबे ने उतारी।

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